सूर्योपासना की स्थली रहा है अंग क्षेत्र
Updated at : 01 Nov 2019 6:06 AM (IST)
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डॉ रविशंकर चौधरी लेखक भागलपुर में रहते हैं और युवा इतिहासकार हैं. भागलपुर शहर में पुरातन सूर्य मंदिर स्थित है, जहां सफेद संगमरमर की मूर्ति स्थापित है. प्राचीन समय से यहां सूर्य पूजा होती आ रही है. सुल्तानगंज का अजगैवी नाथ मंदिर एक पौराणिक स्थल है, जो चट्टानों पर दृढ़ता पूर्वक निर्मित है तथा इसमें […]
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डॉ रविशंकर चौधरी
लेखक भागलपुर में रहते हैं और युवा इतिहासकार हैं.
भागलपुर शहर में पुरातन सूर्य मंदिर स्थित है, जहां सफेद संगमरमर की मूर्ति स्थापित है. प्राचीन समय से यहां सूर्य पूजा होती आ रही है. सुल्तानगंज का अजगैवी नाथ मंदिर एक पौराणिक स्थल है, जो चट्टानों पर दृढ़ता पूर्वक निर्मित है तथा इसमें उत्कृष्ट मूर्तियों एवं शिलालेखों की श्रृंखला है, जिन्हें गुप्त काल में तथा पाल काल के बाद की अवधि में उत्कीर्ण किया गया है. गंगा नदी जो अंग जनपद होकर बहती है.
यह भारतीय संस्कृति की जननी है. उत्तर भारत का प्रसिद्ध छठ पर्व को अंग क्षेत्र में बहुलता से मनाया जाता है, जिसमें श्रद्धालु गंगा नदी में स्नान कर उगते और डूबते भास्कर को जल एवं दूध से अर्घ्य देते हैं और सूरज की उपासना करते हैं. पाटलिपुत्र पटना के बाद छठ पर्व अंग क्षेत्र में ही बड़े पैमाने पर मनाया जाता है. सूर्य आदि देव हैं. सभी जगहों पर इनकी पूजा होती है. अंग क्षेत्र में भी सूर्योपासना की प्रथा अति प्राचीन है.
अंग प्रदेश की प्रथम चर्चा अथर्ववेद में मिलती है. महाभारत कालीन अंग क्षेत्र का महत्व दानवीर राजा कर्ण से जुड़ा हुआ है. कर्ण भगवान भास्कर अर्थात सूर्य के मानस पुत्र थे. कर्ण प्रतिदिन अपने पिता सूर्य की उपासना कर उन्हें जल अर्पण करते थे. तत्पश्चात दान पुण्य किया करते थे.
राजा कर्ण की वीरता व दानशीलता सूर्योपासना और दृढ़ प्रतिज्ञा की बहुत सारी कहानियां महाभारत में अंकित हैं. प्राचीन धर्म ग्रंथों के अनुसार अंग जनपदीय क्षेत्र प्राचीन काल से ही सूर्योपासना की स्थली रही है. भागलपुर शहर स्थित बूढ़ानाथ मंदिर के सामने स्थित मान मंदिर के सामने के रास्ते पर पुरातन सूर्य मंदिर स्थित है, जहां सफेद संगमरमर की मूर्ति स्थापित है. प्राचीन समय से यहां सूर्य पूजा होती आ रही है.
सुल्तानगंज के अजगैवी नाथ मंदिर एक पौराणिक स्थल है, जो चट्टानों पर दृढ़ता पूर्वक निर्मित है तथा इसमें उत्कृष्ट मूर्तियों एवं शिलालेखों की श्रृंखला है, जिन्हें गुप्त काल में तथा पाल काल के बाद की अवधि में उत्कीर्ण किया गया है. इसमें शेषनागशायी विष्णु, चतुर्भुज विष्णु, उमा महेश्वर, अर्धनारीश्वर, हरिहर, सूर्य देवता, गणेश-पार्वती व बुद्ध की नक्काशियां प्रमुख हैं. पत्थरधट्टा कहलगांव की खुदाई में सूर्य प्रतिमा मिली है. मंदार क्षेत्र से भी सूर्य मूर्ति प्राप्त हुई है. विक्रमशिला महाविहार की खुदाई में भी सूय की मूर्ति प्राप्त हुई है.
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