Bhagalpur news कोचिंग से घर वापस नहीं लौटे, परिजन परेशान

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Bhagalpur news कोचिंग से घर वापस नहीं लौटे, परिजन परेशान

कोचिंग से घर वापस नहीं लौटे बच्चे, परिजन परेशान

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गोपालपुर डिमाहा के राजेश चौधरी के दो नाबालिग पुत्र हर्ष कुमार(12) व मोहित कुमार(10) साइकिल से कोचिंग पढ़ने लत्तीपाकर धरहरा अपने घर से निकले. निर्धारित समय पर वापस घर नहीं लौटने पर परिजनों ने कोचिंग संचालक से संपर्क किया. कोचिंग संचालक ने परिजनों को बताया कि उक्त छात्र कोचिंग पढ़ने नहीं आये हैं. परेशान परिजनों ने तत्काल गोपालपुर थाना पुलिस व मुखिया रीता चौधरी को अपने पुत्रों की गुमशुदगी की सूचना दी. परिजनों की ओर से लगातार खोजबीन की जा रही है, लेकिन अबतक जानकारी नहीं मिलने से परिजन अनहोनी की आशंका से डरे व सहमे हैं. परिजनों के अनुसार शुक्रवार को दोनों भाई साइकिल से कोचिंग जाने के नाम पर घर से निकले. समाचार प्रेषित किये जाने तक वापस नहीं लौटे. परिजन परेशान हो रहे हैं. मुखिया रीता चौधरी ने दोनों बच्चों की सकुशल बरामदगी की गुहार पुलिस से लगायी है. गोपालपुर थाना के अनुसार आवेदन मिलते ही छानबीन शुरु कर दी गयी है.

भक्ति, धर्म व मोक्ष के गूढ़ रहस्यों का भावपूर्ण विवेचन

कहलगांव प्रखंड के नंदलालपुर पंचायत अंतर्गत देवीपुर स्थित शिव मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचिका पूर्ति किशोरी ने श्रद्धालुओं को भक्ति, धर्म और मोक्ष के गूढ़ तत्वों का भावपूर्ण व विस्तृत विवेचन सुनाया. मंगलाचरण के साथ प्रारंभ हुई कथा में उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सत्य मार्ग पर ले जाने वाला दिव्य प्रकाश स्तंभ है. उन्होंने महर्षि व्यास के जीवन प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि वेदों के विभाजन, 17 पुराणों एवं महाभारत की रचना के बावजूद उनके मन में अशांति थी, जिसे देवर्षि नारद के मार्गदर्शन से भागवत की रचना कर शांति मिली. सूत जी और शौनकादि ऋषियों के संवाद को भागवत कथा का मूल आधार बताते हुए उन्होंने शुकदेव जी को प्राप्त दिव्य ज्ञान का वर्णन किया.

कथा में निष्काम भक्ति के महत्व पर जोर देते हुए कहा गया कि सच्ची भक्ति वही है जिसमें कोई स्वार्थ न हो. यही भक्ति मनुष्य को परमात्मा से जोड़ कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है. महाभारत प्रसंगों में अश्वत्थामा द्वारा द्रौपदी पुत्रों के वध, अर्जुन द्वारा उसके दमन तथा भगवान श्रीकृष्ण द्वारा उत्तरा के गर्भ में परीक्षित की रक्षा जैसे प्रसंगों को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया. माता कुंती की स्तुति और भीष्म पितामह के उपदेशों से धर्म और कर्तव्य की महत्ता समझायी. अंत में राजा परीक्षित को प्राप्त श्राप और भागवत श्रवण से उनकी मुक्ति का वर्णन करते हुए कहा कि श्रद्धा से कथा सुनना ही जीवन का कल्याणकारी मार्ग है. कथा में काफी संख्या में श्रद्धालु भावविभोर होकर सहभागी बने.

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Jitendra Tomar

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