उमड़ने लगा कांवरियों का सैलाब, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आईं बड़ी खामियां, स्थानीय लोगों ने प्रशासन को दिए अहम सुझाव

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श्रावणी मेला

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Shravani Mela 2026: श्रावणी मेला 2026 शुरू होने में बस 10 दिन बाकी हैं. हजारों कांवरिये जल भरने के लिए पहुंच रहे हैं. वहीं, प्रशासन की तैयारियों में कुछ कमियां सामने आई हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का सबब बन सकती हैं. स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी चिंताओं को साझा किया है और प्रशासन को महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं.

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सुलतानगंज(भागलपुर) से शुभंकर की रिपोर्ट

Shravani Mela 2026: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 शुरू होने में अब सिर्फ 10 दिन शेष हैं. उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर हजारों कांवरिये रोज बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर रवाना हो रहे हैं. पश्चिम बंगाल, असम, नेपाल और भूटान से भी श्रद्धालुओं का आगमन तेज हो गया है. प्रशासन 24 जुलाई तक सभी तैयारियां पूरी करने का दावा कर रहा है, लेकिन प्रभात खबर की ग्राउंड रिपोर्ट में कई ऐसी कमियां सामने आई हैं, जो मेले के दौरान श्रद्धालुओं की परेशानी बढ़ा सकती हैं. स्थानीय लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और व्यवसायियों ने प्रशासन के सामने कई अहम सुझाव भी रखे हैं.

कांवरियों की संख्या बढ़ी, तैयारियों की परीक्षा शुरू

श्रावणी मेला शुरू होने से पहले ही सुलतानगंज में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है. उत्तरवाहिनी गंगा घाटों पर जल भरने वालों की संख्या हर दिन बढ़ रही है. ऐसे में प्रशासन की व्यवस्थाओं की असली परीक्षा अब शुरू हो चुकी है.

हालांकि जिला प्रशासन का कहना है कि घाटों की बैरिकेडिंग, सुरक्षा, ट्रैफिक, स्वास्थ्य शिविर, पेयजल और रोशनी की व्यवस्था युद्धस्तर पर की जा रही है, लेकिन कई स्थानों पर काम अभी भी अधूरा है.

जलजमाव और टूटी सड़कें बनीं सबसे बड़ी परेशानी

युवा नेता सन्नी चौधरी ने बताया कि महेंद्र गोप द्वार के आगे सड़क पर अब भी जलजमाव है. कई स्थानों पर सड़कें टूटी हुई हैं, जिससे कांवरियों को परेशानी हो सकती है.

उन्होंने कहा कि नई सीढ़ी घाट जाने वाले मार्ग पर नाला निर्माण भी धीमी गति से चल रहा है. यदि समय रहते यह काम पूरा नहीं हुआ तो बरसात के दौरान स्थिति और गंभीर हो सकती है.

नमामि गंगे घाट पर अस्पताल और स्थायी व्यवस्था की मांग

राजद नगर अध्यक्ष मो. अफरोज आलम ने श्रावणी मेले को राष्ट्रीय मेले का दर्जा देने की मांग दोहराई. उन्होंने नमामि गंगे घाट पर मेला स्पेशल अस्पताल, पूरे वर्ष बैरिकेडिंग और सुरक्षित स्नान व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत बताई.

उनका कहना है कि हर साल लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, इसलिए अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए.

Shravani Mela 2026: रेलवे ओवरब्रिज की जर्जर हालत पर बढ़ी चिंता

पूर्व पार्षद दीपांकर प्रसाद और नागरिक संगठन से जुड़े दीपक कुमार (आर्यन) ने रेलवे ओवरब्रिज की बदहाल स्थिति को सबसे बड़ा खतरा बताया.

उनके अनुसार पुल पर कई जगह गड्ढे हैं और सड़क जर्जर हो चुकी है. मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही में यह बड़ा हादसा भी बन सकता है.

Shravani Mela 2026: पेयजल, शौचालय और नाला निर्माण पर उठे सवाल

मारवाड़ी युवा मंच के सुनील रामुका ने अपर रोड में जलजमाव और पेयजल संकट को वर्षों पुरानी समस्या बताया. उन्होंने मांग की कि स्थायी शौचालय और पेयजल केंद्र बनाए जाएं, ताकि पूरे वर्ष स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को सुविधा मिल सके.

व्यवसायी साकेत कुमार ओझा ने स्टेशन रोड पर अधूरे नाला निर्माण की ओर ध्यान दिलाते हुए जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था करने की मांग की.

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सामने आए सुझाव

युवा सचिन कुमार ने सुलतानगंज-तारापुर रेलवे ओवरब्रिज के फुटपाथ की बैरिकेडिंग कराने और लोहे के पोल पर नीचे तक प्लास्टिक कवर लगाने की मांग की, ताकि दुर्घटनाओं की आशंका कम हो.

वहीं थाना रोड निवासी राजेश चौधरी ने मुख्य चौक पर स्थायी ट्रैफिक पुलिस की तैनाती और अलग से मेला प्रबंधन समिति गठित करने का सुझाव दिया.

प्रशासन की कोशिशों की भी हुई सराहना

जहां कई लोगों ने कमियां गिनाईं, वहीं बजरंग दल के स्वप्निल झा ने जिला प्रशासन की तैयारियों की सराहना भी की. उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी के नेतृत्व में इस बार कई कार्य तेजी और पारदर्शिता के साथ किए जा रहे हैं.

24 जुलाई पर टिकी सबकी नजर

प्रशासन ने सभी विभागों को 24 जुलाई तक सभी तैयारियां पूरी करने का लक्ष्य दिया है. लेकिन कांवरियों की लगातार बढ़ती भीड़ यह संकेत दे रही है कि अब समय बहुत कम बचा है.

आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि इस बार श्रावणी मेला केवल आस्था का केंद्र बनेगा या श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित यात्रा का अनुभव भी मिलेगा.

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प्रत्युष प्रशांत

लेखक के बारे में

By प्रत्युष प्रशांत

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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