तीन दिवसीय गैर आवासीय समावेशी शिक्षा प्रशिक्षण का समापन

Edited by MANISH KUMAR
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समावेशी शिक्षा में उन सभी तथ्यों को सम्मिलित किया जाता है. जो विशिष्ट बालकों पर लागू होते हैं.

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चेरियाबरियारपुर. समावेशी शिक्षा में उन सभी तथ्यों को सम्मिलित किया जाता है. जो विशिष्ट बालकों पर लागू होते हैं. यह एक ऐसी शिक्षा पद्धति है. जो यह तय करती है कि प्रत्येक छात्र को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले. उक्त बातें बीईओ अतहर हुसैन बीआरसी भवन में आयोजित तीन दिवसीय गैर आवासीय समावेशी शिक्षा प्रशिक्षण समापन के मौके पर कही. समापन समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा समावेशी शिक्षा शारीरिक, मानसिक, प्रतिभाशाली तथा विशिष्ट गुणों से युक्त विभिन्न बालकों पर अपनायी जाती है. इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि ऐसे बालक-बालिका की योग्यता, शारीरिक-अक्षमता, भाषा-संस्कृति, पारिवारिक पृष्ठभूमि तथा उम्र किसी प्रकार का अवरोध पैदा न कर सके. वहीं प्रशिक्षक राजेश कुमार एवं रंजन कुमार के द्वारा समावेशी शिक्षा के महत्व एवं आवश्कता पर विस्तार से चर्चा किया गया. इस दौरान प्रशिक्षक ने दिव्यांगता के प्रकार, समावेशी शिक्षा के क्रियान्वयन में विभिन्न लोगों की भूमिका, शैक्षणिक गतिविधियां, दिव्यांग जनों को मिलने वाले सरकारी लाभ आदि के बाबत विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया शिक्षकों को प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने अपने विद्यालय में ऐसे बच्चों की पहचान कर आवश्यक रूप से उनकी समुचित देखभाल करनी है. ताकि दिव्यांगजन सामान्य विद्यालयों में अपने आपको उपेक्षित महसूस नहीं करें. मौके पर प्रशिक्षु शिक्षक तरूण भारती, ललन कुमार सहनी, रंजीत कुमार, शालिनी गुप्ता, अजय कुमार ईश्वर, कल्याणी भारद्वाज, अभय कुमार सान्याल सहित अन्य मौजूद थे.

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