01 सितंबर से तीन महीने के लिए बंद रहेगा विक्रमशिला सेतु, जानिए किन जिलों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर

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विक्रमशिला सेतु

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विक्रमशिला सेतु 1 सितंबर से 3 महीने के लिए पूरी तरह बंद रहेगा. इसका सीधा असर भागलपुर, कोसी और सीमांचल जिलों पर पड़ेगा. सरकार वैकल्पिक मार्गों और फेरी सेवाओं की तैयारी कर रही है.

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भागलपुर से रिपोर्ट

Vikramshila Setu : अगर आप भागलपुर से नवगछिया, कटिहार, पूर्णिया, खगड़िया, सहरसा, सुपौल, अररिया या सीमांचल की ओर नियमित सफर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है. उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाला विक्रमशिला सेतु 01 सितंबर से पूरी तरह बंद होने जा रहा है. करीब तीन महीने तक इस पुल पर किसी भी तरह के वाहनों का परिचालन नहीं होगा. इस दौरान सरकार पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से को स्थायी रूप से दुरुस्त करेगी. लक्ष्य है कि 30 नवंबर तक नया मजबूत स्लैब तैयार कर पुल पर सामान्य परिचालन फिर से शुरू कर दिया जाए.

आखिर 01 सितंबर से ही क्यों बंद किया जा रहा है विक्रमशिला सेतु

पहले चर्चा थी कि पुल को 15 सितंबर से बंद किया जाएगा, लेकिन अब सरकार ने निर्णय लिया है कि 31 अगस्त की देर रात से ही वाहनों की आवाजाही रोक दी जाएगी. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि मौजूदा बेली ब्रिज को हटाकर स्थायी कंक्रीट स्लैब का निर्माण किया जाना है. यह काम तभी संभव है, जब पुल पर पूरी तरह ट्रैफिक बंद हो.

भारी मशीनों, क्रेन और कंक्रीटिंग के काम के लिए पूरी जगह खाली रखना जरूरी है. यही कारण है कि सरकार ने तीन महीने की पूर्ण बंदी का फैसला लिया है.

तीन मई की घटना के बाद से अस्थायी व्यवस्था के सहारे चल रहा था पुल

विक्रमशिला सेतु पर संकट की शुरुआत तीन मई की रात हुई थी, जब पिलर संख्या चार और पांच के बीच का करीब 34 मीटर लंबा स्लैब टूटकर गंगा नदी में गिर गया था. इस घटना के बाद भागलपुर समेत अंग प्रदेश, कोसी और सीमांचल के कई जिलों का सड़क संपर्क गंभीर रूप से प्रभावित हुआ.

स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन ने बेली ब्रिज बनाकर अस्थायी रूप से परिचालन शुरू कराया, लेकिन इस व्यवस्था में रोजाना लंबा जाम लगना आम बात बन गई. भारी वाहनों की आवाजाही भी चुनौती बनी रही.

Vikramshila Setu : तीन महीने तक आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर

विक्रमशिला सेतु उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच सबसे महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग माना जाता है. इसके बंद होने का असर सिर्फ भागलपुर तक सीमित नहीं रहेगा. रोजाना नौकरी, कारोबार, इलाज, शिक्षा और कृषि कार्य के लिए यात्रा करने वाले हजारों लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ेगा.

व्यापारियों की माल ढुलाई, किसानों की उपज की आवाजाही और परिवहन व्यवसाय पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है. इसलिए प्रशासन पहले से पूरी रणनीति तैयार करने में जुट गया है.

प्रशासन तैयार कर रहा है वैकल्पिक व्यवस्था

सरकार नहीं चाहती कि तीन महीने की बंदी के दौरान लोगों को पूरी तरह परेशानी झेलनी पड़े. इसलिए जिला प्रशासन, पथ निर्माण विभाग और पटना मुख्यालय के अधिकारी मिलकर रूट डायवर्जन और फेरी सेवा जैसी वैकल्पिक व्यवस्था तैयार कर रहे हैं.

सूत्रों के अनुसार, पुल बंद होने से पहले ट्रैफिक के दबाव का अध्ययन किया जाएगा. इसके बाद किन रास्तों से वाहनों को भेजा जाएगा और कहां फेरी सेवा उपलब्ध होगी, इसकी विस्तृत जानकारी आम लोगों को पहले ही उपलब्ध करा दी जाएगी.

सरकार का दावा, नवंबर के बाद मिलेगी बड़ी राहत

बिहार सरकार का कहना है कि यह असुविधा केवल कुछ महीनों की है, लेकिन इसका लाभ लंबे समय तक मिलेगा. पथ निर्माण मंत्री ई. कुमार शैलेंद्र ने कहा है कि विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से को पूरी तरह नए सिरे से मजबूत बनाया जाएगा. बेली ब्रिज केवल अस्थायी व्यवस्था थी. स्थायी निर्माण पूरा होने के बाद लोगों को सुरक्षित और सुगम यात्रा का लाभ मिलेगा.

सरकार का लक्ष्य 30 नवंबर तक निर्माण कार्य पूरा कर स्थायी रूप से वाहनों का परिचालन फिर से शुरू करना है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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