कंडक्टर बने जिला सुपरिटेंडेंट तो हेल्पर हैं फोरमैन

Updated at : 15 Mar 2019 7:16 AM (IST)
विज्ञापन
कंडक्टर बने जिला सुपरिटेंडेंट तो हेल्पर हैं फोरमैन

आरा : अजब विभाग की गजब प्रशासनिक व्यवस्था सरकारी बस डिपो में दिखाई दे रही है. जिला सुपरिटेंडेंट बस का कंडक्टर का काम देखते हैं तो वर्कशॉप का हेल्पर फोरमैन का काम देख रहा है. लगभग 50 वर्ष पहले बने भवन की स्थिति भी काफी जर्जर हो चुकी है. भवन के छत से बरसात में […]

विज्ञापन

आरा : अजब विभाग की गजब प्रशासनिक व्यवस्था सरकारी बस डिपो में दिखाई दे रही है. जिला सुपरिटेंडेंट बस का कंडक्टर का काम देखते हैं तो वर्कशॉप का हेल्पर फोरमैन का काम देख रहा है. लगभग 50 वर्ष पहले बने भवन की स्थिति भी काफी जर्जर हो चुकी है.

भवन के छत से बरसात में पानी गिरता है. इससे दीवारों पर सीलन हो गया है पर बिहार राज्य पथ परिवहन निगम द्वारा न तो भवन की मरम्मत की जा रही है न ही नया भवन बनाया जा रहा है. इससे बस डिपो की गरिमा को धक्का पहुंच रहा है. जर्जर भवन व बसों की खराब स्थिति के कारण यात्रियों की भी संख्या काफी कम होती है.
इससे सरकारी राजस्व को काफी चूना लग रहा है. फिर भी परिवहन निगम द्वारा इस पर कार्रवाई नहीं की जा रही है. बस डिपो की गरिमा को बचाये रखने के लिए निगम के अधिकारियों को कार्रवाई करनी होगी. नये भवन की है आवश्यकता है सरकार के नियमानुसार भी इतने पुराने भवन की जगह नये भवन बनाये जाने की आवश्यकता है.
इसके साथ ही जिन मार्गों पर रेलगाड़ी नहीं चलती है. उन मार्गों पर चलनेवाले यात्रियों की सुविधा को बढ़ाया जा सके. इससे निगम के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी. बस डिपो में दिखावे के लिए वर्कशॉप है. वर्कशॉप में मिस्त्री व अन्य तकनीकी स्टाफ की काफी कमी है. हालात यह है कि वर्कशॉप में हेल्पर को फोरमैन बना दिया गया है.
भभुआ तक होता है नियंत्रण
बस डिपो का प्रशासनिक व अन्य कार्य क्षेत्र भभुआ तक फैला है. भभुआ से अधौरा तक चलनेवाली बसें भी इस डिपो के अधीन आती हैं. उस क्षेत्र का नियंत्रण कार्यालय आरा ही है.
कुल 12 ऑफिस स्टाफ हैं कार्यरत
बस डिपो के अधीन कुल 12 ऑफिस स्टाफ कार्यरत हैं. इनमें टिकट काटनेवाले, सफाई कर्मी, अकाउंट सेक्शन के साथ अन्य स्टाफ शामिल हैं.
प्रतीक्षालय हो गया है काफी नीचे
बस डिपो के प्रतीक्षालय का फ्लोर काफी नीचे हो गया है. इस कारण यात्री इसमें नहीं जाते हैं. केवल टिकट काउंटर पर टिकट कटाने जाते हैं.
बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत एमएम सिंह द्वारा बसों के खड़ा रहने के लिए लगभग 8-10 वर्ष पहले दी गयी राशि से फ्लोरिंग की गयी थी. प्रतीक्षालय का फ्लोर काफी नीचे हो गया है.
कंडक्टर को बनाया गया है जिला सुपरिटेंडेंट : जिला सुपरिटेंडेंट का दायित्व संभाल रहे नागेंद्र प्रसाद सिंह वास्तव में निगम के कंडक्टर है पर इसे प्रशासनिक विफलता कहा जाये या प्रशासन की लापरवाही उन्हें जिला सुपरिटेंडेंट का दायित्व सौंप दिया गया है. जबकि वर्षों से जिला सुपरिटेंडेंट का पद रिक्त है. इससे साबित होता है कि इस बस डिपो के प्रति अधिकारियों की सोच क्या है. बस डिपो में लगभग आधा दर्जन बसे खराब हैं.
उनका उपयोग नहीं किया जा रहा है. जबकि डिपो में कार्यशाला कार्यरत है. बसों की मरम्मत होने से राजस्व में वृद्धि तो होती ही, यात्रियों को भी काफी सुविधा होती पर लापरवाही के कारण बसें सड़ रही हैं. निगम द्वारा इनकी मरम्मत भी नहीं करायी जा रही है. प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि मरम्मत नहीं होने की हालत में खराब बसों को नीलाम के आधार पर भी नहीं बेचा जा रहा है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन