Bhagalpur news उधार के आशियाने में मरीजों का इलाज

Updated at : 12 Mar 2025 12:05 AM (IST)
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Bhagalpur news उधार के आशियाने में मरीजों का इलाज

गोपालपुर प्रखंड में स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी नजर आ रही है़ यहां अधिकांश हेल्थ सेंटर उधार के आशियाने में संचालित हो रहे हैं

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विपिन ठाकुर, गोपालपुर

राज्य सरकार स्वास्थ्य व शिक्षा पर काफी बल दे रही है़ बावजूद गोपालपुर प्रखंड में स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी नजर आ रही है़ यहां अधिकांश हेल्थ सेंटर उधार के आशियाने में संचालित हो रहे हैं, जहां मरीजाें का इलाज किया जा रहा है़ प्रखंड में 29 हेल्थ सेंटर की स्वीकृति बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने दी है. इनमें वर्तमान में सिर्फ 16 हेल्थ सेंटर ही संचालित किये जा रहे हैं. इनमें भी मात्र चार हेल्थ सेंटर को अपना भवन है़

सिर्फ चार हेल्थ सेंटर को है अपना भवन

प्रखंड के धरहरा, डिमाहा, रतनगंज व कालूचक में स्थित हेल्थ सेंटर को ही अपना भवन है. बड़ी मकंदपुर, गोसाईंगांव, अभिया, पचगछिया, लतरा, पोखरिया, कमलाकुंड, सैदपुर, बुद्धूचक, तिनटंगा करारी, आजमाबाद, नवटोलिया डिमाहा का हेल्थ सेंटर सरकारी स्कूल, पंचायत भवन व सामुदायिक भवन के एक कमरे में संचालित हैं. कहीं फूस के कमरे में संचालित किये जा रहे हैं.

बाथरूम व शुद्ध पेयजल के लिए जाना पड़ता है ग्रामीणों के घर

एक कमरे में दवा व महिला स्वास्थ्य कर्मियों के बैठने के लिए उपस्कर की व्यवस्था है. रोगियों की जांच पड़ताल की सिर्फ खानापूर्ति ही हो पाती है. भवन के अभाव में तिनटंगा दक्षिणी, डुमरिया, चपरघट व सुकटिया बाजार में हेल्थ सेंटर शुरूनहीं किया जा सका है. हेल्थ सेंटर में दो एएनएम, एक एएनएम और एक सीएचओ का पदस्थापन होना है. स्वीकृत पद के आधे से भी कम स्वास्थ्य कर्मियों से हेल्थ सेंटर पर काम लिया जा रहा है. हेल्थ सेंटर में कार्यरत एएनएम को सप्ताह में दो दिन आंगनबाडी केंद्रों पर टीकाकरण करना है. ओपीडी सुबह नौ से पांच बजे तक करना है. गैर संचारी रोग का स्क्रीनिंग करना है. हेल्थ सब सेंटर के भवन में ही अलग-अलग पार्ट में एएनएम का आवास व हेल्थ सेंटर चलाना है, लेकिन हेल्थ सेंटर का अपना भवन नहींं होने से स्वास्थ्य विभाग की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ आम लोगों को नहीं मिल पाता है. नाम नहीं छापने की शर्त पर इन हेल्थ सेंटरों में पदस्थापित एएनएम ने बताया कि मात्र एक कमरे में किसी तरह काम करना पड़ रहा है. न दवा रखने का समुचित प्रबंध है और न ही हमलोगों के बैठने की जगह है. ऐसे में मरीजों का इलाज करने में काफी परेशानी होती है. बाथरूम व शुद्ध पेयजल नहीं रहने से आसपास के ग्रामीणों के घरों में आवश्यकता पड़ने पर जाना पड़ता है.

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