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Sugar Free Mango: अब आम भी होगा शुगर फ्री, अनुसंधान की तैयारी में बिहार के साइंटिस्ट

Updated at : 20 Jun 2025 3:38 PM (IST)
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सांकेतिक फोटो

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Sugar Free Mango: भागलपुर के बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर में शुगर फ्री आम पर रिसर्च शुरू किया जा रहा है. जिसके बाद शुगर के मरीज भी आम का स्वाद ले सकेंगे. कुलपति डॉ. डी. आर सिंह ने इस पहल की जानकारी दी.

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Sugar Free Mango: आम के सीजन में शुगर के मरीज चाह कर भी रसीले आम का स्वाद नहीं चख पाते हैं. इस समस्या को दूर करने के लिए अब बाजार में शुगर फ्री आम भी उपलब्ध होगा. उस आम को खाने से मरीज का शुगर नहीं बढ़ेगा और आम के स्वाद का मजा भी ले सकेंगे. बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) सबौर भागलपुर इस पर रिसर्च करने की तैयारी में जुटा है. सीनियर वैज्ञानिकों की टीम इस पर गहन अध्ययन करेगी.

मांग को देखते हुए रिसर्च की तैयारी

बता दें कि पिछले 10 जून को बीएयू में 11वीं आम प्रदर्शनी लगाई गई थी. इसमें उपस्थित मुंगेर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजय कुमार ने शुगर फ्री आम पर रिसर्च की जरूरत बताई थी. इस मौके पर ही कुलपति डॉ. डी. आर सिंह ने इसे गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय में रिसर्च की बात कही. इस विषय पर तुरंत पहल करते हुए सीनियर अधिकारियों के साथ बैठकें हो रही हैं. यह योजना बहुत जल्द धरालत पर उतरेगी और शुगर फ्री आम विकसित होगा.

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आम के रिसर्च में खास रहा है सबौर

ज्ञात हो कि आम के रिसर्च में सबौर बहुत सालों से खास रहा है. देश के सबसे पहले हाइब्रिड आम की दो प्रभेद महमूद बहार और प्रभाशंकर सबौर कृषि महाविद्यालय से ही विकसित हुई थी. इस विश्वविद्यालय ने आम का सिडलेस सहित कई प्रभेद विकसित किया है. बीएयू सबौर के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने कहा कि शुगर के रोगी भी आम खा सकें, ऐसे प्रभेद के विकास पर काम आरंभ कर दिया गया है. मांग के अनुसार विश्वविद्यालय अनुसंधान का प्रयास कर रहा है. आने वाले दिनों में परिणाम दिखेगा.

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Rani Thakur

लेखक के बारे में

By Rani Thakur

बंगाल की धरती पर एक दशक से अधिक समय तक समृद्ध पत्रकारिता अनुभव के साथ, रानी ठाकुर अब बिहार की धरती पर अपनी लेखनी से पहचान बना रही हैं. कोलकाता में कई राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित अखबारों के लिए रिपोर्टिंग और सब-एडिटिंग का अनुभव हासिल करने के बाद, वे अब प्रभात खबर के डिजिटल डेस्क से जुड़ी हैं, जहां वे लाइफ स्टाइल की खबरों के माध्यम से अपनी रचनात्मक सोच और पत्रकारिता कौशल को नई दिशा दे रही हैं.

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