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पुलिस की मौजूदगी में गेहूं की फसल पर चलाया गया बुलडोजर

Updated at : 22 Jan 2026 10:00 PM (IST)
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पुलिस की मौजूदगी में गेहूं की फसल पर चलाया गया बुलडोजर

सरकार के द्वारा घोषित रामसर साइट कांवर झील पक्षी अभ्यारण क्षेत्र को प्रशासनिक तैयारियां जोरों पर है.

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मंझौल/बेगूसराय. सरकार के द्वारा घोषित रामसर साइट कांवर झील पक्षी अभ्यारण क्षेत्र को प्रशासनिक तैयारियां जोरों पर है. जानकारी के अनुसार उक्त क्षेत्र में बसे महादलित परिवारों के विस्थापन एवं कॉलोनी निर्माण के लिए हरे-भरे गेहूं की लहलहाती फसलों को बुलडोजर चला कर जमींदोज कर दिया गया है. बताया जा रहा है बुलडोजर चलाते समय प्रशासन के द्वारा किसानों को झांकने तक का मौका नहीं दिया गया. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन विगत लगभग एक माह से लगातार जयमंगलागढ़ एवं वन विभाग के अतिथि शाला में महादलितों के विस्थापन एवं उनके पुनर्वास को लेकर लगातार कैंप कर रही है .इसी क्रम में गुरुवार को महादलित परिवारों को बसाने के लिए अनुमंडल प्रशासन के द्वारा चिन्हित भूमि पर विशेष पुलिस बल की तैनाती के साथ अतिक्रमणमुक्त कराया गया है. विदित हो कि मंझौल गढ़पुरा मुख्य पथ पर जयमंगला गढ़ गेट से लगभग 100 मीटर पूरब चिन्हित भूमि पर लहलहाते गेहूं के फसल को प्रशासन के द्वारा ट्रैक्टर से जोतवा दिया गया. वहीं इस संबंध में पीड़ित किसान मंझौल पंचायत 3 के वार्ड नंबर 7 निवासी रामानुज सिंह ने बताया कि उक्त जमीन मेरा है. जो पूर्वजों का ख़ातियौनी जमीन था. वहीं इस जमीन पर तीन केवाला मौजूद है, इसमें पहल केवाला 1951 का है. दूसरा केवाला 1955 का है. वहीं तीसरा केवाला 1988 का है. वर्तमान में जब मेरे खेत पर प्रशासन द्वारा ट्रैक्टर से फसल को जोता जा रहा था. तो मैं बीडीओ साहब से उक्त जमीन मेरा है होने की बात कही. तब उनके द्वारा कहा गया कि जिला अधिकारी के द्वारा आपके खेत की जमाबंदी रद्द कर दी गयी है. आप जिलाधिकारी से जाकर मुलाकात करें. इस जमीन का कुल रकवा 44 कट्ठा का है. जिसमें दो-तीन कट्ठा बचा हुआ है. बाकी जमीन पर लगी फसल को अभी जोत दिया गया है. जिस पर प्रशासन का कहना है कि महादलित परिवार के लिए कालोनी का निर्माण होगा. मेरे द्वारा निचली अदालत से लीगल नोटिस करवाया गया. वहीं हाइकोर्ट में भी अपील किया गया है. जिससे स्टे आर्डर अभी नहीं आया है. मंगलवार को कोर्ट में फाइल किया गया है. इस संबंध में जब एसडीओ मंझौल से संपर्क कर जानकारी लेने का प्रयास किया गया. तो उनके द्वारा मोबाइल फोन रिसीव नहीं किए जाने के कारण इस संबंध में कोई विस्तृत जानकारी नहीं मिल सकी. जबकि उक्त कार्रवाई के बाद पीड़ित किसान सड़क पर भटककर अपने बाल बच्चों की परवरिश के लिए मजबूर हो गये हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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