bhagalpur news. छर्री-बालू, छड़ व सीमेंट पर महंगाई की मार, वर्तमान वैश्विक हालात में नहीं सुधरेगी स्थिति

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bhagalpur news. छर्री-बालू, छड़ व सीमेंट पर महंगाई की मार, वर्तमान वैश्विक हालात में नहीं सुधरेगी स्थिति

पिछले दो माह में सभी तरह के निर्माण सामग्री छर्री-बालू, छड़ व सीमेंट की कीमत 30 फीसदी बढ़ गयी और रियल इस्टेट के कारोबार पर 30 फीसदी तक असर दिखने लगा है.

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पिछले दो माह में सभी तरह के निर्माण सामग्री छर्री-बालू, छड़ व सीमेंट की कीमत 30 फीसदी बढ़ गयी और रियल इस्टेट के कारोबार पर 30 फीसदी तक असर दिखने लगा है. रियल इस्टेट कारोबारियों की मानें तो वर्तमान वैश्विक हालात में स्थिति सुधरने के आसार नहीं दिख रहे हैं. क्रेडाई के प्रदेश उपाध्यक्ष आलोक अग्रवाल ने बताया कि सीमेंट की मांग बढ़ने पर समूहीकरण कर कंपनी दाम बढ़ा रही है. ऐसा पहले भी हुआ था और उन्हें सरकार से फटकार भी पड़ी. टैरिफ बढ़ने का असर छड़ के दामों पर भी पड़ा है. सरकार ने हाल में ही स्टील में सेफगार्ड ड्यूटी लगा दी. इससे छड़ कंपनियों ने कीमतें बढ़ा दी. वहीं शहर का संपर्क पथ जिस रास्ते से छर्री व बालू आते हैं, वह सड़क खराब है. आगे श्री अग्रवाल ने कहा कि बढ़ती कीमतों के बीच घटी मांग का नकारात्मक असर विनिर्माण तथा सहायक उद्योगों के एक बड़े क्षेत्र पर दिखता है. बिल्डरों के प्रोजेक्ट में होगी देरी बिल्डर सह निर्माण सामग्री कारोबारी अनिल खेतान ने बताया कि घाट बंदोबस्ती, पर्यावरण संबंधी नियम में सख्ती व ओवरलोडिंग पर अंकुश लगने के बाद बालू व छर्री की कीमत बढ़ गयी है. छड़ तैयार करने के लिए जिन चीजों की जरूरत होती है, सरकार अगर शीघ्र इस मामले में कदम नहीं उठाती है, तो बिल्डर फ्लैट की कीमत बढ़ाने को मजबूर हो जायेंगे. कई बिल्डरों ने निर्माण की गति कम कर दी है, जिससे प्रोजेक्ट में देरी होगी व कानूनी पचड़ा बढ़ेगा. सरकार को स्टील पर इम्पोर्ट ड्यूटी कम कर कीमतों को कम करने का प्रयास करना चाहिए. कीमत स्थिर होने तक स्टील के निर्यात पर प्रतिबंध लगाना होगा. दूसरे रियल इस्टेट कारोबारी नितेश संथालिया ने बताया कि वैश्विक अस्थिरता के कारण अभी दाम घटने के कोई आसार नहीं हैं. भागलपुर में छर्री मुख्य रूप से झारखंड से आता है. एनएच 80 के लंबे समय से खराब रहने के कारण माल वाहक गाड़ियों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है. इसका असर छर्री की कीमतों पर पड़ा है. सरकार द्वारा घाट बंदोबस्ती समय पर नहीं करने और प्रक्रियाओं को जटिल रखने के कारण बालू की कीमतें कम होती नहीं दिखती हैं. कई बार घोषणा की जाती है कि बालू सरकारी डिपो से मिलेगा लेकिन ऐसा हो नहीं पाता है.

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निशिरंजन ठाकुर

लेखक के बारे में

By निशिरंजन ठाकुर

निशिरंजन ठाकुर मुख्यधारा की पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक समय से सक्रिय. साहित्यिक विषयों में भी गहरी रूचि. खबरों में तथ्य के साथ मानवीय संवेदना और भाषा की सादगी को अहम मानते हैं.

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