लंदन से वाल्मीकिनगर क्यों पहुंचे ये पर्यटक? यहां का नजारा देखकर रह गए हैरान

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लंदन से पहुंचे पर्यटक

लंदन और मोतिहारी से वाल्मीकिनगर पहुंचे पर्यटकों के एक समूह ने वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) की प्राकृतिक सुंदरता का खूब आनंद लिया. उन्होंने जंगल कैंप, जल, जंगल और पहाड़ के संगम के साथ-साथ वाल्मीकि आश्रम और जटाशंकर मंदिर में पूजा-अर्चना की.

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Valmikinagar Tourism: बिहार का कश्मीर कहे जाने वाला वाल्मीकिनगर इन दिनों पर्यटन सत्र समाप्त होने के कारण भले ही पर्यटकों की सामान्य चहल-पहल से दूर है, लेकिन इसकी प्राकृतिक सुंदरता अब भी देश-विदेश के लोगों को आकर्षित कर रही है. इसी क्रम में लंदन और मोतिहारी से पहुंचे पर्यटकों के एक समूह ने वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) की मनमोहक वादियों का दीदार किया और जल, जंगल व पहाड़ के संगम के बीच यादगार समय बिताया.

लंदन और मोतिहारी से वाल्मीकिनगर पहुंचे पर्यटक

लंदन में आईटी सेक्टर में कार्यरत अभिजीत कुमार और निधि अपने परिजनों के साथ वाल्मीकिनगर पहुंचे. वहीं मोतिहारी के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. सौरभ कुमार गौतम भी अपनी पत्नी डॉ. अलका और परिवार के अन्य सदस्यों अद्वैत, कुहू, वेदांत, अतुल कुमार, निशु कुमारी और वेदु के साथ एक दिवसीय प्रवास पर पहुंचे.

गूगल पर खोजी वाल्मीकिनगर की खूबसूरती

पर्यटकों ने बताया कि उन्होंने गूगल के माध्यम से वाल्मीकिनगर और वीटीआर के पर्यटन स्थलों के बारे में जानकारी हासिल की थी. प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन स्थलों की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने परिवार के साथ यहां आने की योजना बनाई.

जंगल कैंप और प्राकृतिक वादियों का लिया आनंद

वाल्मीकिनगर पहुंचने के बाद पर्यटक वन विभाग के जंगल कैंप गए. यहां उन्होंने प्रकृति की गोद में समय बिताया और जल, जंगल व पहाड़ के मनमोहक नजारों का आनंद लिया. शांत वातावरण और हरियाली ने पर्यटकों को काफी प्रभावित किया.

वाल्मीकि आश्रम और जटाशंकर मंदिर में की पूजा

प्राकृतिक सौंदर्य के साथ पर्यटकों ने वाल्मीकि आश्रम एवं जटाशंकर मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और माथा टेका. धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सुंदरता के इस संगम ने उनके वाल्मीकिनगर प्रवास को और खास बना दिया.

उम्मीद से कहीं ज्यादा खूबसूरत लगा वाल्मीकिनगर

डॉ. सौरभ कुमार गौतम ने कहा कि वाल्मीकिनगर की प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण अविस्मरणीय है. उन्होंने कहा कि यहां के लोग सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें ऐसे मनोरम वातावरण में रहने का अवसर मिलता है.

उन्होंने बताया कि जिस खूबसूरती की उम्मीद लेकर वे यहां आए थे, उससे कहीं अधिक मनमोहक नजारा देखने को मिला.

सफारी नहीं कर सके, दो महीने बाद फिर आएंगे

पर्यटन सत्र बंद होने के कारण परिवार जंगल सफारी का आनंद नहीं ले सका. डॉ. गौतम ने कहा कि अब करीब दो माह बाद वे दोबारा वाल्मीकिनगर आएंगे और जंगल सफारी के जरिए वीटीआर के वन्यजीवों का दीदार करेंगे.

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