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कहीं भगवान सत्यनारायण की पूजा, तो कहीं दीपोत्सव

Updated at : 15 Nov 2024 9:14 PM (IST)
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कहीं भगवान सत्यनारायण की पूजा, तो कहीं दीपोत्सव

जिले के विभिन्न गंगा तटों पर कार्तिक पूर्णिमा को लेकर शुक्रवार को गंगा स्नान के लिए हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा. कार्तिक पूर्णिमा पर कहीं दीपोत्सव, कहीं भगवान सत्यनारायण की पूजा हुई.

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जिले के विभिन्न गंगा तटों पर कार्तिक पूर्णिमा को लेकर शुक्रवार को गंगा स्नान के लिए हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा. कार्तिक पूर्णिमा पर कहीं दीपोत्सव, कहीं भगवान सत्यनारायण की पूजा हुई.

शहर के सभी गंगा तटों बूढ़ानाथ, एसएम कॉलेज सीढ़ी घाट, खिरनी घाट, मुसहरी घाट, बरारी लंच घाट, बरारी सीढ़ी घाट व पुल घाट पर प्रात: से ही गंगा स्नान करने वालों का जनसैलाब उमड़ा. गंगा तटों पर गंगा स्नान कर श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की और फिर दीपदान किया. गंगा स्नान करने के लिए शहर के आसपास गांव के ही लोग नहीं बल्कि बांका, मधेपुरा, सुपौल, अररिया, गोड्डा, दुमका व जमुई से लोग पहुंचे. झारखंड के सुदूर गांव से श्रद्धालु गंगा तट पर पहुंचे थे.

बूढ़ानाथ मंदिर में मनायी गयी देव दीपावली

बूढ़ानाथ मंदिर परिसर में कार्तिक पूर्णिमा पर महाआरती सेवा संघ की ओर से देव दीपावली मनायी गयी. इससे पहले रंगोली सजायी गयी और 1000 दीप प्रज्वलित कर दीपोत्सव मनाया गया. कार्यक्रम का संचालन महंत शिवनारायण गिरि ने किया. कार्यक्रम में प्रबंधक बाल्मिकी सिंह, महाआरती सेवा संघ के मुन्ना गांधी, चंद्रशेखर मिश्रा आदि उपस्थित थे. राणी सती मंदिर में दीपोत्सव मनाया गया. राणी सती दादी जी का गेंदा, गुलाब और रजनीगंधा फूल से भव्य शृंगार किया गया. दादीजी सेवा समिति की ओर से अध्यक्ष अनिल खेतान, ओमप्रकाश कानोडिया, मनोज चुड़ीवाला आदि का योगदान रहा. वहीं भगवान सत्यनारायण की पूजा शहर के अधिकतर घरों में हुई. गोशाला में सजायी गयी फल व सब्जियों की रंगोली

गोशाला परिसर में देव दीपावली मनायी गयी. इससे पहले लगभग 70 किग्रा सब्जी व फल से आकर्षक रंगोली सजायी गयी. 1008 दीप प्रज्वलित की गयी. महामंत्री गिरधारी केजरीवाल, सुनील जैन, रोहित बाजोरिया, घनश्याम कोटरीवाल, अशोक भिवानीवाला, राजेश बंका, दीपक रुंगटा, नरेश गोयनका के संचालन में अनुष्ठान, भजन, कीर्तन, शंख ध्वनि से माहौल भक्तिमय हो गया.

पारंपरिक तरीके से मना लोक पर्व सामा-चकेवा

कार्तिक पूर्णिमा पर शहर के आदमपुर, छोटी खंजरपुर, सुरखीकल मिश्रा टोला, तिलकामांझी, नाथनगर, सिकंदरपुर, बरारी आदि मुहल्लों में शुक्रवार को सामा-चकेबा का पर्व पारंपरिक तरीके से मनाया गया. श्रद्धालुओं ने बताया कि द्वापर युग में कृष्ण की पुत्री और ऋषि पुत्र चक्रवाक के प्रेम पर आधारित भाई बहन का यह पवित्र लोकपर्व सदियों से मिथिला में मनाया जाता आ रहा है. वर्तमान में सामा चकेवा मिथिला सहित भारत के लोकप्रिय लोक नृत्यों में गिना जाता है. बहन भाइयों की लंबी उम्र की कामना करती है. बहन भाइयों को चूड़ा गुड़, मिठाई सौगात के रूप में दी.

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गंगा तटों पर एसडीआरएफ की टीम कर रही थी गश्ती

गंगा घाटों पर स्नान-दान के समय भीड़ को देखते हुए एसडीआरएफ के मोटर बोट से गश्ती की व्यवस्था की गयी थी. इस दौरान बाबूपुर मोड़ घाट पर हेड कांस्टेबल मिथिलेश कुमार सिंह, दिलीप सोरेन, मनोरंजन कुमार और रुदल यादव गश्ती करते दिखे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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