लोहिया पुल टू अलीगंज फोरलेन बनाने का वर्क ऑर्डर मिलने के बाद भी अटका निर्माण, वजह-एक अमीन की पोस्टिंग नहीं हो सकी

Published by : SANJEEV KUMAR JHA Updated At : 13 Jun 2026 8:16 AM

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फोरलेन निर्माण में सबसे बड़ी अड़चन राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) के सीमांकन को लेकर सामने आ रही है. जमीन की वास्तविक सीमा तय नहीं होने के कारण निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है.

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भागलपुर से ब्रजेश की रिपोर्ट :

लोहिया पुल से अलीगंज तक लगभग 3.70 किलोमीटर लंबी सड़क को फोरलेन बनाने की योजना को पथ निर्माण विभाग से स्वीकृति मिल चुकी है. इसके साथ ही निविदा प्रक्रिया पूरी कर चयनित एजेंसी को कार्य आवंटित कर वर्क ऑर्डर भी जारी कर दिया गया है. इसके बावजूद निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हो सका है.

निर्माण शुरू करने से पहले सीमांकन जरूरी

फोरलेन निर्माण में सबसे बड़ी अड़चन राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) के सीमांकन को लेकर सामने आ रही है. जमीन की वास्तविक सीमा तय नहीं होने के कारण निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है. पथ निर्माण विभाग द्वारा जगदीशपुर अंचल अधिकारी को इस संबंध में कई बार पत्र भेजा गया है. जून में ही तीन बार पत्राचार किया जा चुका है, लेकिन अब तक अमीन की प्रतिनियुक्ति नहीं की गयी है. इसी कारण सीमांकन की प्रक्रिया लंबित है. अमीन की प्रतिनियुक्ति और आरओडब्ल्यू सीमांकन पूरा नहीं होने की वजह से चयनित एजेंसी भी कार्य शुरू नहीं कर पा रही है, जिससे फोरलेन निर्माण कार्य अटका हुआ है.

आरओडब्ल्यू सीमांकन में क्या होता है?

सीमांकन के तहत सड़क की वास्तविक सीमा तय की जाती है. आरओडब्ल्यू सीमांकन में यह देखा जाता है कि सड़क की स्वीकृत चौड़ाई कितनी है. जैसे 12 मीटर, 24 मीटर या 30 मीटर. वह जमीन पर कहां तक जाती है. सरकारी और निजी भूमि का अलग-अलग निर्धारण किया जाता है. इस प्रक्रिया में यह स्पष्ट किया जाता है कि सड़क चौड़ीकरण में कौन-सी जमीन सरकारी है और कौन-सी निजी है. यदि किसी दुकान, घर या संरचना ने आरओडब्ल्यू के अंदर निर्माण कर लिया है, तो उसे अतिक्रमण माना जाता है. अमीन व सर्वे टीम जमीन पर पिलर, निशान या जीपीएस सर्वे के जरिये वास्तविक आरओडब्ल्यू लाइन को चिह्नित करती है. इसके बाद तय होता है कि सड़क कितनी चौड़ी की जायेगी और कितना हिस्सा हटाना या अधिग्रहित करना होगा. यदि निजी भूमि आरओडब्ल्यू में आती है तो मुआवजा, अधिग्रहण और हटाने की प्रक्रिया शुरू होती है.

31 मई 2027 तक डेडलाइन, अटकने से परियोजना पूरी करने में होगी देरी

फोरलेन का निर्माण करीब 50.17 करोड़ की राशि से होगी. इसके लिए 31 मई 2027 डेडलाइन निर्धारित की गयी है. यह अगर समय से शुरू नहीं होती है, तो परियोजना पूरी करने में देरी होगी. अंचल अधिकारी को लिखे गये पत्र में भी कहा गया है कि 01 जून 2026 द्वारा संवेदक को औपबंधिक कार्यादेश निर्गत किया जा चुका है. इस कार्य की समाप्ति तिथि 31 मई 2027 है.

बोले कार्यपालक अभियंता-अब सीओ से मिलकर मांगेंगे अमीन

फोरलेन के लिए आरओडब्ल्यू के सीमांकन के लिए अबतक अमीन नहीं मिला है. पथ निर्माण विभाग, भागलपुर के कार्यपालक अभियंता अरविंद कुमार गुप्ता ने बताया कि सीओ को कई बार पत्राचार भी किया जा चुका है. अब सीओ से मिलकर ही अमीन प्रतिनियुक्ति के लिए अनुरोध किया जायेगा. क्योंकि, इसके बिना कार्य आरंभ नहीं हो सकेगा.

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