संजीव झा, भागलपुर
भाजपा, जदयू सहित एनडीए गठबंधन के नेताओं की ओर से किसान सभा के ऐतिहासिक होने के दावे के बीच यह राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. राजनीति के जानकारों की मानें, तो किसान सभा से गर्मी की दस्तक के बीच राजनीतिक तापमान बढ़ेगा. यह सभा बिहार विधानसभा चुनाव का अघोषित शंखनाद माना जा रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा के तुरंत बाद पीएम मोदी की किसान सभा पूर्वी बिहार, कोसी व सीमांचल के 13 जिलों के विधानसभा क्षेत्रों में एनडीए की जीत के लिए मजबूत जमीन तैयार करेगी. पीएम मोदी ने किसान समृद्धि योजना की 19 वीं किस्त जारी की. किसान सभी जातियों के होते हैं, जो अन्न उपजाते हैं. पूर्वी बिहार-कोसी-सीमांचल के इलाके कृषि बाहुल्य रहे हैं. भागलपुर में कृषि विवि भी है. राजनीति के विशेषज्ञों की मानें, तो पूर्वी बिहार-कोसी-सीमांचल के 13 जिलों- भागलपुर, बांका, मुंगेर, लखीसराय, जमुई, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार, खगड़िया के सभी विधानसभा क्षेत्रों पर कमोबेश किसान सभा का असर पड़ेगा. जहां पहले से एनडीए गठबंधन का कब्जा है, वहां उसकी स्थिति और मजबूत होगी. दूसरी ओर जिन सीटों पर राजद व कांग्रेस का कब्जा है, वहां एनडीए गठबंधन के लिए जमीन तैयार होगी. यही वजह है कि कांग्रेस, राजद समेत इंडिया गठबंधन की नजर भी इस सभा पर रही. इंडिया गठबंधन के सामने इस सभा की काट तलाशने की चुनौती भी होगी.-पहली बार किसी सभा के लिए भागलपुर स्थित मनाली चौक पर एनडीए का कार्यालय किसान सम्मान समारोह से छह दिन पहले 18 फरवरी को खुला. ऐसा अक्सर चुनाव के दिनों में ही देखा जाता है कि राजनीतिक पार्टियां अपना-अपना कार्यालय खोलती हैं. लेकिन इस बार किसानों के विकास की बात करने के लिए आयोजित समारोह सफल रहे, इसके लिए कार्यालय खुला. कार्यालय में एनडीए से जुड़ी पार्टियों के नेता पूरी निष्ठा से जुटे रहे और तैयारियों को अंजाम देते रहे.
-एनडीए की एकजुटता एक माह पहले से ही भागलपुर समेत 13 जिलों में देखने को मिलने लगी थी. इसमें भाजपा व जदयू के मंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष से लेकर सांसद, विधायक और स्थानीय कार्यकर्ता तक लगे रहे. भाजपा के दरभंगा विधायक संजय सरावगी लगातार भागलपुर में कैंप कर कार्यक्रम के जिला प्रभारी के रूप में काम कर रहे थे. भाजपा के प्रदेश महामंत्री मिथिलेश तिवारी प्रचार प्रबंधन का काम देख रहे थे. अश्विनी चौबे और शाहनवाज हुसैन लोगों को आमंत्रित करने में लगे थे.-जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ दिलीप जायसवाल संयुक्त रूप से कार्यक्रम के संबंध में विस्तृत जानकारी देने के लिए प्रेसवार्ता की. बिहार सरकार के कृषि मंत्री मंगल पांडेय लगातार भागलपुर आ रहे थे और यहीं से बांका समेत विभिन्न जिलों में जाकर तैयारी की समीक्षा कर रहे थे. कार्यक्रम से एक दिन पहले ही कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह भागलपुर पहुंच गये. जदयू सांसद अजय कुमार मंडल, लोजपा सांसद राजेश वर्मा भी कार्यक्रम की सफलता के लिए लगे रहे. एनडीए के पुरुष व महिला कार्यकर्ताओं ने स्कूटी से रैली निकाल कर लोगों के बीच प्रचार किया. कार्यक्रम को लेकर शहर व आसपास का क्षेत्र बैनर व पोस्टर से पटा रहा. जिससे यह आभास हो रहा था भाजपा व जदयू कार्यकर्ता एकजुट होकर शिद्दत से कार्यक्रम की सफलता में लगे हैं.
