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ये जो लोकतंत्र है, जनतंत्र है, नेता चुनने का बड़ा यंत्र है...पर वाहवाही लूटी

Updated at : 18 Oct 2025 10:02 PM (IST)
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ये जो लोकतंत्र है, जनतंत्र है, नेता चुनने का बड़ा यंत्र है...पर वाहवाही लूटी

राजकीय कल्पवास मेला सिमरिया धाम में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में शुक्रवार को राष्ट्रीय नवसर्जना साहित्य परिषद, बेगूसराय इकाई द्वारा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया.

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बीहट. राजकीय कल्पवास मेला सिमरिया धाम में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में शुक्रवार को राष्ट्रीय नवसर्जना साहित्य परिषद, बेगूसराय इकाई द्वारा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. कवि शेखर सावंत की अध्यक्षता में पल्लवी भारद्वाज ने सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया. डॉ रमा ने हौसलों की उड़ान कभी कम ना हो, जरा बचपन का वो एहसास दे देना की शाम, क्या मुहब्बत है सबको बताने लगे और रंजना सिंह के द्वारा मिले ग़म जहां के भुला दीजिये रहे जिंदगी से निभा दीजिए गजल को श्रोताओं ने काफी पसंद किया. वहीं प्रकाश कुमार ने याद आयेगी तेरी तो रो लेंगे हम आंसुओं से पलकों को भिगो लेंगे हम और मैं भी ख़ास था, आम हो गया तेरे शहर में का काव्य पाठ किया. डॉ प्रभा कुमारी ने सिमरिया में गंगा का धाम है गंगा मैया को शत शत बार प्रणाम है, ये जो लोकतंत्र है, जनतंत्र है, नेता चुनने का बड़ा यंत्र है और चुनाव के बहल बयार हो, हमहूं वोट देले जइबे सुनाकर खूब वाहवाही लूटी. फिर गौतम कुमार ने अपनी कविता भले डांट बीबी का घर में तू खाना, मगर मेरे भाई कचहरी ना जाना और वृद्धाश्रम कि जबरदस्त प्रस्तुति से दर्शकों को भावुक कर दिया. पल्लवी भारद्वाज ने नारी है शक्ति नारी है तेज और रामसुंदर गांधी ने मुहब्बत में किए वादे अक्सर टूट जाते है तथा हरिशंकर सिंह के द्वारा होटलों में घिस रहा क्यों बचपना बालकों की है जगह स्कूल में और न चाहते हुए भी उसे चाहना पड़ा वक्त की उसे मांगना पड़ा सुनाया गया. अंत में कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे शेखर सावंत ने महल बना लो गाड़ी ले लो चैन कहां से लाओगे सुनाकर लोगों को सोचने के लिए मजबूर कर दिया. इसके अलावा अनिल कुमार यादव, सुजीत कुमार,भागलपुर,संजीत झा अजीत,मिथिलेश कांति आदि कवियों के द्वारा भी काव्य पाठ किया गया. मंच व्यवस्था एवं संचालन में रामसुंदर गांधी तथा सहयोगी के रूप में मनोज कुमार, मनीष कौशिक मौजूद थे. मौके पर मौजूद जिला प्रशासन बेगूसराय की ओर से जिला कला संस्कृति पदाधिकारी श्याम कुमार सहनी ने सभी कवियों को अंग वस्त्र एवं पुस्तक देकर सम्मानित किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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