17 दिन बाद शुरू होगा श्रावणी मेला, सुलतानगंज में पहली बार मिलेगा आधुनिक अरघा सिस्टम, युद्धस्तर पर चल रही तैयारी

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श्रावणी मेला

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Shravani Mela 2026: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 के शुभारंभ में अब मात्र 17 दिन बाकी हैं. सुलतानगंज में युद्धस्तर पर तैयारियां चल रही हैं, जिसमें पहली बार लगने वाला आधुनिक अरघा सिस्टम खास आकर्षण होगा. प्रशासन श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का आश्वासन दे रहा है.

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सुलतानगंज(भागलपुर) से रिपोर्ट

Shravani Mela 2026: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 के शुभारंभ में अब सिर्फ 17 दिन शेष हैं. 30 जुलाई से शुरू होने वाले इस महापर्व को लेकर सुलतानगंज पूरी तरह शिवमय होता नजर आ रहा है. गंगा घाटों से लेकर बाबा अजगैवीनाथ मंदिर, रेलवे स्टेशन और कच्चे कांवरिया पथ तक हर जगह युद्धस्तर पर काम चल रहा है. प्रशासन का दावा है कि इस बार श्रद्धालुओं को पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और व्यवस्थित यात्रा का अनुभव मिलेगा.

रविवार को कई कांवरिये गंगाजल लेकर बाबा वैद्यनाथ धाम के लिए रवाना हुए. इसके साथ ही सुलतानगंज में "बोल बम" का माहौल बनने लगा है. आने वाले दिनों में यहां लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी. इसी को देखते हुए प्रशासन तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है.

पहली बार बाबा अजगैवीनाथ मंदिर में लगेगा आधुनिक अरघा सिस्टम

इस बार श्रावणी मेले की सबसे बड़ी खासियत बाबा अजगैवीनाथ मंदिर में पहली बार लगाया जा रहा आधुनिक अरघा सिस्टम होगा. मंदिर परिसर में स्टील संरचना का निर्माण अंतिम चरण में है और इसी सप्ताह अरघा सिस्टम लगाने का काम शुरू होने की संभावना है.

नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अभिषेक आनंद ने बताया कि जिला प्रशासन के निर्देश पर यह व्यवस्था श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखकर की जा रही है. अरघा सिस्टम के माध्यम से शिवभक्त अधिक सुगमता से जलार्पण कर सकेंगे. इससे लंबी कतारों को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी.

मंदिर परिसर में पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, साफ-सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाओं को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है. प्रशासन का लक्ष्य है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सहज दर्शन-पूजन का अनुभव मिले.

Shravani Mela 2026: गंगा घाटों पर सुरक्षा और सौंदर्यीकरण का काम तेज

नमामि गंगे घाट, अजगैवीनाथ मंदिर घाट और सीढ़ी घाट पर रंग-रोगन, सौंदर्यीकरण और सुरक्षा कार्य तेजी से चल रहे हैं. श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए बांस की बैरिकेडिंग, सुरक्षा जाल और जियो बैग लगाए जा रहे हैं.

बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता आदित्य प्रकाश के अनुसार बैरिकेडिंग की पहली परत का काम पूरा हो चुका है, जबकि दूसरी परत का कार्य जल्द शुरू किया जाएगा. इसका उद्देश्य गंगा घाटों पर बढ़ती भीड़ के बीच सुरक्षित जलभराव और जल उठाव सुनिश्चित करना है.

शिव थीम पर सज रहा पूरा मेला क्षेत्र

इस बार सुलतानगंज आने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था के साथ आकर्षक दृश्य भी देखने को मिलेंगे. पहली बार पूरे मेला क्षेत्र को भगवान शिव की थीम पर सजाया जा रहा है.

दीवारों पर शिव थीम आधारित पेंटिंग बनाई जा रही है. सुलतानगंज से देवघर जाने वाले मार्ग पर डमरू, त्रिशूल और अन्य शिव प्रतीकों की विशेष लाइटिंग लगाई जा रही है. रात के समय यह सजावट श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगी.

उद्घाटन समारोह के लिए मंच निर्माण का कार्य भी शुरू हो चुका है.

कांवरिया पथ पर बढ़ाई जा रही सुविधाएं

कच्चे कांवरिया पथ पर उजले बालू बिछाने का काम तेज गति से चल रहा है ताकि नंगे पैर चलने वाले शिवभक्तों को परेशानी न हो.

इसके साथ ही जर्मन हैंगर, स्विस कॉटेज, विश्राम स्थल, पेयजल केंद्र, चेंजिंग रूम, शौचालय और सफाई व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है. प्रशासन का प्रयास है कि लंबी पैदल यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को हर जरूरी सुविधा समय पर उपलब्ध हो.

रेलवे स्टेशन भी तैयार, 24 घंटे बिजली की व्यवस्था

श्रावणी मेले में लाखों श्रद्धालु ट्रेन से सुलतानगंज पहुंचते हैं. इसे देखते हुए रेलवे स्टेशन पर साफ-सफाई, यात्री सुविधाएं, फुट ओवरब्रिज और कांवरिया सेवा केंद्रों का काम तेजी से किया जा रहा है. पूजा सामग्री और कांवर स्टॉल की भी बेहतर व्यवस्था की जा रही है.

वहीं बिजली विभाग ने विशेष मेंटेनेंस अभियान चलाकर मेला अवधि में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति की तैयारी पूरी कर ली है. इससे मेला क्षेत्र में रोशनी और आवश्यक सेवाओं में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी.

अनुभवी अधिकारियों को बनाए रखने की उठी मांग

श्रावणी मेले की तैयारियों के बीच प्रशासनिक अधिकारियों के संभावित तबादले को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विनय शर्मा ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मेला समाप्त होने तक वर्तमान बीडीओ और नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी का स्थानांतरण नहीं किया जाए.

उनका कहना है कि वर्तमान अधिकारियों को पिछले वर्षों के मेला संचालन का अनुभव है और ऐसे समय में उनका बने रहना व्यवस्थाओं की निरंतरता के लिए जरूरी होगा. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अदाणी, एनटीपीसी सहित सार्वजनिक उपक्रमों के सीएसआर फंड से हाईमास्ट लाइट, स्थायी विश्राम स्थल, पेयजल और अन्य आधारभूत सुविधाओं का विकास कराया जाए ताकि भविष्य के मेलों में भी श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें.

30 जुलाई से शुरू होगा आस्था का महापर्व

प्रशासन ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि 30 जुलाई से पहले हर तैयारी पूरी कर ली जाए. लक्ष्य केवल मेला आयोजित करना नहीं, बल्कि देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को सुरक्षित, स्वच्छ, सुव्यवस्थित और यादगार श्रावणी मेला का अनुभव देना है. आने वाले 17 दिनों में तैयारियों की रफ्तार और तेज होने की उम्मीद है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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