हाल-ए-भागलपुर गोशाला : गोशाला विकास पदाधिकारी ने दी थी जमीन की रिपोर्ट

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 25 Oct 2018 5:45 AM

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भागलपुर : जिले में आजादी व उसके बाद निबंधित छह अलग-अलग गोशाला की बेशकीमती जमीन की जांच ठंडे बस्ते में है. प्रशासन से एक साल पहले जमीन की जांच की कार्रवाई को लेकर पत्र दिया गया था. इस मामले में सभी अनुमंडल पदाधिकारी से रिपोर्ट मांगी गयी थी. मगर उक्त मामले में कोई रिपोर्ट नहीं […]

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भागलपुर : जिले में आजादी व उसके बाद निबंधित छह अलग-अलग गोशाला की बेशकीमती जमीन की जांच ठंडे बस्ते में है. प्रशासन से एक साल पहले जमीन की जांच की कार्रवाई को लेकर पत्र दिया गया था. इस मामले में सभी अनुमंडल पदाधिकारी से रिपोर्ट मांगी गयी थी. मगर उक्त मामले में कोई रिपोर्ट नहीं आयी. जांच की कार्रवाई को लेकर आरटीआइ कार्यकर्ता अजीत कुमार सिंह ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी भी मांगी. इसमें प्रथम अपीलीय प्राधिकार सह एडीएम (राजस्व) के निर्देश का भी पालन नहीं हुआ. अब मामला राज्य सूचना आयोग में लंबित है. आरटीआइ में गोशाला की जमीन पर अतिक्रमण आदि के मामले में प्रशासनिक कदम उठाये जाने को लेकर जानकारी मांगी गयी थी.
गोशाला में पदस्थापित पशुधन सहायक का लाभ गोशाला प्रबंधन नहीं ले रहे हैं. फिर भी गोशाला में मवेशियों के खराब स्वास्थ्य को देखते हुए पशुपालन विभाग अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहा है. यह कहना है जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ राजेंद्र कुमार का. श्री कुमार प्रबंधन की कार्यशैली से नाराज है. उन्होंने कहा कि गोशाला प्रबंधन पशुधन सहायक की बात को नजरअंदाज करते हैं.
इस बार-बार की उपेक्षा के कारण ही वे भी कटते चले गये. कभी-कभी ही गोशाला में ड्यूटी देने पहुंचते हैं. इससे गोशाला की स्थिति और खराब हुई है. उन्होंने सवाल किया कि अगर प्रबंधन ऐसे करेगा तो कैसे सुधरेगी.आगे कहा कि वह गोशाला में पदेन सदस्य हैं, लेकिन अब तक गोशाला प्रबंधन कमेटी से कोई बुलावा नहीं आया और न ही कोई सूचना दी गयी.
बता दें कि पशुपालन विभाग की ओर से दूसरे दिन बुधवार को भी पशु स्वास्थ्यकर्मी दीपक कुमार को गोशाला में मवेशियों के इलाज के लिए भेजा गया. इस दौरान उन्होंने गंभीर रूप से बीमार मवेशियों का इलाज किया.
जब पशुधन सहायक तैनात है तो निजी चिकित्सक क्यों बुलाते हैं
जिला पशुपालन पदाधिकारी ने कहा कि गोशाला में कुछ तो गड़बड़झाला है. जब यहां से पशुधन सहायक की ड्यूटी लगायी गयी है, तब निजी पशु चिकित्सक को क्यों बुलाया जाता है. कभी पशुपालन विभाग को मवेशी के तबीयत खराब होने की सूचना नहीं दी गयी. जबकि गोशाला में रखरखाव से लेकर मवेशियों की चिकित्सा व्यवस्था बदतर है.
15 गाय हैं बीमार, तीन गंभीर
पशु स्वास्थ्यकर्मी दीपक कुमार ने बुधवार को बीमार गायों का रूटीन चेकअप किया. इस दौरान गंभीर रूप से घायल व बीमार गायों को दवा दी गयी. जख्म पर स्प्रे किया गया. यहां 15 गाय सामान्य, जबकि तीन गाय गंभीर रूप से बीमार है. गायों के खाने के संबंध में उन्होंने बताया कि गाय को दिया जाने वाला घट्टा असुरक्षित है. इसमें पेड़ से पक्षियों का बिट गिरता है, जो हानीकारक है.
समय पर होता इलाज तो नहीं मरती
