बालू पर रोक से थमे निर्माण

Published at :17 Oct 2017 1:44 PM (IST)
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बालू पर रोक से थमे निर्माण

बाहर से आनेवाला बालू लोगों की तोड़ रही कमर आरा : विगत दो माह से जिले में बालू के उठाव पर एनडीए की सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाने के बाद जिले में हाहाकार मचा हुआ है. इस कारण भवन निर्माण सहित अन्य निर्माण कार्य भी ठप पड़े हैं. विगत कुछ दिनों से अन्य जिलों में बालू […]

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बाहर से आनेवाला बालू लोगों की तोड़ रही कमर
आरा : विगत दो माह से जिले में बालू के उठाव पर एनडीए की सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाने के बाद जिले में हाहाकार मचा हुआ है. इस कारण भवन निर्माण सहित अन्य निर्माण कार्य भी ठप पड़े हैं. विगत कुछ दिनों से अन्य जिलों में बालू उठाव शुरू होने के बाद लोग किसी तरह बालू मंगा रहे हैं, पर बालू की दर इतनी महंगी है कि लोगों का कमर तोड़ रहा है. दो हजार रुपये में एक टेलर मिलने वाला बालू सात हजार रुपये में मिल रहा है. इसे लेकर लोगों में त्राहिमाम की स्थिति बनी हुई है.
निजी सहित सरकारी निर्माण कार्य पड़े हैं ठप : बालू के उठाव नहीं होने से भवन निर्माताओं में काफी मायूसी का माहौल बना हुआ है. कई लोगों को भवन निर्माण के बाद गृह प्रवेश के लिए जहां तिथि निर्धारित है, पर निर्माण नहीं होने के कारण गृह प्रवेश की तिथि में काफी परिवर्तन हो सकता है. वहीं कई लोगों ने शादी का कार्यक्रम अपने नये घर में करने का निर्णय लिया है, पर बालू नहीं मिलने से निर्माण कार्य ठप है.
लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि उनकी योजना का क्या होगा. आर्थिक संसाधन उपलब्ध होने के बाद भी आशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है. सरकार के कई विभागों द्वारा भी विकास के कार्य किये जाते हैं, पर बालू नहीं रहने के कारण सरकारी स्तर पर किये जानेवाले निर्माण कार्य ठप पड़े हैं. इससे विकास की गति काफी धीमी पड़ गयी है. पथ निर्माण विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, भवन निर्माण विभाग सहित अन्य विभागों के निर्माण कार्य ठप पड़े हुए हैं.
जिले में लगभग एक लाख मजदूर हो गये हैं बेरोजगार : बालू उठाव बंद होने से जिले में लगभग एक लाख मजदूर बेरोजगार हो गये हैं. उनकी मजदूरी छिन गयी है.
बालू उठाव बंद होने से बालू घाटों पर काम करने वाले मजदूर सिमेंट, छड़ व गिट्टी की दुकानों पर भी काम करने वाले मजदूर मजदूरी से वंचित हो गये हैं. इससे मजदूरों के बीच अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त है. वहीं उनके सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो गयी है. हालांकि कई मजदूरों ने अपना ट्रेंड चेंज कर दिया है. कई मजदूर रेलवे में खोमचा से कई सामान बेचकर अपने जीवन यापन की शुरूआत कर दिया है.
बाहर से आने वाले बालू की कीमत से हैं लोग परेशान : अन्य कई जिलों में बालू का उठाव शुरूहो गया है. इस कारण जिलावासी मजबूरी में निर्माण के लिए आसपास के जिलों से बालू मंगा रहे हैं, पर बालू के कीमत से लोग परेशान हैं.
सामान्य दिनों में जहां दो हजार रुपये में एक टेलर बालू मिलता था. वहीं पड़ोस के जिलों से बालू मंगाने पर सात हजार रुपये एक टेलर बालू के लिए देना पड़ रहा है. इससे लोगों का आर्थिक कमर टूट रहा है. लोग काफी परेशान हो रहे हैं.
बालू के लिए जिले में मचा हुआ है त्राहिमाम. दो हजार की जगह सात हजार रुपये ट्रैक्टर के रेट में मिल रहा बालू.आम से लेकर खास तक है परेशान. सूबे में कई जगह नीलामी होने के बाद भी बालू की कीमतों में नहीं मिली राहत. मजदूर भी हो गये है बेरोजगार.
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