तय समय से एक दिन पहले दिल्ली से टीम पहुंची मायागंज

Updated at : 22 Aug 2018 8:24 AM (IST)
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तय समय से एक दिन पहले दिल्ली से टीम पहुंची मायागंज

भागलपुर : जिले में टीबी रोगी का किस तरीके से इलाज हो रहा है, इसकी जांच करने तय समय से एक दिन पहले ही दिल्ली से टीम मंगलवार को मायागंज अस्पताल पहुंची गयी. टीम में डॉ प्रह्लाद कुमार, डॉ यशवंत पटेल, डॉ सुखवंत सिंह शामिल थे. टीम ने एमडीआर वार्ड, लेबोरेटरी कल्चर कर गहन जांच […]

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भागलपुर : जिले में टीबी रोगी का किस तरीके से इलाज हो रहा है, इसकी जांच करने तय समय से एक दिन पहले ही दिल्ली से टीम मंगलवार को मायागंज अस्पताल पहुंची गयी. टीम में डॉ प्रह्लाद कुमार, डॉ यशवंत पटेल, डॉ सुखवंत सिंह शामिल थे. टीम ने एमडीआर वार्ड, लेबोरेटरी कल्चर कर गहन जांच की. यहां की व्यवस्था से टीम के सदस्य पूरी तरह असंतुष्ट दिखे.
उन्होंने व्यवस्था में और सुधार करने का निर्देश दिया. टीम ने दवा उपलब्धता को भी देखा. टीबी वार्ड की व्यवस्था की जांच की. टीबी रोगी के मरीजों को लेकर सबसे बड़ी परेशानी इनकी संख्या का सही आंकड़ा नहीं होना बताया. मरीज निजी क्लिनिक में जाते है वहां से सही आंकड़ा नहीं भेजा जाता है, जिससे इनकी गणना करने में परेशानी आ रही है. अनुमान लगाया जा रहा है कि जिले में छह हजार से ज्यादा टीबी के मरीज है. इस समस्या को प्रधान सचिव के पास रखने की बात टीम के सदस्यों ने कही.
शहर को सबसे पहले टीबी मुक्त करने का सुझाव : डॉ डीपी सिंह ने बताया की टीम के सामने सुझाव रखा गया कि सबसे पहले शहर को टीबी रोग से मुक्त किया जाये. इसके लिए जिलाधिकारी और नगर आयुक्त से सहयोग लिया जाये. टीबी जांच के लिए सीडीओ और अस्पताल के चिकित्सक सभी वार्ड में जाये. लोगों को इस रोग के बारे में विस्तार से बताये.
जो रोगी इनको मिले उसका गणना किया जाये, जिसके बाद दवा का कोटा उपलब्ध कराया जाये. सामूहिक प्रयास से इस कार्य में सफलता प्राप्त किया जा सकता है. यह प्रयास आरंभ हुआ तो पोलियो की तरह टीबी रोग भी जड़ से खत्म हो जायेगा. प्रधानमंत्री 2025 तक देश को टीबी मुक्त करना चाहते हैं. इसके लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है. टीबी को लेकर जो चिकित्सक अच्छा काम कर रहे हैं .उनको सम्मान भी दिया जाये.
मरीजों का इलाज कल्चर बेस दवा से करने की कहीं बात
टीम में शामिल सदस्यों ने टीबी मरीजों के इलाज की प्रणाली को जाना. तीन तरह से मरीजों को इलाज किया जा रहा है. इलाज करने की प्रणाली को देखने के बाद सदस्यों ने कल्चर बेस तरीके से मरीजों का इलाज करने की बात कहीं. सदस्यों ने कहा कि जिले में बेहतरीन दवा अभी उपलब्ध है. ऐसे में मरीजों को सही दवा मिल सके इसके लिए कल्चर बेस इलाज किया जाये. मरीज को किस भाग में टीबी है इसकी जांच करने के बाद ही दवा दी जाये.
नौ मेडिकल कॉलेजों में छह में नहीं हैं चिकित्सक
डॉ डीपी सिंह ने बताया कि सूबे में नौ मेडिकल कॉलेज में छह के पास चिकित्सक नहीं है. मायागंज अस्पताल के चेस्ट विभाग हमारे अलावा डॉ शांतनु घोष है. इस समस्या को टीम के सामने रखा गया. कहा गया कि विभाग में एक एसआर दिया जाये. जिससे मरीज के इलाज के साथ साथ रिसर्च कार्य में भी सहायता हो. हमारी समस्या को सुनने के बाद टीम के सदस्यों ने कहा कि इस मामले को प्रधान सचिव के पास रखा जायेगा. जो भी परेशानी है उसे जल्द से जल्द दूर कराया जायेगा. रोग खत्म हो इसके लिए सरकारी हर संभव मदद करने के लिए तैयार हैं.
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