Bhagalpur news संतो की वाणी से सराबोर हुआ तिनटंगा करारी गांव

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Bhagalpur news संतो की वाणी से सराबोर हुआ तिनटंगा करारी गांव

तिनटंगा करारी गांव के कबीर मठ में दो दिवसीय 22वें सत्संग समारोह में विभिन्न स्थानों से पहुंचे संतों की ओजस्वी वाणी से तिनटंगा करारी गांव का माहौल भक्ति के रस से सराबोर हो गया.

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गंगा नदी के किनारे स्थित तिनटंगा करारी गांव के कबीर मठ में दो दिवसीय 22वें सत्संग समारोह में विभिन्न स्थानों से पहुंचे संतों की ओजस्वी वाणी से तिनटंगा करारी गांव का माहौल भक्ति के रस से सराबोर हो गया. संतों ने कबीर दास के अवतरण से लेकर उनके विचारों से श्रद्धालुओं को अवगत कराया. संतों ने अपनी ओजस्वी वाणी से बताया कि कबीर साहेब के जन्म को लेकर अलग-अलग मत हैं. कुछ लोगों का मानना है कि कबीर साहब का जन्म एक मुस्लिम परिवार में तो कुछ उन्हें जन्म से हिंदू मानते हैं. कुछ लोगों का मानना है कि जन्म से तो कबीर साहेब मुसलमान थे, लेकिन उन्होंने गुरु रामानंद से हिंदू धर्म का ज्ञान प्राप्त किया था. जब चारों तरफ जात-पात, छुआछूत, धार्मिक पाखंड, अंधश्रद्धा से भरे कर्मकांड, मुल्ला-मौलवी तथा पंडित-पुरोहितों के ढ़ोंग और सांप्रदायिक उन्माद का बोलबाला था. सदैव कड़वी और खरी बातें करने वाले स्वच्छंद विचारक संत कबीर दास को कई बार हिंदू-मुसलमान दोनों ही समुदायों से धमकियां मिली उन्होंने अपना सारा जीवन देशाटन करने और साधु-संतों की संगति में व्यतीत कर दिया और अपने उन्हीं अनुभवों को उन्होंने मौखिक रूप से कविताओं अथवा दोहों के रूप में लोगों को सुनाया. एक ही ईश्वर को मानने वाले कबीर दास निर्गुण ब्रह्म के उपासक थे. आडंबरों के घोर विरोधी रहे संत कबीर ने अपना संपूर्ण जीवन समाज सुधार के कार्यों में लगा दिया था.सज्जन व्यक्ति अपने शरीर को अपने लिए नहीं बल्कि परमार्थ में लगाते हैं. अपनी रचनाओं में उन्होंने सदैव हिंदू-मुस्लिम एकता पर जोर दिया और हिंदू या इस्लाम धर्म को नहीं मानते हुए जीवन पर्यन्त पूर्ण रूप से धर्म निरपेक्ष मूल्यों तथा मानव सेवा के प्रति समर्पित रहे. कई सदियां बीतने के बाद भी कबीर दास के विचार आज भी प्रासंगिक हैं. संतों ने एक से बढ़ कर एक भजन गाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया. प्रयाग राज से पधारे संत कृपा शरण साहेब, निर्मल साहेब, अखंड स्वरूप साहब, छत्तीसगढ़ के रामलाल साहेब, तिनटंगा करारी के श्याम साहेब व राम साहेब सहित दर्जनों संतों ने अपनी वाणी से भक्ति की गंगा बहायी. काफी संख्या में श्रद्धालुओं मौके पर मौजूद थे.

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Jitendra Tomar

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By Jitendra Tomar

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