कहलगांव के वर्मा कॉलोनी में अब तक नहीं पहुंची पक्की सड़क, बरसात में घर से निकलना हो जाता है मुश्किल

Author Rishi Kant|Edited by Pratyush Prashant
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कहलगांव वर्मा क्लोनि की कच्ची सड़क | Prabhat Khabar Network

कहलगांव वर्मा कॉलोनी की कच्ची सड़क | Prabhat Khabar Network

Bhagalpur News: कहलगांव की वर्मा कॉलोनी में आजादी के 78 साल बाद भी पक्की सड़क नहीं है। बारिश में मुख्य सड़क तालाब बन जाती है, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्रशासनिक खींचतान के कारण विकास की योजनाएं अटकी हुई हैं।

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Bhagalpur News: भागलपुर जिले के कहलगांव शहर की वर्मा कॉलोनी आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रही है. यहां के सैकड़ों परिवारों को पक्की सड़क नसीब नहीं हुई है. पूर्व में लीची बगीचा के नाम से पहचान रखने वाली इस कॉलोनी की मुख्य सड़क, जो बबिता इंडेन गैस एजेंसी तक जाती है, बारिश के दिनों में पूरी तरह कीचड़ और पानी से भर जाती है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है.

बारिश में सड़क नहीं, दलदल बन जाता है रास्ता

बरसात शुरू होते ही कच्ची सड़क पर पानी भर जाता है. लगातार वाहनों की आवाजाही से सड़क पूरी तरह टूट चुकी है. जगह-जगह करीब एक फीट तक गहरे गड्ढे बन गए हैं.

ऐसी स्थिति में पैदल चलना भी जोखिम भरा हो जाता है. दोपहिया और चारपहिया वाहन अक्सर कीचड़ में फंस जाते हैं, जिससे लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है.

बच्चों की पढ़ाई और मरीजों की जिंदगी पर असर

स्थानीय शिक्षिका विनती कुमारी बताती हैं कि बारिश के दिनों में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर हो जाती है.

उनके अनुसार, एंबुलेंस तक कॉलोनी के अंदर नहीं पहुंच पाती. बच्चों को कीचड़ से होकर स्कूल जाना पड़ता है और कई बार उन्हें किताबें बचाने के लिए विशेष इंतजाम करने पड़ते हैं.

ओगरी पंचायत के विभिन्न टोले और मोहल्लों के बच्चे मध्य विद्यालय खुटहरी पढ़ने जाते हैं. सड़क की बदहाल स्थिति के कारण कई बच्चे लगातार स्कूल नहीं पहुंच पाते. वहीं निजी स्कूलों की वैन भी कॉलोनी के अंदर आने से मना कर देती हैं.

नौकरीपेशा लोग भी परेशान

वर्मा कॉलोनी की यह सड़क बबिता इंडेन गैस एजेंसी तक जाती है. ऐसे में गैस सिलेंडर लेने आने वाले ग्राहकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार ग्राहक सिलेंडर लेकर फिसल जाते हैं. वहीं नौकरीपेशा लोग रोज कीचड़ से होकर कार्यालय पहुंचते हैं. बारिश के दिनों में समय पर ऑफिस पहुंचना भी चुनौती बन जाता है.

गंदा पानी बना बीमारी का खतरा

सड़क पर बने गहरे गड्ढों में कई दिनों तक पानी जमा रहता है. इससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ने लगा है.

स्थानीय लोगों को डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का डर सता रहा है. उनका कहना है कि यदि जल्द सड़क और जल निकासी की व्यवस्था नहीं हुई तो आने वाले दिनों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं.

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सबसे बड़ा सवाल, सड़क बनाएगा कौन?

स्थानीय लोगों के अनुसार, समस्या केवल सड़क की नहीं बल्कि प्रशासनिक खींचतान की भी है.

नगर पंचायत इस क्षेत्र को ग्राम पंचायत का हिस्सा बताती है, जबकि ग्राम पंचायत इसे शहरी क्षेत्र कहकर अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट जाती है. इसी अधिकार क्षेत्र के विवाद में वर्षों से सड़क और नाली निर्माण की योजनाएं फाइलों में अटकी हुई हैं.

इसका खामियाजा यहां रहने वाले सैकड़ों परिवारों को भुगतना पड़ रहा है.

लोगों की मांग, अब मिले स्थायी समाधान

स्थानीय निवासियों का कहना है कि विकास के दावों के बीच उनकी कॉलोनी आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. उनका सवाल है कि जब सरकार हर घर तक सड़क पहुंचाने की बात करती है, तो अनुमंडल मुख्यालय से सटी वर्मा कॉलोनी अब तक इस सुविधा से क्यों वंचित है.

लोग चाहते हैं कि प्रशासन जल्द जिम्मेदारी तय करे और सड़क व नाली निर्माण का काम शुरू कराए, ताकि हर बरसात में होने वाली परेशानी से स्थायी राहत मिल सके.

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