Bhagalpur news भगवान की सेवा और सात्विक गृहस्थ जीवन ही मानव का सच्चा धर्म

श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन बुधवार को अयोध्या से पधारे कथा वाचक नीरज जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भगवान की महिमा व गृहस्थ जीवन के महत्व के बारे में विस्तार से बताया.
सुलतानगंज भीरखुर्द पंचायत स्थित उधाडीह स्टेडियम में श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन बुधवार को अयोध्या से पधारे कथा वाचक नीरज जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भगवान की महिमा व गृहस्थ जीवन के महत्व के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि भगवान हमारी संस्कृति की रक्षा करते हैं, इसलिए हमें भी भगवान के स्वरूप, मंदिर और सनातन परंपराओं की रक्षा करनी चाहिए. भगवान की सेवा और पूजा से भक्त के भीतर भगवद ममत्व बढ़ता है और वही ईश्वर की कृपा का कारण बनता है. कथावाचक ने भगवान श्रीकृष्ण के 16,108 रानियों से विवाह का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान ने केवल विवाह नहीं किया, बल्कि उन्हें अपनाकर अपनी कृपा का प्रमाण दिया. विवाह केवल सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि जन्म-जन्मांतर तक साथ निभाने की घोषणा है. उन्होंने कहा कि जिस संस्कार में विशेष रूप से “वाह-वाह” हो, वही विवाह है. विवाह वह पवित्र बंधन है जिसमें दो परिवारों के बीच संबंध स्थापित होते हैं और दो शरीर एक प्राण बनकर जीवन की नयी शुरुआत करते हैं. उन्होंने कहा कि विवाह हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में प्रमुख स्थान रखता है. विवाह के बाद एक ब्रह्मचारी गृहस्थ बनता है और अपने दायित्वों का निर्वहन कर जीवन को पूर्णता की ओर ले जाता है. भगवान श्रीकृष्ण ने अनेक पाणिग्रहण कर संदेश दिया कि समर्थ व्यक्ति अपने दायित्वों को निभाता है, जबकि सामान्य मनुष्य को केवल एक गृहस्थ जीवन को ही सात्विकता और जिम्मेदारी के साथ निभाना चाहिए. कथा स्थल पर चंदन कुमार, मुक्ति कुमार, डॉ विवेकानंद, आशु कुमार, मंटू कुमार, विनय कुमार, नयन कुमार, गुंजन कुमार, रामदेव ठाकुर, चुन्नू यादव, रवि कुमार, मोनू एवं विष्णु कुमार सहित काफी संख्या में ग्रामीण व आयोजन समिति के सदस्य कथा की सफलता में सक्रिय रूप से जुटे हैं.
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