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बढ़ती जनसंख्या के बीच अंधाधुंध औद्योगिक विकास पर्यावरण के लिए प्रतिकूल: प्रो रवींद्र

Updated at : 07 May 2024 9:07 PM (IST)
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बढ़ती जनसंख्या के बीच अंधाधुंध औद्योगिक विकास पर्यावरण के लिए प्रतिकूल: प्रो रवींद्र

गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज बगहा तथा बीआरए बिहार यूनिवर्सिटी पीजी डिपार्टमेंट ऑफ़ जियोग्राफी के संयुक्त तत्वावधान में जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण प्रदूषण निम्नीकरण विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय वेब सेमिनार का आयोजन सोमवार की शाम संपन्न हुआ.

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बेतिया.गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज बगहा तथा बीआरए बिहार यूनिवर्सिटी पीजी डिपार्टमेंट ऑफ़ जियोग्राफी के संयुक्त तत्वावधान में जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण प्रदूषण निम्नीकरण विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय वेब सेमिनार का आयोजन सोमवार की शाम संपन्न हुआ. प्राचार्य प्रो (डॉ) रवींद्र कुमार चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के भी अनेक विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ प्राध्यापक अपने महत्वपूर्ण विचारों के साथ शामिल रहे. अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य प्रो चौधरी ने देश बेलगाम जनसंख्या के कारण बढ़ती गरीबी को रोकने के लिए अंधाधुंध आर्थिक विकास के प्रतिकूल परिणाम को विस्तार से उद्घाटित किया. उन्होंने कहा कि इसके कारण ही अप्राकृतिक जलवायु परिवर्तन के साथ हमारे वैश्विक पर्यावरण को भी बहुत नुकसान हो रहा है. अर्थशास्त्र के विद्वान प्राध्यापक प्रो.चौधरी ने प्रभावी गरीबी उन्मूलन को प्रभावी और अधिक कारगर बनाने में जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में कारगर कदम उठाने पर बल दिया. बीआरए बिहार विश्वविद्यालय स्नात्कोत्तर विभाग के अध्यक्ष प्रो. (डॉ) जफर इमाम ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बनायी गयी नीतियों को अमलीजामा पहनाने की जरूरत है. प्रोफेसर नेहाल अहमद ने ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा में बेतहाशा वृद्धि को जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण बताया. अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के डॉ सालेहा जमाल ने अपनी स्पीच के दौरान कोलकाता,श्रीनगर,नई दिल्ली के अलावा अन्य नगरों को रेखांकित कर बताया कि तीव्र गति से शहरीकरण के कारण ये सभी ””””हीट-आइलैंड ””””में परिवर्तित हो गए हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों का तापमान तुलनात्मक रूप से कम है. इस दिशा में सुनियोजित शहरीकरण होनी चाहिए. रायगंज यूनिवर्सिटी (पश्चिम बंगाल ) के प्रो.(डॉ) तपस पाल ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के मन में पर्यावरण संरक्षा के प्रति संवेदना का होना जरूरी है. संचालन मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्षा डॉ रेखा श्रीवास्तव ने किया. जबकि अतिथि स्वागत डॉ शिरीन हयात, एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ अल्पना ज्योति ने की. मौके पर डॉ. नौशेर आलम, डॉ फिरोज अहमद (अलीगढ ), डॉ सदफ, रश्मि कुमारी, प्रांजलि शर्मा, सौम्या, विनीता, राहुल, नौशाद, गुड़िया, निभा कुमारी के अलावा सैकड़ों विद्यार्थी मौजूद रहे.

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