सब भाय-बहिन सिनी के प्रणाम करै छियै
सिल्क सिटी भागलपुर सोमवार को किसान सम्मान निधि की 19वीं किस्त के रूप में देश भर के 9.80 करोड़ किसानों के खाते में 22,000 करोड़ रुपये भेजे जाने की साक्षी बनी. मंच पर पहुंचते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चिरपरिचित अंदाज में सबसे पहले भारत माता की जय के बाद कहा-अंगराज दानवीर कर्ण के धरती, महर्षि मेंहीं के तपस्थली, भगवान वासुपूज्य के पंच कल्याणक भूमि, विश्व प्रसिद्ध विक्रमशिला महाविहार, बाबा बूढ़ानाथ के पवित्र भूमि पे सब भाय बहिन सिनी के प्रणाम करै छियै. महाकुंभ के समय मंदार की धरती पर आना और इस योजना को किसानों को देना मेरे लिए सौभाग्य की बात है. ये शहीद तिलकामांझी की धरती है, ये सिल्क सिटी भी है. बाबा अजगैबीनाथ की इस पावन धरा में इस समय महाशिवरात्रि की भी खूब तैयारियां चल रही हैं. ऐसे पवित्र समय में मुझे पीएम किसान सम्मान निधि की एक और किस्त देश के करोड़ों किसानों को भेजने का सौभाग्य मिला है. भागलपुर के हवाई अड्डा मैदान में आयोजित इस समारोह में 13 जिलों भागलपुर, बांका, जमुई, मुंगेर, खगड़िया, अररिया, किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, सुपौल, सहरसा, लखीसराय, बेगूसराय के किसानों समेत लाखों की संख्या में आम लोग शामिल हुए. इस दौरान बिहार के 75 लाख से अधिक किसानों के खाते में करीब 1600 करोड़ रुपये पहुंचे.अब मखाना के निर्यात की बारी
श्री मोदी ने कहा-कई कृषि उत्पाद ऐसे हैं, जिनका पहली बार निर्यात शुरू हुआ है. अब बारी बिहार के मखाना की है. मखाना आज देश के शहरों में सुबह के नाश्ते का प्रमुख अंग हो चुका है. मैं भी 365 दिन में से 300 दिन मखाना जरूर खाता हूं. ये एक सुपरफूड है, जिसे अब दुनिया के बाजारों तक पहुंचाना है. इसलिए, इस वर्ष के बजट में मखाना किसानों के लिए मखाना बोर्ड बनाने का ऐलान किया गया है. ये मखाना बोर्ड, मखाना उत्पादन, प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग, ऐसे हर पहलू में बिहार के मेरे किसानों की मदद करेगा. पूर्वी भारत में फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए बिहार एक बड़े केंद्र के रूप में उभरने वाला है. बिहार में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नॉलॉजी एंड एंटरप्रेन्योशिप की स्थापना की जायेगी.भागलपुर में पेड़ भी सोना उगलते हैं
श्री मोदी ने कहा-आज भारत, कपड़े का भी बहुत बड़ा निर्यातक बन रहा है. भागलपुर में तो कहा जाता है कि यहां पेड़ भी सोना उगलते हैं. भागलपुरी सिल्क, तसर सिल्क, पूरे हिंदुस्तान में मशहूर है. दुनिया के दूसरे देशों में भी तसर सिल्क की डिमांड लगातार बढ़ रही है. केंद्र सरकार, रेशम उद्योग को बढ़ावा देने के लिए फेब्रिक और यार्न डाइंग यूनिट, फेब्रिक प्रिंटिंग यूनिट, फेब्रिक प्रोसेसिंग यूनिट, ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण पर बहुत जोर दे रही है. इससे भागलपुर के बुनकर साथियों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी और उनके उत्पाद दुनिया के कोने-कोने में पहुंच पायेंगे. यहां गंगा जी पर चार लेन के पुल के निर्माण भी तेजी से काम चल रहा है. इस पर 1100 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किये जा रहे हैं.पहले यूरिया के लिए किसान खाते थे लाठी
