बॉल-बियरिंग बदलने की देरी पड़ी भारी, टूटकर गिरा विक्रमशिला सेतु का स्लैब

विक्रमशिला सेतु के स्पैन को जैक से उठाकर बॉल-बियरिंग को सही स्थिति में स्थापित करने की तैयारी अधूरी ही रह गयी और इसी बीच पुल का एक स्लैब अचानक भरभराकर गंगा में गिर गया.
भागलपुर से ब्रजेश माधुर्य की रिपोर्ट भागलपुर. विक्रमशिला सेतु के स्पैन को जैक से उठाकर बॉल-बियरिंग को सही स्थिति में स्थापित करने की तैयारी अधूरी ही रह गयी और इसी बीच पुल का एक स्लैब अचानक भरभराकर गंगा में गिर गया. यदि समय रहते दिल्ली से तकनीकी रिपोर्ट आ जाती और तय एजेंसी को बहाल कर बॉल-बियरिंग का मरम्मत कार्य पूरा करा लिया जाता, तो संभवतः एक स्लैब दूसरे स्लैब के समानांतर बना रहता और इस तरह की गंभीर स्थिति नहीं बनती. मार्च में आईआईटी दिल्ली की विशेषज्ञ टीम ने निरीक्षण के दौरान स्पष्ट तौर पर बॉल-बियरिंग के खिसकने की बात कही थी और साथ ही आने वाले दिनों में सेतु की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर खतरे की आशंका भी जताई थी. इसके बावजूद आवश्यक कार्रवाई समय पर नहीं हो सकी.विक्रमशिला सेतु की संरचना में बॉल-बियरिंग को अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, क्योंकि यही स्पैन को संतुलन में बनाये रखता है. बॉल-बियरिंग के खिसक जाने के कारण ही एक स्पैन दूसरे स्पैन के समानांतर स्थिति में नहीं रह सका. परिणामस्वरूप पुल पर चलने के दौरान ही लोगों को यह महसूस होने लगा था कि कहीं आगे का हिस्सा दबा हुआ है तो कहीं ऊंचाई असमान है, जिससे संरचना की अस्थिरता का संकेत पहले से ही मिल रहा था.
हर दिन 2-3 घंटे पुल बंद करने की योजना बनी, लेकिन लागू नहीं हो सकी
मरम्मत कार्य के तहत संबंधित स्पैन को जैक की मदद से उठाकर बॉल-बियरिंग को बदला या दुरुस्त करने की विस्तृत योजना तैयार की गयी थी. पुल निर्माण निगम ने इस कार्य पर पांच करोड़ रुपये से अधिक खर्च का अनुमान भी लगाया था. योजना के अनुसार मरम्मत के दौरान प्रतिदिन दो से तीन घंटे के लिए पुल पर यातायात पूरी तरह बंद रखने की रूपरेखा तैयार थी, ताकि कार्य सुरक्षित तरीके से पूरा किया जा सके. हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर स्वीकृति और आगे की प्रक्रिया में लगातार देरी होती रही और काम शुरू नहीं हो सका.रेलिंग मरम्मत से लेकर रंग-रोगन तक के कार्य भी लंबित रहे
पुल की बाहरी संरचना को मजबूत करने के लिए क्षतिग्रस्त रेलिंग की मरम्मत, रंग-रोगन और एक्सपेंशन ज्वाइंट की मरम्मत जैसे कार्य भी प्रस्तावित थे. इन कार्यों को समय रहते पूरा किया जाता तो संरचना की कई कमियां दूर हो सकती थी. लेकिन मंजूरी और एजेंसी चयन की प्रक्रिया में देरी के कारण ये सभी काम लंबित रह गये.
2018 में भी हुआ था बड़ा मरम्मत कार्य, जैक से उठाया गया था पुल
वर्ष 2018 में विक्रमशिला सेतु की व्यापक मरम्मत की गयी थी, जिसमें करीब साढ़े 12 करोड़ रुपये खर्च हुए थे. उस समय मुंबई की एजेंसी रोहरा रिबिल्ड एसोसिएट को बॉल-बियरिंग बदलने का कार्य सौंपा गया था, जिसके लिए पुल के स्पैन को जैक से उठाया गया था. इस दौरान कई दिनों तक पुल पर यातायात बंद रहा था. उस परियोजना में स्पैन की दरारों पर कार्बन प्लेट चिपकाने, एक्सपेंशन ज्वाइंट बदलने और सड़क की मरम्मत जैसे कार्य भी शामिल थे, जो करीब डेढ़ वर्ष तक चले थे.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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