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Begusarai News : बरौनी बाजार में हर तरफ से आ रही तिलकुट की सोंधी खुशबू

Updated at : 08 Dec 2025 10:43 PM (IST)
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Begusarai News : बरौनी बाजार में हर तरफ से आ रही तिलकुट की सोंधी खुशबू

बरौनी बाजार में तिलकुट की सौंधी खुशबू फैलने लगी है. बढ़ती ठंड में लोग अनायास ही तिलकुट की दुकानों की ओर आकर्षित हो रहे हैं.

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बरौनी. बरौनी बाजार में तिलकुट की सौंधी खुशबू फैलने लगी है. बढ़ती ठंड में लोग अनायास ही तिलकुट की दुकानों की ओर आकर्षित हो रहे हैं. तिल और गुड़ से बनी देशी स्टाइल की तिलकुट की मांग इस बार बाजार की रौनक को और बढ़ा रही है. फुलवड़िया थाना क्षेत्र के नगर परिषद बरौनी क्षेत्र के प्रमुख बाजार में प्रतिवर्ष केवल दो माह के लिए तीन-चार तिलकुट की दुकानें आती हैं. इनमें मां जगदंबा तिलकुट भंडार की दुकान खासतौर पर उल्लेखनीय है, जहां कोयले पर लगभग छह घंटे की मेहनत से गुड़ और चीनी का तिलकुट बनाया जाता है. यहां के तिलकुट का स्वाद और सुगंध दोनों ही ग्राहकों को अपनी ओर खींच रहे हैं. हरियाणा और पंजाब से लाये गये उच्च गुणवत्ता वाले तिल के साथ बनाया गया यह तिलकुट स्थानीय लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है. जानकारी के अनुसार, पटना जिले के मोकमा, बाढ़ सहित अन्य क्षेत्रों से दर्जनों लोग हर साल बरौनी आते हैं और अपनी टीम के साथ इस व्यवसाय को चलाते हैं. प्रत्येक दुकानदार के पास 10 से 15 लोगों की टीम होती है, जो 24 घंटे शिफ्ट में काम करती है. दो माह के इस सीजन में लगभग 50 से 60 क्विंटल तिलकुट का उत्पादन किया जाता है और इसके लिए लगभग 60 मन कोयले की आवश्यकता होती है. इस व्यवसाय में लगे कारीगरों और मजदूरों को दो माह के लिए 25 हजार से एक लाख रुपये तक वेतन मिलता है. उनकी मेहनत और अनुभव तिलकुट में स्वाद का जादू घोल देता है, जिससे ग्राहक अगले साल का इंतजार करते हैं. तिलकुट बनाने के लिए झारखंड के कई जिलों से कुशल कारीगर बुलाये जाते हैं. यह प्रक्रिया बेहद मेहनती और बारीक होती है, और कारीगरों के खाने और रहने की व्यवस्था दुकानदार करते हैं. इस बार तिलकुट की कीमत पिछले साल की तुलना में थोड़ी अधिक है. लोग तिलकुट के साथ खोवा वाला अनरसा, गजक, खस्ता, चॉकलेट वाला, कटोरी और प्लेट वाला तिलकुट तथा तिल के लड्डू भी खूब पसंद कर रहे हैं. बरौनी और आसपास के इलाकों में हर साल तिलकुट दुकानदारों की संख्या बढ़ती जा रही है. बरौनी बाजार में तिलकुट न केवल स्वाद का आनंद प्रदान कर रहा है बल्कि ठंड के मौसम में लोगों को जोड़ने और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है.

250 से 400 रुपये किलो मिल रहे कई वैराइटी के तिलकुट

इस बार तिलकुट की कीमत 250 से 400 रुपये प्रति किलो है. बाजार में तिल-गुड़, तिल-चीनी, तिल-मावा, तिल-सूखे मेवे और मोटे अनाज वाली तिलकुट की कई वैरायटी उपलब्ध हैं. शुगर फ्री तिलकुट भी इस बार लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी है. बरौनी और आसपास के क्षेत्रों में दर्जनों तिलकुट दुकानें खुली हैं और हर दुकानदार की अपनी विशेषता है. इस बार भी गुड़, चीनी और खोया से बनी तिलकुट की मांग सबसे अधिक है. दुकानदारों के अनुसार प्रतिदिन पांच हजार से सात हजार रुपये का बिक्री का आंकड़ा निकल रहा है. सर्दियों की शुरुआत के साथ ही तिलकुट की मांग तेज हो जाती है और फरवरी तक यह बाजार गर्म रहता है. मकर संक्रांति पर तिलकुट की बिक्री अपने चरम पर पहुंचती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SHAH ABID HUSSAIN

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By SHAH ABID HUSSAIN

SHAH ABID HUSSAIN is a contributor at Prabhat Khabar.

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