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Bhagalpur news अब सुई-धागे से संवरने लगी किस्मत

Updated at : 15 Feb 2026 12:42 AM (IST)
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Bhagalpur news अब सुई-धागे से संवरने लगी किस्मत

अब आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चे जीविका दीदियों द्वारा सिले हुए ड्रेस पहनेंगे.

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अब आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चे जीविका दीदियों द्वारा सिले हुए ड्रेस पहनेंगे. इस उद्देश्य से अकबरनगर-सुलतानगंज क्षेत्र में करीब 80 जीविका दीदियों को सिलाई का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है. शनिवार को आजीविका विशेषज्ञ डॉ अंजनी कुमार एवं बीपीएम अनिल कुमार ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का निरीक्षण किया. बताया कि दो दिनों के भीतर सिलाई कार्य शुरू कर दिया जाएगा, जिसके लिए दो स्थानों को चिह्नित किया जा रहा है.

स्थानीय स्तर पर बनेगा बच्चों का ड्रेस

आजीविका विशेषज्ञ ने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त जीविका दीदियां अब आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए ड्रेस तैयार करेंगी. कपड़ा काट कर उपलब्ध कराया जायेगा. केवल सिलाई करना होगा. इससे जहां एक ओर महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता मिलेगी, वहीं दूसरी ओर बच्चों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण ड्रेस उपलब्ध हो सकेगा. निरीक्षण के दौरान सिलाई कार्य को सुचारु रूप से संचालित करने, गुणवत्ता बनाए रखने एवं समयबद्ध तरीके से ड्रेस तैयार करने को लेकर कई आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए.

महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक सराहनीय पहल के तहत अब आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चे जीविका दीदियों द्वारा सिले गए ड्रेस पहनेंगे. इस पहल ने न सिर्फ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर खोले हैं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का नया रास्ता भी दिखाया है.

80 महिलाओं को मिला हुनर, खुले रोजगार के द्वार

आजीविका विशेषज्ञ ने कहा कि अकबरनगर-सुलतानगंज क्षेत्र में करीब 80 जीविका दीदियों को सिलाई का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है. इसके बाद जीविका दीदी को भी इससे जोड़ने की पहल की जायेगी. जिससे रोजगार का अवसर बढ़ेगा. प्रशिक्षण के बाद अब ये महिलाएं आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए बच्चों के ड्रेस तैयार करेंगी. इससे महिलाओं की आय बढ़ेगी और उन्हें घर के पास ही सम्मानजनक रोजगार मिलेगा. निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने ड्रेस की गुणवत्ता, समय पर आपूर्ति और पारदर्शी कार्यप्रणाली को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिया. बताया कि बच्चों के लिए बनाये जाने वाले ड्रेस मानक के अनुरूप और टिकाऊ होंगे.

आत्मनिर्भर महिला, सशक्त समाज

यह पहल सिर्फ ड्रेस सिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने, स्वावलंबन बढ़ाने और सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने की दिशा में एक ठोस प्रयास है. जीविका दीदियों के हाथों में जब सुई-धागा आया, तो उसके साथ ही उनके भविष्य की तस्वीर भी बदलने लगी.

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JITENDRA TOMAR

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By JITENDRA TOMAR

JITENDRA TOMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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