स्वास्थ्यकर्मी ने बताया कि मंगलवार को जिस गाय की मौत हुई अगर उसका भी समय पर इलाज कराया जाता तो उसकी जान नहीं जाती. आठ दिन से अधिक से उसके घाव से खून रिस रहा था. उन्होंने कहा कि बीमार गायों के लिए अलग खटाल होना चाहिए.
गोशालाकर्मी को लगायी फटकार
स्वास्थ्यकर्मी ने गोशालाकर्मी को फटकार लगाते हुए कहा कि जब पशुपालन विभाग की ओर से कर्मचारी से लेकर दवा की सुविधा दी गयी है, तो समय पर इलाज क्यों नहीं कराते. पशुपालन विभाग आकर जरूरत की दवा मंगा लेने को भी कहा.
अब बीमार गायों के लिए बनेगा अलग शेड : गोशालाकर्मी ने बताया कि शीघ्र ही गोशाला में बीमार गायों को अलग रखने के लिए शेड बनेगा.
गाय मरती है, तो गंगा में फेंक देते हैं
हाल के दिनों में गोशाला में चार गाय व दो बाछा मरे. मंगलवार को भी एक गाय देर शाम मर गयी. सभी मवेशियों को बूढ़ानाथ गंगा तट के समीप फेंक दिया गया. एक गाय गंगा में प्रवाहित हो गयी, जबकि अधिकतर घाट पर ही रह गयीं. लोगों का कहना है कि नमामि गंगे योजना व स्वच्छ भारत मिशन का खुल कर माखौल उड़ रहा है.
कमिश्नर सख्त, कहा मांगी जायेगी रिपोर्ट
भागलपुर. प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार ने गोशाला की हालत व जमीन के अतिक्रमण मामले पर कड़ा रुख अपनाया है. कहा, गोशाला की जमीन सरकारी जमीन की श्रेणी में आता है. इस जमीन पर किसी के द्वारा कब्जा करना अतिक्रमण की श्रेणी में आयेगा. एसडीओ व सीओ की जिम्मेदारी है कि वह संबंधित अतिक्रमण को मुक्त कराये.
उन्होंने बताया कि एसडीओ ही गोशाला कमेटी के पदेन अध्यक्ष होते हैं तथा कैश बुक आदि की मॉनीटरिंग भी उन्हीं के जिम्मे होता है. उन्होंने निर्देश दिया कि गोशाला की जमीन किन-किन एसडीओ के समय अतिक्रमण हुआ, इसकी रिपोर्ट ली जायेगी. यह एक गंभीर मामला है कि अब तक गोशाला की अतिक्रमित जमीन पर संज्ञान क्यों नहीं लिया गया. पूरे मामले पर प्रशासन से रिपोर्ट मांगी जायेगी.
मेडिकल कॉलेज की जमीन की तरह है गोशाला का हाल
राज्य के अलग-अलग जगहों पर मेडिकल कॉलेज की जमीन पर अतिक्रमण को लेकर हाइकोर्ट के कड़े रुख के बाद प्रशासन ने वहां की जमीन से अतिक्रमण हटाये जाने की कार्रवाई की थी. कुछ ऐसी ही स्थिति गोशाला की जमीन की भी है. इस पर कार्रवाई की जरूरत है.
हर साल होनी चाहिए ऑडिट, एसडीओ की मॉनीटरिंग
विधि परामर्शी राजेश कुमार तिवारी के अनुसार बिहार गोशाला एक्ट के सेक्शन 7, 9 व 12 के तहत रजिस्ट्रार द्वारा हर साल गोशाला की ऑडिट होनी चाहिए. मौके पर निरीक्षण करके उनके हिसाब-किताब की जानकारी लेनी चाहिए. इस तरह वहां के वित्तीय अनियमितता पर नजर रखी जा सकेगी. गोशाला कमेटी के पदेन अध्यक्ष होने के नाते अनुमंडल पदाधिकारी को वहां की मॉनीटरिंग करनी चाहिए. इसमें पशुओं को चारा से लेकर पशु चिकित्सक के इलाज आदि को देखना है.
पशुपालन विभाग के क्षेत्रीय निदेशक को सौंपा ज्ञापन
गोशाला बचाओ संघर्ष समिति की ओर से बुधवार को पशुपालन विभाग के क्षेत्रीय निदेशक के नाम का ज्ञापन जिला पशुपालन विभाग में सौंपा गया. ज्ञापन में गोशाला में अव्यवस्था से लेकर गायों के लगातार मरने की जानकारी दी गयी. गोशाला प्रबंधन पर उचित कार्रवाई की मांग की गयी. ज्ञापन सौंपने वालों में अभिजीत गुप्ता, अजय कानोडिया, अंजनी शर्मा, बालकृष्ण मोयल, सूरज शर्मा, मनीष मिश्रा आदि शामिल हैं.
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