पीएम मोदी ने कहा-विकसित भारत के चार मजबूत स्तंभ हैं. ये स्तंभ हैं- गरीब, हमारे अन्नदाता किसान, हमारे नौजवान, हमारे युवा और हमारे देश की नारी शक्ति. एनडीए सरकार चाहे केंद्र में हो या फिर यहां नीतीश जी के नेतृत्व में चल रही सरकार हो, किसान कल्याण हमारी प्राथमिकता में है. बीते दशक में हमने किसानों की हर समस्या के समाधान के लिए पूरी शक्ति से काम किया है. बीते वर्षों में हमने सैकड़ों आधुनिक किस्म के बीज किसानों को दिये. पहले यूरिया के लिए किसान लाठी खाता था और यूरिया की कालाबाजारी होती थी. आज देखिए, किसानों को पर्याप्त खाद मिलती है. हमने तो कोरोना के महासंकट में भी किसानों को खाद की कमी नहीं होने दी. आप कल्पना कर सकते हैं कि अगर एनडीए सरकार न होती, क्या होता? आज भी बरौनी खाद कारखाना बंद पड़ा होता. दुनिया के अनेक देशों में खाद की बोरी, जो 3000 रुपये की मिल रही है, वो आज हम किसानों को 300 रुपये से भी कम में देते हैं.मछली उत्पादन में बिहार शानदार प्रदर्शन
पीएम ने कहा- हमने पहली बार मछली पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा दी है. मछली उत्पादन में बिहार शानदार प्रदर्शन कर रहा है. मुख्यमंत्री ने बताया, पहले मछली हम बाहर से लाते थे और आज मछली में बिहार आत्मनिर्भर बन गया है. 2014 के पहले 2013 में जब मैं चुनाव अभियान के लिए आया था, तब मैंने कहा था कि आश्चर्य हो रहा है कि बिहार में इतना पानी है, मछली हम बाहर से क्यों लाते हैं. आज बिहार, देश के टॉप-पांच बड़े मछली उत्पादक राज्यों में से एक बन चुका है. भागलपुर की पहचान तो गंगा जी में रहनेवाली डॉल्फिन से भी होती रही है. ये नमामि गंगे अभियान की भी बहुत बड़ी सफलता है.प्रधानमंत्री की खास बातेंबिहार में बाढ़ से भी बहुत नुकसान होता है. इसके लिए भी हमारी सरकार ने हजारों करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स स्वीकृत किये हैं. इस वर्ष के बजट में तो पश्चिमी कोशी नहर इआरएम परियोजना के लिए मदद देने की घोषणा की गयी है. इस परियोजना से मिथिलांचल क्षेत्र में 50 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचाई के दायरे में आयेगी.
दलहन और तिलहन में भारत आत्मनिर्भर हों, यहां ज्यादा से ज्यादा फूड प्रोसेसिंग उद्योग लगें और हमारे किसानों के उत्पाद दुनिया भर तक पहुंचें, इसके लिए सरकार एक के बाद एक नये कदम उठा रही है. सपना है कि दुनिया की हर रसोई में भारत के किसान का उगाया कोई न कोई उत्पाद होना ही चाहिए.पीएम धन धान्य योजना के तहत देश के 100 ऐसे जिलों की पहचान की जायेगी, जहां सबसे कम फसल उत्पादन होती है. फिर ऐसे जिलों में खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाया जायेगा.
जो भूमिहीन हैं, जो छोटे किसान हैं, उनकी आय को बढ़ाने में एनडीए सरकार पशुपालन को बढ़ावा दे रही है. पशुपालन, गांव में हमारी बहनों को लखपति दीदी बनाने में भी बहुत काम आ रहा है. देश में अभी तक करीब सवा करोड़ लखपति दीदी बन चुकी हैं. इनमें बिहार की भी हजारों जीविका दीदियां शामिल हैं.बीते दशक में भारत में दूध उत्पादन, 14 करोड़ टन से बढ़कर 24 करोड़ टन दूध उत्पादन हो रहा है. यानी भारत ने दुनिया के नंबर वन दूध उत्पादक के रूप में अपनी भूमिका को और सशक्त किया है. डेयरी सेक्टर में बिहार में दो परियोजनाएं तेजी से पूरी हो रही हैं. मोतिहारी का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, बेहतरीन देसी नस्ल की गायों के विकास में मदद करेगा. दूसरा, बरौनी का मिल्क प्लांट है. इससे क्षेत्र के तीन लाख किसानों को फायदा होगा, नौजवानों को रोजगार मिलेगा.
क्या-क्या सौगातें
पीएम किसान सम्मान निधि की 19वीं किस्त का 9.80 करोड़ किसानों के खाते में ट्रांसफरवारिसलीगंज-नवादा-तिलैया (36.45 किमी) रेलखंड का दोहरीकरण कार्यइसमाइलपुर-रफीगंज रोड ओवरब्रिज100,000 किसान उत्पादक संगठनमोतिहारी में स्वदेशी नस्लों के लिए उत्कृष्टता केंद्रबरौनी में दुग्ध उत्पाद संयंत्रडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

