पटना से मुगलसराय की दूरी दो घंटे में ही होगी तय

Published at :06 Sep 2017 4:26 AM (IST)
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पटना से मुगलसराय की दूरी दो घंटे में ही होगी तय

आरा : पटना से मुगलसराय जानेवाले यात्री अब दो घंटे में ही पहुंच जायेंगे. दानापुर डिवीजन के तहत आनेवाले कुछमन-बिहिटा सेक्शन पर रेलवे द्वारा जोर-शोर से काम किया जा रहा है. जर्जर रेल पटरियों व पुल-पुलिया को दुरुस्त किया जा रहा है, ताकि ट्रेनें अपनी पूरी रफ्तार से चल सकें. पटना से मुगलसराय की दूरी […]

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आरा : पटना से मुगलसराय जानेवाले यात्री अब दो घंटे में ही पहुंच जायेंगे. दानापुर डिवीजन के तहत आनेवाले कुछमन-बिहिटा सेक्शन पर रेलवे द्वारा जोर-शोर से काम किया जा रहा है. जर्जर रेल पटरियों व पुल-पुलिया को दुरुस्त किया जा रहा है, ताकि ट्रेनें अपनी पूरी रफ्तार से चल सकें. पटना से मुगलसराय की दूरी 212 किलोमीटर है.

इस दूरी को तय करने में फिलहाल एलएचबी रैक से चलनेवाली राजधानी, संपूर्ण क्रांति, पूर्वा व जनसाधरण जैसी ट्रेनों को तीन से साढ़े तीन घंटे लगते हैं, लेकिन रेलवे द्वारा जिस स्तर पर काम किया जा रहा है. उससे आनेवाले दिनों में इस रूट की अधिकतम स्पीड 110 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से ट्रेनें चलने लगेंगी. 110 किलोमीटर की रफ्तार से जब ट्रेनें चलेंगी, तो 212 किलोमीटर की दूरी दो घंटे में पूरी हो जायेगी. इससे लोग कम समय में अपने मंजिल तक पहुंच जायेंगे.

ट्रैक की अधिकतम स्पीड से चलेगी ट्रेनें : पटना-मुगलसराय रेलखंड की अधिकतम गति 110 किलोमीटर प्रतिघंटा है, लेकिन ट्रेनें लगातार इस गति से भी नहीं चल पाती है. पुराने पुल व जर्जर लाइन की वजह से इस रेलखंड पर औसत स्पीड कम हो जाती है. राजधानी जैसी ट्रेन की औसत स्पीड 79 किलोमीटर प्रतिघंटा हो गयी है. आरा रुकनेवाली पूर्वा एक्सप्रेस पटना व मुगलसराय के बीच 110 किलोमीटर की रफ्तार भी नहीं पकड़ पाती है. वहीं मुगलसराय के बाद जिवनाथपुर स्टेशन व मरीपट्टी स्टेशन के बीच यह ट्रेन 130 किलोमीटर की अधिकतम स्पीड से चलती है.
40 साल बाद हटा कॉशन
पटना-मुगलसराय रेलखंड के चौसा व गहमर रेलवे स्टेशन के बीच कर्मनाशा नदी पर करीब 40 साल पहले कॉशन लगाकर छोड़ दिया गया था. इसके कारण पुल से गुजरने के दौरान 40 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से ट्रेनें चलती थीं. इसी तरह आरा व कुल्हड़िया के बीच जमीरा हॉल्ट के समीप व कुल्हड़िया व कोइलवर रेलवे स्टेशन के बीच लंबे समय से कॉशन लगाकर रेलवे अधिकारी भूल गये थे, लेकिन 2015 के बाद से पुराने पुलों व जर्जर लाइनों को बदलने का काम युद्ध स्तर से शुरू किया गया. इसी वजह से इन जगहों से कॉशन हटा दिया गया है. ऐसे में ट्रेनें अपनी पूरी रफ्तार से चल पाती है.
क्या कहते हैं अधिकारी
रेलवे संरक्षा, सुरक्षा व समयानुपालन पर ध्यान देता है. यात्रियों को बेहतर तरीके सुविधा मिले. इसको ध्यान में रखते हुए काम किया जाता है. ट्रेनों की औसत स्पीड पहले के मुकाबले काफी बेहतर हुई है.
संजय प्रसाद, जनसंपर्क अधिकारी, दानापुर डिवीजन
याद किये गये डॉ राधाकृष्णन
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