हृदयरोगी बच्चों का मुफ्त इलाज

Updated at : 14 Jun 2014 12:57 PM (IST)
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हृदयरोगी बच्चों का मुफ्त इलाज

भागलपुर: बिहार के 200 हृदय रोग से ग्रसित बच्चों का मुंबई के फोर्टिस अस्पताल में मुफ्त इलाज होगा. 30 जून तक ऐसे मरीजों का रजिस्ट्रेशन कराया जायेगा. छह जुलाई को तिलकामांझी जेल रोड स्थित अर्क हॉस्पिटल में फोर्टिस अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ इन बच्चों की जांच करेंगे और ऑपरेशन के लिए मरीजों का चयन […]

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भागलपुर: बिहार के 200 हृदय रोग से ग्रसित बच्चों का मुंबई के फोर्टिस अस्पताल में मुफ्त इलाज होगा. 30 जून तक ऐसे मरीजों का रजिस्ट्रेशन कराया जायेगा. छह जुलाई को तिलकामांझी जेल रोड स्थित अर्क हॉस्पिटल में फोर्टिस अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ इन बच्चों की जांच करेंगे और ऑपरेशन के लिए मरीजों का चयन किया जायेगा.

यह जानकारी आइएमए अध्यक्ष डॉ डीपी सिंह ने आइएमए हॉल में शुक्रवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दी. उन्होंने बताया कि बिहार के सभी जिलों के बच्चों की जांच भागलपुर में होगी. अगर किसी कारणवश छह जुलाई को बच्चों को जांच नहीं हो पायी तो एक दिन और कैंप लगाया जायेगा. इस दौरान चयनित बच्चों को मुंबई ले जाने और वहां से लाने तक पूरा खर्च संस्थान ही उठायेगी. जो आर्थिक संपन्न हैं वे अपने खर्च पर मुंबई जायेंगे पर उनका इलाज मुफ्त में ही होगा. वहां एक सप्ताह तक रहने-खाने की सुविधा भी संस्था मुहैया करायी जायेगी. बिहार में यह सुविधा सुमेरा संस्था के राजीव विष्णोई के प्रयास से हुआ है. इसके लिए सभी जिले के आइएमए सदस्यों व शिशु रोग विशेषज्ञों के संगठन से भी संपर्क कर बच्चों का चयन करने का अनुरोध किया जायेगा. शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अजय सिंह ने बताया कि

पूर्णिया, बेगूसराय व अन्य जिलों के शिशु रोग विशेषज्ञों को सूचना दी गयी है. सभी बच्चों की इको जांच के बाद तय किया जायेगा कि किन बच्चों को इलाज की अधिक आवश्यकता है. इसके अलावा सभी शिशु रोग विशेषज्ञों के यहां मरीजों का पंजीयन किया जायेगा.

डॉ शंभु शंकर सिंह ने बताया कि 90 प्रतिशत बच्चे बिहार में इस बीमारी का इलाज नहीं करा सकते हैं. बच्चों की सजर्री की सुविधा भी बिहार के सरकारी अस्पतालों में नहीं है. डॉ मनीष ने बताया कि देश भर में दो लाख बच्चे हृदय रोग से पीड़ित हैं. एक वर्ष के अंदर अगर बच्चे की जांच के बाद इलाज (सजर्री) हो जाये तो बीमारी ठीक हो जाती है. अवेयरनेस कमेटी के चेयरमैन डॉ एसपी सिंह ने बताया कि शिशु रोग विशेषज्ञों के एसोसिएशन से संपर्क कर हर जिले में बच्चों की जांच के लिए कैंप आयोजित करने का अनुरोध किया जायेगा. आइएमए सचिव डॉ जेपी सिन्हा ने कहा कि इस जांच के लिए आने वाले बच्चों के परिजनों से फीस नहीं लेने का चिकित्सकों से अनुरोध किया जायेगा.

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