पपीता की खेती के लिए उपयुक्त है भागलपुर, उद्यान विभाग दे रहा बढ़ावा

Updated at : 28 Dec 2019 7:22 AM (IST)
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पपीता की खेती के लिए उपयुक्त है भागलपुर, उद्यान विभाग दे रहा बढ़ावा

दीपक राव, भागलपुर : उद्यान विभाग ने पपीते की खेती के लिए भागलपुर को उपयुक्त माना है. पपीता की खेती के लिए किसानों को बढ़ावा दिया जा रहा है. इतना ही नहीं एक हेक्टेयर भूमि में पपीता की खेती के लिए सरकार की ओर से 45000 रुपये दो वर्ष में दिये जायेंगे. उद्यान विभाग के […]

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दीपक राव, भागलपुर : उद्यान विभाग ने पपीते की खेती के लिए भागलपुर को उपयुक्त माना है. पपीता की खेती के लिए किसानों को बढ़ावा दिया जा रहा है. इतना ही नहीं एक हेक्टेयर भूमि में पपीता की खेती के लिए सरकार की ओर से 45000 रुपये दो वर्ष में दिये जायेंगे. उद्यान विभाग के सहायक निदेशक अजय कुमार सिंह ने बताया कि भागलपुर जिले के किसानों को 10 हेक्टेयर भूमि में पपीते की खेती के लिए अनुदान देने का लक्ष्य रखा है. इसमें जागरूक किसान को अधिकतम एक हेक्टेयर पर अनुदान दिया जा सकता है.

हालांकि कम लक्ष्य होने पर अधिक किसानों को इस योजना से जोड़ने के लिए एक-एक एकड़ तक की खेती पर ही अनुदान दिया जा रहा है. उन्होंने बताया एक हेक्टेयर भूमि में पपीते की खेती के लिए 45 हजार रुपये दो स्टॉल में दिये जायेंगे. पहले वर्ष 75 प्रतिशत अनुदान और दूसरे वर्ष 25 प्रतिशत अनुदान दिया जायेगा.
ऐसे कर सकते हैं खेती, खेती का यह गणित
पपीता के उत्कृष्ट किसान गणेश गुंजन ने बताया कि एक एकड़ में 1000 पाौधे लगा सकते हैं. एक पौधे पर औसत खर्च 120 रुपये आता है. एक एकड़ में 1.20 लाख रुपये खर्च आता है. औसत एक पौधा में 50 किलो फल लगते हैं. 50 हजार किलो एक एकड़ में फल लगेंगे और बाजार में न्यूनतम कीमत एक किलो पपीता पर 30 रुपये मिल जाते हैं. एक एकड़ में 15 लाख रुपये तक खर्च के साथ कमा सकते हैं.
एक हेक्टेयर में 2500 पौधे
एक हेक्टेयर भूमि में किसान 2500 पपीता के पौधे लगा सकते हैं. पपीता की खेती में 60000 रुपये खर्च आता है, जिसमें 50 हजार रुपये पौधा की खरीद पर लगता है. एक पौधा का लागत 20 रुपये आता है.
फरवरी में होगा पौधा उपलब्ध
किसानों को हाजीपुर स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से पौधा खरीद करनी होगी. यह पौधा रेड लेडी पपीता है, जिसे सरकार की ओर बेहतर पपीता माना गया है. पपीता की खेती के लिए आवेदन लेना शुरू हो गया है. कुछ किसानों ने आवेदन दिया भी है.
पपीता खेती की चुनौती
पपीता में वायरल डिजिज लिफ कर्ल फैलता है. इसमें पत्ती सिकुड़ जाती है और फल खराब हो जाते हैं. इसके लिए विशेषज्ञों से सलाह लेते रहें. जमीन को ऊंचा रखना चाहिए, ताकि पपीते की जड़ में पानी नहीं फंसे.
युवा किसान पपीता खेती को दे रहे बढ़ावा
नाथनगर के युवा किसान गणेश गुंजन पपीता की खेती को बढ़ावा दे रहे हैं. गणेश गुंजन लगातार कई वर्षों से कृषि विभाग की ओर से पपीता की खेती में प्रथम पुरस्कार जीत रहे हैं. यहां तक खुद कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने भी अपने हाथों पुरस्कृत किया है. वे अपने खेतों में इंडोनेशिया, ताइवान, थाइलैंड व आस्ट्रेलिया के पपीता को लगा चुके हैं. इन देशों से बीज आता है. इससे पैदावार अधिक होती है.
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