पेयजल संकट की ओर बढ़ रहा आरा शहर

Updated at : 26 Apr 2019 8:31 AM (IST)
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पेयजल संकट की ओर बढ़ रहा आरा शहर

आरा : तपिश बढ़ने के कारण गर्मी शुरू होने के साथ ही जिले में भूजल स्तर में गिरावट शुरू हो गयी है. शहरी क्षेत्र का जलस्तर गिरकर 31 फुट पर पहुंच गया है. सामान्य स्थिति में जलस्तर 25 फुट होता है. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी जलस्तर काफी गिरा है. लगभग छह फुट जल स्तर […]

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आरा : तपिश बढ़ने के कारण गर्मी शुरू होने के साथ ही जिले में भूजल स्तर में गिरावट शुरू हो गयी है. शहरी क्षेत्र का जलस्तर गिरकर 31 फुट पर पहुंच गया है. सामान्य स्थिति में जलस्तर 25 फुट होता है. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी जलस्तर काफी गिरा है. लगभग छह फुट जल स्तर गिर गया है.
नगर के आनंद नगर, अवधपुरी, उमानगर, मोती टोला, न्यू करमन टोला, शीतल टोला, बांस टाल, मीरगंज, श्री टोला आदि मोहल्लों में जल स्तर घटते जा रहा है. फिलहाल संकट की स्थिति नहीं है लेकिन जिस अनुपात में गिरावट हो रही है, उसके हिसाब से मई-जून में जलस्तर 40 से 42 फुट तक पहुंच जायेगा पर भूजल स्तर को बचाने के लिए प्रशासन द्वारा कोई उपाय नहीं किया जा रहा है. मई-जून में पेयजल के लिए संकट उत्पन्न होने की संभावना बढ़ गयी है.
इन उपायों पर देना होगा ध्यान : वर्षा जल संचयन की करनी होगी पहल, नगर निगम व जिला प्रशासन को उठाना होगा कारगर कदम, प्राकृतिक जलस्रोतों कुआं, तालाब एवं पोखरों का जीर्णोद्धार कराना होगा, बहुमंजिले भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य करना होगा, शहर से निकलनेवाले गंदे पानी के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर उसका इस्तेमाल अन्य कार्यों में करना होगा, बाढ़ के पानी का समुचित प्रबंधन कर उसका लाभ उठाना होगा, हर स्तर पर पानी का अपव्यय रोकना होगा,पोखर-तालाब के जीर्णोद्धार की योजना को कारगर ढंग से लागू करना होगा.
वहीं नलकूप विभाग के कार्यपालक अभियंता मनीष मंजुल ने बताया कि किसानों को लगातार बताया जाता है कि कृषि कार्य में जितना आवश्यक हो, उतनी ही पानी का उपयोग करें. पानी को बर्बाद नहीं करें. बोरिंग से ही जरूरत के अनुसार पानी निकालने की सलाह दी जाती है.
बड़े पैमाने पर भूजल का हो रहा दोहन
शहर सहित पूरे जिले में भूजल का व्यावसायिक दोहन तेजी से हो रहा है. जरूरत से ज्यादा पानी जमीन से निकाल कर बर्बाद किया जा रहा है. बोतलबंद पानी के कारोबारी हों या वाहन सर्विसिंग सेंटर चलानेवाले, इनके द्वारा बहुत पानी बर्बाद किया जाता है. उसकी तुलना में भूजल रिचार्ज की कोई व्यवस्था नहीं है. इसके जो प्राकृतिक स्रोत कुआं, तालाब व पोखर थे वे खत्म हो रहे हैं.
चापाकलों से पानी निकलने में होने लगी है परेशानी
जलस्तर में गिरावट के कारण पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न होने लगी है. चापाकलों एवं लोगों के घरों में लगे निजी पंप पानी खींचने में हांफने लगे हैं. लगभग 30 प्रतिशत चापाकलों में पानी निकालने में काफी कठिनाई होने लगी है. दुखद यह है कि नगर निगम व जिला प्रशासन इस समस्या के प्रति उदासीन है.
यदि समय रहते उपाय नहीं किये गये तो शहरवासियों सहित जिलेवासियों को गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ेगा. बता दें कि आरा शहर में बोतलबंद पानी का कारोबार उमा नगर, चंदवा, पकड़ी, महादेवा, रामगढ़िया,चौधरीयाना, करमन टोला, महादेवा, शिवगंज, भलुहीपुर में हो रहा.
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