भागलपुर में बर्खास्तगी के खिलाफ परिवार संग धरने पर बैठे अतिथि शिक्षक, दयनीय हालत से परेशान मांगी इच्छा मृत्यु
अनिश्चितकालीन धरना पर बैठे अतिथि शिक्षक.
Bhagalpur Guest Teacher Protest: नौकरी जाने के बाद आर्थिक संकट से जूझ रहे अतिथि शिक्षक अब परिवार और बच्चों के साथ धरने पर बैठ गए हैं. एक शिक्षक ने तो हालात से परेशान होकर इच्छा मृत्यु की मांग तक कर डाली.
भागलपुर से दीपक राव की रिपोर्ट
Bhagalpur Guest Teacher Protest: भागलपुर में बर्खास्तगी के विरोध में अतिथि शिक्षकों ने सोमवार से विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया. धरने पर बैठे शिक्षकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई और कुलपति तथा रजिस्ट्रार के विरोध में नारेबाजी की.
मुख्य बातें
- परिवार और बच्चों के साथ पहुंचे शिक्षक
- इच्छा मृत्यु की मांग ने खींचा ध्यान
- स्कूल फीस और राशन तक का संकट
धरना स्थल पर बढ़ायी गयी सुरक्षा
धरना शुरू होने के बाद विश्वविद्यालय परिसर का माहौल तनावपूर्ण बना रहा. स्थिति को देखते हुए कुलपति आवास के मुख्य द्वार पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है.
परिवार और बच्चों के साथ पहुंचे शिक्षक
धरने में शामिल करीब 70 अतिथि शिक्षकों में से एक शिक्षक सरोज कुमार अपने परिवार और बच्चों के साथ धरना स्थल पर पहुंचे. उन्होंने अपनी आर्थिक परेशानियों का जिक्र करते हुए कहा कि बर्खास्तगी के बाद परिवार का भरण-पोषण करना बेहद कठिन हो गया है.
इच्छा मृत्यु की मांग ने खींचा ध्यान

धरना स्थल पर सरोज कुमार ने भावुक होकर इच्छा मृत्यु की मांग तक कर डाली. उनका कहना था कि रोजगार छिन जाने के बाद जीवन यापन की स्थिति लगातार कठिन होती जा रही है. उन्होंने कहा कि जब परिवार की बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं तो भविष्य को लेकर चिंता स्वाभाविक है.
स्कूल फीस और राशन तक का संकट
सरोज कुमार ने बताया कि उनके बच्चों की स्कूल फीस जमा नहीं हो पा रही है. घर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई है कि राशन की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी परिस्थितियों में परिवार के साथ सम्मानजनक जीवन कैसे जिया जा सकता है.
मांगों पर निर्णय तक जारी रहेगा आंदोलन
धरने पर बैठे अतिथि शिक्षकों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. शिक्षकों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है.
प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप की अपील
अतिथि शिक्षकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने और शीघ्र समाधान निकालने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है.
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