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कला और साहित्य ने आजादी के आंदोलन का मार्ग प्रशस्त किया, रंग महोत्सव कला और साहित्य कोे बढ़ाने का कर रहा है काम

Updated at : 22 Dec 2024 9:58 PM (IST)
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कला और साहित्य ने आजादी के आंदोलन का मार्ग प्रशस्त किया, रंग महोत्सव कला और साहित्य कोे बढ़ाने का कर रहा है काम

कला और साहित्य ने आजादी के आंदोलन का मार्ग प्रशस्त किया. आज हमलोग आजाद भारत में चैन की सांस ले रहे हैं. रंग महोत्सव कला और साहित्य कोे बढ़ाने का काम कर रहा है.

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कला और साहित्य ने आजादी के आंदोलन का मार्ग प्रशस्त किया. आज हमलोग आजाद भारत में चैन की सांस ले रहे हैं. रंग महोत्सव कला और साहित्य कोे बढ़ाने का काम कर रहा है. भागलपुर में कला और साहित्य का संगम है. अप संस्कृति के खिलाफ अनोखा आयोजन हो रहा है. उक्त बातें बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव ने रविवार को भागलपुर रंग महोत्सव के दूसरे दिन कला केंद्र में कही.

रंग महोत्सव में बिहार राज्य अतिपिछड़ा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ रतन मंडल, खानकाह ए पीर दमड़िया के सज्जादानशीं सैयद हसन, पूर्व मेयर डॉ वीणा यादव, डॉ अशोक यादव, महबूब आलम, देवाशीष बनर्जी आदि ने शिरकत किया. अतिथियों का स्वागत निदेशक कपिलदेव रंग ने किया. पंछी नाटक में कर्ज लेकर घी नहीं पीने का दिया संदेश

रंग महोत्सव के दूसरे दिन जमशेदपुर की संस्था पथ की ओर से मनोज मित्रा की स्मृति में नाटक पंछी का मंचन किया गया. मोहम्मद निजाम के निर्देशित नाटक पंछी में दिखाया गया कि आज ऐशोआराम के लिए लोग अधिक से अधिक कर्ज ले रहे हैं और घर परिवार को खो रहे हैं. समाज से कटते जा रहे हैं. आखिरी परिणति आत्महत्या तक पहुंच जाती है. ऐसे में जितना सामर्थ्य हो, उतना ही खर्च करना चाहिए. कर्ज लेकर घी नहीं पीना चाहिए. शादी की सालगिरह नहीं मनाना चाहिए. कर्ज लेकर परिवार को पर्यटन नहीं कराना चाहिए आदि संदेश दर्शकों को दिया.

इस नाटक में मुख्य किरदार में छवि दास ने किया.

धर्म युद्ध ने महाजनी प्रथा पर किया चोट

कोलकाता की संस्था रवींद्र नगर नाट्य युद्ध की ओर से बांग्ला नाटक धर्म युद्ध का मंचन दानी कर्मकार के निर्देशन में किया गया. नाटक में नाटककार सुविनय दास ने आधुनिक युग में महाजनी प्रथा से आमलोगों की परेशानी को प्रदर्शित किया गया. खासकर गांव-गांव में फैले महाजनों के नेटवर्क से बचने और गांव के बेरोजगार युवकों को बहला कर शहर में नौकरी दिलाने के नाम पर लुटने की घटना को जीवंत कर दिया. नाटक के जरिये महाजनों और ठगों पर शिकंजा कसने की सीख दी गयी. महाजनी प्रथा पर चोट किया गया. महाजनों व ठगों से युवाओं को अधिकार के लिए लड़ने को प्रेरित किया गया. वहीं इंडीजेनस पिपुल्स आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी की ओर से संथाली नाटक बासता गुरु जितराई हांसदा के निर्देशन में हुआ.

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मणिपुर के जातीय उन्माद में फिर फंसी टीम, लाखों का हवाई किराया हुआ बर्बाद

निदेशक कपिलदेव रंग ने बताया कि मणिपुर की टीम जब भागलपुर रंग महोत्सव के लिए मणिपुर से रवाना हुई, तो रास्ते में फिर जातीय उन्माद शुरू हो गया. इस कारण टीम हवाई अड्डे तक समय पर नहीं पहुंच पायी. ऐसे में उनका हवाई टिकट का लाखों का किराया भी बर्बाद हो गया. इधर भागलपुर के जनता मणिपुरी लोक नृत्य, नाटक व अन्य संस्कृति नहीं देख पायी. कपिलदेव रंग ने बताया कि चार साल पहले तक कलाकारों को ट्रेन व अन्य सरकारी वाहनों में रियायत मिलता था, लेकिन अब नहीं मिल पा रहा है. ऐस में कलाकारों को इसका भी दंश झेलना पड़ रहा है. इस मौके पर देवाशीष बनर्जी, डॉ अशोक कुमार यादव, सुनील रंग, जगतराम साह कर्णपुरी, महबूब आलम, एनूल होदा, तापस घोष, प्रणव कुमार, दीपक पाठक, तरुण घोष, तकी जावेद आदि उपस्थित थे.

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