bhagalpur news. मौसम बदलते ही बढ़ने लगा मच्छर का प्रकोप, सचेत नहीं है विभाग व निगम

Updated at : 06 Apr 2026 1:06 AM (IST)
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bhagalpur news. मौसम बदलते ही बढ़ने लगा मच्छर का प्रकोप, सचेत नहीं है विभाग व निगम

मौसम बदलने और ठंड का असर कम होने के बाद शहर के विभिन्न इलाकों में मच्छर को पनपने के लिए पर्याप्त जगह मिल रही है

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मौसम बदलने और ठंड का असर कम होने के बाद शहर के विभिन्न इलाकों में मच्छर को पनपने के लिए पर्याप्त जगह मिल रही है. ये मच्छर थोड़े पानी में भी लार्वा डाल रहे हैं. इसे नजरअंदाज करना खतरनाक मच्छरों को बढ़ावा देना है. फिर भी नगर निगम का स्वास्थ्य शाखा सचेत नहीं है. जिम्मेदारों की मानें तो रोस्टर के अनुसार फॉगिंग हो रहा है, लेकिन लोगों को कहीं नहीं दिख रहा है.

विभिन्न मोहल्ले के लोगों ने बयां किया दर्द

शहर के विभिन्न मोहल्ले में बारिश के बाद जलजमाव की समस्या बढ़ गयी है. कई जगह खुले नाले में मच्छर पनप रहे हैं. बड़े-बड़े मच्छर घर और बाहर सभी जगह झुंड में दिखने लगे हैं. खासकर खुले में नोचने को दौड़ पड़ते हैं.

वार्ड आठ अंतर्गत नरगा के मो सिकंदर आजम ने बताया कि मच्छर का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. इससे यहां के लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. शाम को इतने मच्छर आ जाते हैं कि आवाज होने लगती है. वहीं वार्ड 42 के महेशपुर के मुनीलाल मंडल ने बताया कि अबतक इस क्षेत्र में कभी फॉगिंग नहीं करायी गयी और न ही ब्लिचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जाता है. वार्ड 46 अंतर्गत सिकंदरपुर पटेलनगर के निलेश सिंह ने बताया कि खुला नाला मच्छरों के पनपने का बड़ा जगह है. यहां पर ब्लिचिंग पाउडर का छिड़काव नहीं होता है. मारूफचक की संगीता देवी ने बताया कि यह मोहल्ला शहरी व ग्रामीण दोनों क्षेत्र में पड़ता है. कोई व्यवस्था नहीं की गयी है. यहां सालोभर जलजमाव की समस्या रहती है. इशाकचक के बाबुल विवेक ने बताया कि धीमी गति से भोलानाथ फ्लाइओवर ब्रिज का निर्माण चल रहा है. ऐसे में इस क्षेत्र का पानी निकासी बाधित है. ऐसे में मच्छर पनप रहे हैं. लोगों का कहना है कि फलेरिया व मलेरिया की दवा से बीमारी ठीक हो सकती है, लेकिन मच्छरों को रोके बिना बीमारी होने से कोई नहीं बचा सकता है.

घर में नहीं करें पानी जमा

विशेषज्ञों की मानें, तो मच्छरों को पनपने के लिए एक कप पानी ही बहुत है. घरों में जमा होने वाला पानी सबसे खतरनाक है. इससे मच्छरों का लार्वा को अनुकूल जगह मिल जाती है. वे क्रियाशील हो जाते हैं. 21 दिन की साइकिल में ये लार्वा घर में ही व्यस्क हो रहे हैं. घरों में बंद पड़े कूलर, गमला, पानी की टंकी आदि में मच्छरों के लार्वा पनप रहे हैं. घरों के भीतर जमा पानी में से पांच दिन के अंदर लार्वा युवा मच्छर बन जाता है और घर के अंदर ही उसे पोषण मिल जाता है.

मलेरिया विभाग ने बताया कि मच्छर दो प्रकार के पैदा होते हैं. इनमे एक काटने वाला होता है, जो टेंटाकिल गड़ाता है. दूसरा चूसक प्रवृत्ति का होता है, जो डंक गड़ा नहीं सकता. विभिन्न किस्मों के मच्छर अलग-अलग पानी में पैदा होते हैं. इसमें गंदे पानी से लेकर साफ पानी में मच्छरों की उत्पत्ति के लिए होता है. बताया कि मच्छर घरों की खुली टंकियां, विंडो कूलर, गमलों में भरा पानी समेत खुले टैंक में मच्छरों का लार्वा पनप सकते हैं. शहर के निचली बस्तियों में भी खुले में पानी भरकर रखने वाले बर्तनों में भी लार्वा हो सकते हैं.

किसी पानी में पनपते हैं कौन मच्छर

सामान्य पानी : मलेरिया मच्छर

गंदा पानी : फाइलेरिया का मच्छर

साफ पानी : डेंगू का मच्छर

कहते हैं जिम्मेदार

फॉगिंग को लेकर पहला रोस्टर 15 दिन का था. इसलिए सभी जगह पहुंच नहीं पाया होगा. दूसरा रोस्टर जारी होने के बाद इसका असर दिखने लगेगा. एंटी लार्वा दवा भी छिड़काव किया जा रहा है. शॉर्टेज होने पर स्टॉक को लेकर ऑर्डर दिया गया है.

आदित्य जायसवाल, स्वास्थ्य शाखा प्रभारी, नगर निगम

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ATUL KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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