कराहती रही बबीता, हालत थी गंभीर, जाम के कारण अस्पताल जाना था मुश्किल, घर में ही कराना पड़ा प्रसव

Updated at : 01 Aug 2018 6:09 AM (IST)
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कराहती रही बबीता, हालत थी गंभीर, जाम के कारण अस्पताल जाना था मुश्किल, घर में ही कराना पड़ा प्रसव

सबौर : सबौर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से महज दो किलोमीटर पर स्थित रजंदीपुर गांव की बबीता देवी प्रसव के दर्द से चीखती रहीं. लेकिन सड़क जाम के कारण उसे भागलपुर ले जाना मुश्किल था और थोड़ी दूरी पर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी ले जाना संभव नहीं हो पा रहा था. आखिरकार घर में […]

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सबौर : सबौर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से महज दो किलोमीटर पर स्थित रजंदीपुर गांव की बबीता देवी प्रसव के दर्द से चीखती रहीं. लेकिन सड़क जाम के कारण उसे भागलपुर ले जाना मुश्किल था और थोड़ी दूरी पर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी ले जाना संभव नहीं हो पा रहा था. आखिरकार घर में ही प्रसव कराना पड़ा. यह जानते हुए भी कि घर में प्रसव कराना असुरक्षित है, महिला को अस्पताल लेकर जाने की हिम्मत परिजन नहीं जुटा सके.
प्रसव तो हो गया. लेकिन बाद में वही हुआ, जिसका अंदेशा था. महिला की स्थिति खराब होने लगी. आखिरकार किसी प्रकार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सबौर ले जाया गया. अस्पताल में भर्ती कराने के बाद इलाज हुआ और जच्चा व बच्चा दोनों स्वस्थ होकर घर लौटे. यह घटना गत शनिवार की एक बानगी भर है. सबौर व इसके आसपास के गांवों की ऐसी कई महिलाओं का प्रसव घर में ही हो रहा है.
अस्पताल के आंकड़े भी चौंका रहे: सबौर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती होनेवाली प्रसव महिलाओं की संख्या पिछले सात महीनों में काफी घट गयी है. अस्पताल प्रशासन ने जब इसकी पड़ताल की, तो पता चला कि जाम व सड़क पर गड्ढों के कारण कोई रिस्क लेना नहीं चाह रहे. अस्पताल के चिकित्सक डॉ श्याम नारायण ने बताया कि दिसंबर 2017 तक हर महीने 100 से 160 तक प्रसव महिलाएं भर्ती होती थीं. लेकिन जनवरी से अब तक यह संख्या 100 को भी पार नहीं कर रही. गांव से लोग सड़क की स्थिति देख आना ही नहीं चाहते.
महिलाओं को घर नहीं पहुंचा पा रहे : दिलीप
अस्पताल के एंबुलेंस चालक दिलीप कुमार व केयर टेकर निष्ठा कुमारी कहती हैं कि प्रसव के बाद घर तक पहुंचाया जाता है. लेकिन यह संभव नहीं हो पाता है. दो किलोमीटर का सफर तय करने में चार से पांच घंटे लग जाते हैं. आशा रिंकु देवी, जीरा देवी आदि ने भी कुछ ऐसा ही बताया.
सुबह-सुबह अच्छी चीजें देखना चाहते हैं पर हम देखते हैं जाम
सबौर में एनएच 80 के किनारे बसे सजन राय ने बताया कि पौ जब फटता है, तो लोग अच्छी चीजें देखना चाहते हैं. लेकिन सबौर के लोगों की आंख खुलती है, तो सबसे पहले उन्हें एनएच पर सैकड़ों लोडेड ट्रक खड़े दिखते हैं. लोगों का तनाव यहीं से शुरू हो जाता है. पैदल चलनेवाले लोग भी जाम समाप्त होने तक खड़े होकर इंतजार करते हैं.
इनका दावा : समस्या का निकलेगा निदान
भाजपा नेता अर्जित शाश्वत चौबे ने मंगलवार को एनएच 80 सड़क की जर्जर स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है. उन्होंनें इसकी मरम्मत समस्या के उपचार के लिये नेशनल हाइवे अथॉरिटी आॅफ इंडिया बिहार पटना के रीजनल आॅफिस के क्षेत्रिय अधिकारी अशोक मिश्र से मिलकर एनएच 80 की भयावह स्थिति पर बात की. चौबे ने बताया कि इसका स्थायी निदान के लिये वे ज्ञापन के माध्यम से बिहार के पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव, सीएम नीतीश कुमार और केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को विषय वस्तु अवगत कराएंगे.
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