वीटीआर के जंगल से भटका हिंसक बंदरों का झुंड, बच्चों समेत दर्जनभर लोगों का किया घायल

Published by : SATISH KUMAR Updated At : 10 Jan 2026 8:47 PM

विज्ञापन

वीटीआर वन प्रमंडल दो अंतर्गत मदनपुर वन क्षेत्र जंगल से भटके बंदरों के एक हिंसक झुंड ने सीमावर्ती इलाकों में दहशत फैला दिया है.

विज्ञापन

हरनाटांड़. वीटीआर वन प्रमंडल दो अंतर्गत मदनपुर वन क्षेत्र जंगल से भटके बंदरों के एक हिंसक झुंड ने सीमावर्ती इलाकों में दहशत फैला दिया है.बीते एक सप्ताह से मदनपुर वन क्षेत्र के रामपुर वन परिसर के समीप बसे नयागांव नोनिया टोला, धरमनिया टोला, सुभाष नगर में बंदर का आतंक बना हुआ है. अब तक बच्चों समेत करीब एक दर्जन लोग बंदर के हमले में घायल हो चुके हैं. ग्रामीणों के अनुसार, पिछले दो–तीन दिनों से बंदर अत्यधिक आक्रामक हो गया है और राह चलते लोगों पर दौड़कर हमला कर रहा है. बंदर के हमले में नया गांव निवासी चंदन चौधरी, लाल बाबू चौधरी, बाबू नंद यादव, दीपक कुमार, मुस्मात मधु, अनूप कुमार, कमल यादव, ओम प्रकाश चौधरी, मनीष सिंह सहित कई लोग घायल हुए हैं. इनमें पांच से 12 वर्ष तक के बच्चे भी शामिल हैं. कोई बच्चा घर के बाहर खेल रहा था, कोई कोचिंग से लौट रहा था, तो कोई खेत या अपने काम पर जा रहा था. यहां तक कि दुकान में बैठे किराना व्यवसायी अनिल सिंह भी बंदर के हमले का शिकार हो गए.बंदर के हमले में विशेष रूप से घायल हुए बच्चे अनूप कुमार का इलाज अनुमंडलीय अस्पताल में कराया गया, जहां चिकित्सकों ने एंटी-रेबीज इंजेक्शन समेत आवश्यक उपचार दिया. सभी घायलों ने सरकारी एवं निजी क्लीनिकों में इलाज कराया है. मदनपुर वन क्षेत्र पदाधिकारी नसीम अंसारी के नेतृत्व में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. वही वनपाल राजेश रोशन व वनरक्षी सुजीत कुमार के नेतृत्व मे वन कर्मियों की टीम बंदर को पकड़ने के लिए तथा नयागांव मे पिंजरा लगाया गया है और लगातार निगरानी की जा रही है, हालांकि अब तक बंदर पिंजरे में नहीं फंसा है. वन कर्मी लगातार रेस्क्यू प्रयास में जुटे हुए हैं.वन क्षेत्र पदाधिकारी ने बताया कि सूचना मिलते ही टीम को सक्रिय कर दिया गया है.बंदर को सुरक्षित तरीके से पकड़कर जंगल में छोड़ा जाएगा. आवश्यकता पड़ने पर ट्रैंक्विलाइजर गन या प्रशिक्षित रेस्क्यू कर्मियों की मदद भी ली जाएगी. वहीं ग्रामीणों ने वन विभाग से शीघ्र रेस्क्यू करने और घायलों को उचित मुआवजा देने की मांग की है.ठंड में क्यों अतिक्रमणकारी और आक्रामक हो जाते हैं बंदर भोजन की कमी

बगहा वन क्षेत्र पदाधिकारी श्रीमान मालकर ने बताया कि जंगल मे कड़ाके की ठंड में जंगलों में फल-फूल और पत्तों जैसे प्राकृतिक खाद्य स्रोत कम हो जाते हैं. ऐसे में बंदर भोजन की तलाश में रिहायशी इलाकों का रुख करते हैं और घरों व दुकानों में घुस जाते हैं.ठंड से बचने के लिए बंदर धूप वाली जगहों, घरों की छतों, पेड़ों, खाली इमारतों और आबादी के बीच शरण लेते हैं, जिससे इंसानों से उनका आमना-सामना बढ़ जाता है. मानवीकरण लंबे समय तक इंसानों द्वारा भोजन किए जाने या उकसाए जाने से बंदर इंसानों से डरना छोड़ देते हैं. यही वजह है कि वे धीरे-धीरे आक्रामक व्यवहार करने लगते हैं.वन प्रेमी नीपू पाठक ने बताया कि ठंड के मौसम में बंदरों के सामान्य व्यवहार में बदलाव आ जाता है. भोजन और सुरक्षित स्थान पाने की होड़ में वे ज्यादा चिड़चिड़े और आक्रामक हो जाते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
SATISH KUMAR

लेखक के बारे में

By SATISH KUMAR

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन