हाय रे निगम की व्यवस्था: बड़े नालों की सफाई के लिए आई लाखों की मशीन कबाड़ में तब्दील
बंद पड़े डिसेल्टिंग मशीन
Drainage Cleaning Machine: भागलपुर नगर निगम परिसर में लाखों रुपये की लागत से खरीदी गई बड़ी डिसेल्टिंग मशीनें पिछले 5 सालों से जंग खा रही हैं.
मुख्य बातें:
भागलपुर से ललित किशोर मिश्र की रिपोर्ट
Drainage Cleaning Machine: स्मार्ट सिटी भागलपुर को स्वच्छ और सुंदर बनाने की जिम्मेदारी संभालने वाला नगर निगम खुद आधुनिक संसाधनों को कबाड़ में तब्दील करने में जुटा है. एक तरफ जहां निगम प्रशासन ने शहर के विकास और सफाई व्यवस्था के लिए विभाग से ₹3,000 करोड़ के भारी-भरकम फंड की मांग की है, वहीं दूसरी ओर निगम परिसर में ही कड़वा सच देखने को मिल रहा है. शहर के बड़े नालों की गाद निकालने (सफाई करने) के लिए आईं लाखों रुपये की अत्याधुनिक डिसेल्टिंग मशीनें परिसर में लावारिस खड़ी हैं. लंबे समय से इस्तेमाल न होने के कारण इन मशीनों पर जंगल उग आए हैं, टायर पंक्चर हो चुके हैं और इनके कल-पुर्जों में तेजी से जंग लग रहा है.
5 साल से धूल फांक रही हैं 4 मशीनें; हर साल सफाई पर लाखों की बर्बादी

- परिसर में खड़ी गाड़ियां: पिछले 5 वर्षों से नगर निगम परिसर में ऐसी 4 बड़ी मशीनें जस की तस खड़ी हैं. इन मशीनों का उपयोग शहर के मुख्य और बड़े नालों की गहरी सफाई में आसानी से किया जा सकता था.
- लाखों की फिजूलखर्ची: हैरानी की बात यह है कि जब निगम के पास अपनी मशीनें उपलब्ध हैं, तब भी हर साल मानसून के समय शहर के नालों की उड़ाही और सफाई के नाम पर निजी ठेकेदारों के जरिए लाखों रुपये पानी की तरह बहाए जाते हैं. अगर इन मशीनों को सड़क पर उतारा जाता, तो जनता के टैक्स के लाखों रुपये बच सकते थे.
Drainage Cleaning Machine: स्मार्ट सिटी मद से हुई थी खरीद, आधा सामान गायब
मशीनों की खरीद और तकनीकी खामियों को लेकर जो सच सामने आया है, वह नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
जानकारी के अनुसार, करीब 6 साल पहले स्मार्ट सिटी योजना के तहत इन अत्याधुनिक मशीनों की खरीदारी की गई थी. उस वक्त एक मशीन की अनुमानित कीमत लगभग 40 से 50 लाख रुपये आंकी गई थी. लेकिन सबसे बड़ी विसंगति यह रही कि इन मशीनों के कई महत्वपूर्ण और आवश्यक पार्ट्स (आधा सामान) आज तक भागलपुर पहुंचे ही नहीं. तकनीकी पुर्जों के अभाव में ये मशीनें सिर्फ शोपीस बनकर रह गई हैं.
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि निगम प्रशासन थोड़ी भी गंभीरता दिखाता और बचे हुए पार्ट्स की समय पर खरीद कर ली जाती, तो आज शहर के जलजमाव वाले बड़े नालों की समस्या कब की दूर हो चुकी होती. मानसून सिर पर है और शहरवासी एक बार फिर जलजमाव की त्रासदी झेलने को मजबूर हैं, जबकि लाखों का सरकारी संसाधन परिसर में सड़ रहा है.
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लेखक के बारे में
By Divyanshu Prashant
दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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