125 करोड़ की परियोजना पर सुस्त रफ्तार, एक साल बाद भी फाउंडेशन कार्य अधूरा
भागलपुर-गोराडीह मार्ग पर निर्माणाधीन आरओबी कार्य.
Bhagalpur ROB Project: ढाई साल में पूरा होने वाला रेलवे ओवर ब्रिज एक साल बाद भी शुरुआती चरण में अटका है. फाउंडेशन कार्य पूरा नहीं होने से लोगों के बीच परियोजना की समयसीमा को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
भागलपुर से ब्रजेश माधुर्य की रिपोर्ट
Bhagalpur ROB Project: भागलपुर-गोराडीह मार्ग पर शीतला स्थान चौक के समीप बौंसी रेल पुल संख्या-2 पर बन रहे रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) के निर्माण कार्य की रफ्तार अपेक्षा के अनुरूप नहीं दिख रही है. परियोजना की शुरुआत को एक वर्ष पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक फाउंडेशन का कार्य भी पूरी तरह समाप्त नहीं हो सका है. ऐसे में निर्धारित समय सीमा के भीतर परियोजना पूरी होने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.
ढाई वर्ष में पूरा करना है प्रोजेक्ट
आरओबी निर्माण कार्य की शुरुआत 17 जून 2025 को की गई थी. परियोजना को 16 दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित है. यानी कुल ढाई वर्षों के भीतर पुल का निर्माण पूरा होना है. हालांकि एक वर्ष बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य अभी प्रारंभिक चरण में ही दिखाई दे रहा है.
फाउंडेशन अधूरा, आगे का काम बाकी
निर्माण एजेंसी को अभी फाउंडेशन कार्य पूरा करना है. इसके बाद सब-स्ट्रक्चर और सुपर-स्ट्रक्चर का निर्माण किया जाएगा. परियोजना के प्रमुख हिस्सों पर अभी व्यापक कार्य शेष है. यही कारण है कि निर्माण की धीमी गति को लेकर लोगों में चिंता बढ़ रही है.
अप्रोच रोड का काम भी प्रभावित होने की आशंका
रेलवे ओवर ब्रिज के तैयार होने के बाद ही अप्रोच रोड का निर्माण शुरू हो सकेगा. ऐसे में मुख्य ढांचे के निर्माण में हो रही देरी का सीधा असर परियोजना के अगले चरणों पर पड़ सकता है. यदि वर्तमान गति बनी रही तो पूरी परियोजना की समयसीमा प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.
स्थानीय लोगों की नजर परियोजना पर
यह ओवर ब्रिज क्षेत्र की महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल है. स्थानीय लोग लगातार निर्माण कार्य की प्रगति पर नजर बनाए हुए हैं. लोगों का कहना है कि परियोजना की निगरानी अपेक्षित स्तर पर नहीं होने के कारण निर्माण कार्य की रफ्तार प्रभावित हो रही है.
125.86 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा आरओबी
बौंसी रेल पुल संख्या-2 पर बनने वाले इस रेलवे ओवर ब्रिज का निर्माण 125.86 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है. परियोजना पूरी होने के बाद भागलपुर-गोराडीह मार्ग पर यातायात व्यवस्था को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है.
तकनीकी मंजूरियां मिल चुकीं, फिर भी नहीं बढ़ी गति
परियोजना से जुड़े कई तकनीकी और प्रशासनिक कार्यों को मंजूरी मिल चुकी है. बियरिंग फोर्स कैलकुलेशन को इस्टर्न रेलवे, कोलकाता से स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है. इसके अलावा जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग (GAD) को भी रेलवे की मंजूरी मिल गई है. इलेक्ट्रिसिटी यूटिलिटी से संबंधित कार्य भी प्रगति पर है, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई दे रही है.
समय पर पूरा होगा या नहीं, बना बड़ा सवाल
परियोजना की निर्धारित समयसीमा में अब करीब डेढ़ वर्ष का समय शेष है. लेकिन जिस गति से कार्य चल रहा है, उसे देखते हुए लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या रेलवे ओवर ब्रिज का निर्माण तय समय पर पूरा हो पाएगा. आने वाले महीनों में निर्माण कार्य की रफ्तार ही इस सवाल का जवाब तय करेगी.
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