भागलपुर : समानांतर पुल बढ़ा देगा उत्तर व दक्षिणी बिहार की कनेक्टिविटी
Updated at : 01 Jan 2019 10:00 AM (IST)
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भागलपुर : विक्रमशिला सेतु के समानांतर पुल बनाने से उत्तर और दक्षिणी बिहार के जिलों में आवागमन असान होगा. अभी विक्रमशिला सेतु से खगड़िया, सहरसा, पूर्णिया किशनगंज, अररिया कटिहार भागलपुर, बांका सहित झारखंड के कई जिले के लोगों को सेवा मिल रही है और कम समय में आना-जाना आसान हो रहा. पुल कई लोगों की […]
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भागलपुर : विक्रमशिला सेतु के समानांतर पुल बनाने से उत्तर और दक्षिणी बिहार के जिलों में आवागमन असान होगा. अभी विक्रमशिला सेतु से खगड़िया, सहरसा, पूर्णिया किशनगंज, अररिया कटिहार भागलपुर, बांका सहित झारखंड के कई जिले के लोगों को सेवा मिल रही है और कम समय में आना-जाना आसान हो रहा. पुल कई लोगों की मौत का गवाह बनी चुकी है.
इस सेतु पर रोजाना जाम लगा रहता है और इसे पार चुनौतीपूर्ण बन गया है. 4.7 किमी लंबे इस सेतु को पार करने में पूरा दिन बीत जाता है. फोरलेन समानांतर सेतु के बन जाने से इस तरह की समस्या से छुटकारा मिलेगा. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चार मार्च 2016 को भागलपुर आये थे, तभी उन्होंने विक्रमशिला सेतु से लोगों को मिल रहे दर्द को जाना था और समानांतर पुल बनाने की घोषणा की थी. इसके बाद से ही पुल निर्माण की दिशा में प्रक्रिया अपनायी जा रही है. पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव ने भी सितंबर में केंद्र सरकार के हवाले से समानांतर फोर लेन पुल के निर्माण पर अपनी सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर दी थी.
जाम से मुक्त होगा शहर: समानांतर पुल के निर्माण से शहर जाम मुक्त होगा. दरअसल, प्रस्तावित इस फोरलेन पुल का अप्रोच रोड की कनेक्टिविटी निर्माणाधीन बाइपास से होगी. वहीं विक्रमशिला सेतु के वाहन भी शहर से दूर बाइपास के रास्ते निकल गुजरा करेगी. इस तरह से शहर की सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव नहीं रहेगा.
विक्रमशिला सेतु के पूरब में बनेगा समानांतर पुल
समानांतर पुल के घोषणा के ढाई साल में न केवल डीपीआर कंसल्टेंट एजेंसी बहाल की गयी, बल्कि इस एजेंसी से मिट्टी जांच तक करायी. पुल का डीपीआर भी बना. साथ ही यह भी तय कर लिया गया है कि विक्रमशिला सेतु के पूरब में फोरलेन समानांतर पुल का निर्माण होगा.
विक्रमशिला सेतु की और बढ़ जायेगी उम्र
समानांतर पुल के बनने से विक्रमशिला सेतु पर वाहनों का दवाब भी कम हो जायेगा. इससे सेतु की आयु बढ़ जायेगी. दरअसल, इससे आवागमन में जितनी सहूलियत मिली, उससे कहीं ज्यादा दर्द दिया है. वाहनों के दबाव से सेतु भी जर्जर हो गया था. लगातार दो साल तक मरम्मत का काम चला है, तभी यह अब वाहनों का लोड लेने लायक हुआ है.
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