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अध्यात्म व संस्कृति के ध्वजवाहक स्वामी चिदात्मनजी महाराज के सान्निध्य में सिमरियाधाम की महत्ता आगे बढ़ी

Updated at : 16 Oct 2025 10:21 PM (IST)
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अध्यात्म व संस्कृति के ध्वजवाहक स्वामी चिदात्मनजी महाराज के सान्निध्य में सिमरियाधाम की महत्ता आगे बढ़ी

सिमरियाधाम आज विश्व फलक पर है. आदिकाल से जहां कल्पवास की परंपरा रही है, वहीं राजा जनक, श्रृंगी ऋषि, माता जानकी, श्रीराम, उगना, विद्यापति, राष्ट्रकवि दिनकर सहित अन्य संतों, ऋषियों, श्रद्धालुओं और आमजनों की यह तपस्थली, साधना भूमि और मोक्षदायिनी रही है.

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बीहट. सिमरियाधाम आज विश्व फलक पर है. आदिकाल से जहां कल्पवास की परंपरा रही है, वहीं राजा जनक, श्रृंगी ऋषि, माता जानकी, श्रीराम, उगना, विद्यापति, राष्ट्रकवि दिनकर सहित अन्य संतों, ऋषियों, श्रद्धालुओं और आमजनों की यह तपस्थली, साधना भूमि और मोक्षदायिनी रही है. कभी यह कुंभस्थली और समुद्र मंथन का भी स्थल रहा है. ऐसा मत संतों और विद्वानों का रहा है. कुछ शास्त्र और कुछ भौगोलिक आधार इसके प्रमाण के रूप में वे अब भी प्रस्तुत करते हैं. सिमरिया जहां सीमा का बोध कराता है, वहीं यह मगध, मिथिला और अंग की संगम स्थली रही है. कभी सिमरिया का प्रमाण जयमंगलगढ़ के पास रहा, फिर कालांतर में रूपनगर और अब सिमरिया में कल्पवास की यह परम्परा अनवरत जारी है. राष्ट्रकवि दिनकर का तुझ सा ना सिमरिया घाट अन्य, अब सिमरियाधाम हो चला है. सिमरिया घाट से सिमरियाधाम की इस यात्रा में कई दशकों का सफर अहर्निश जारी है. इस यात्रा में पिछले 5 दशक से सिमरिया की इस कछार पर एक युवा का आना हुआ, जो अपनी सेवा,साधना,तपस्या से गंगा किनारे आज तक अनवरत साधनारत हैं. ये संत आज स्वामी चिदात्मन जी महाराज के रूप में सर्वमंगला आध्यात्म योग विद्यापीठ सिमरियाधाम में सुलभ हैं. जब सिमरिया की महत्ता धीरे-धीरे विलुप्त हो रही थी, तब स्वामी चिदात्मन ने देश भर के विद्वानों के बीच संगोष्ठी, सेमिनार और शास्त्रार्थ कराकर सिमरिया कुंभ को पुनर्स्थापित करने का काम किया. सिमरिया के इस कुंभ को आगे बढ़कर संत, समाज और सरकार ने बड़ा स्वरूप दिया और फिर 2011 में कुंभ सेवा समिति के प्रयास से अर्द्ध कुंभ का आयोजन किया गया. इस आयोजन में जहां कुंभ सेवा समिति के अध्यक्ष डॉ नलिनी रंजन सिंह, महासचिव रजनीश कुमार, महंथ शंकर दास, महन्थ राम सुमिरन दास, महंथ विष्णुदेवाचार्या सहित कुंभ सेवा समिति के दर्जनों सदस्यों का अथक प्रयास जारी रहा. यह कारवां आगे बढ़ता गया और फिर से 2017 में महाकुंभ सिमरिया धाम की भूमि पर पल्लवित और पुष्पित हुई. जहां उदघाटन में पहुंचे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था कि जहां संत, समाज आगे बढ़कर आयेंगे, वहां सरकार स्वतः सेवा के लिए तैयार रहेगी. 2018 में मुरारी बापू के द्वारा साहित्य महाकुंभ का आयोजन सिमरिया घाट से सिमरिया धाम की इस यात्रा का एक फलाफल था, जिसके कारण वर्ष 2023 में जल संसाधन विभाग के मंत्री संजय कुमार झा के प्रयास से 115 करोड़ रुपये की राशि से रिवर फ्रंट, धर्मशाला, कल्पवास मेला क्षेत्र का शिलान्यास मुख्यमंत्री बिहार सरकार के द्वारा किया गया. वहीं 2023 में एक बार फिर से अर्द्ध कुंभ का सफल आयोजन कुंभ सेवा समिति के नेतृत्व में किया गया. कुंभ और कल्पवास की इस भूमि की महत्ता को आगे बढाते हुए केंद्र सरकार की ओर से भी नमामि गंगे के तहत सीढ़ी घाट का निर्माण लगभग 13 करोड़ की राशि से किया गया. वहीं राजेन्द्र पुल के पश्चिम रामघाट तक अन्य सुविधाओं के साथ स्थायी सीढ़ी घाट का निर्माण कार्य शुरू है. दूसरी तरफ बेगूसराय के सांसद और भारत सरकार के कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह हरिद्वार की हरि की पौड़ी की तर्ज पर सिमरियाधाम में जानकी पौड़ी का रूप देने के लिए प्रयासरत हैं.वे कहते हैं कि सिमरिया घाट से सिमरिया धाम की इस यात्रा में जहां एक तरफ बिहार सरकार काम रही है, वहीं दूसरी तरफ केन्द्र सरकार के द्वारा सिमरिया में गंगा नदी के ऊपर बिहार का पहला सिक्सलेन पुल लगभग 1150 करोड़ की राशि से पूर्ण किया जा चुका है. दूसरी तरफ राजेन्द्र पुल से पश्चिम 1491 करोड़ की राशि से डबल रेल लाइन पुल निर्माण का कार्य जारी है. इस विकास की यात्रा में कुंभ सेवा समिति ने लगातार संत,समाज और सरकार से समन्वय स्थापति करते हुए अपनी यात्रा लगातार जारी रखी.इसी क्रम में वर्ष 2011 से ही लगातार एक माह तक कल्पवास मेला में गंगा महाआरती की शुरुआत की गयी.वाराणसी के पंडितों द्वारा पूर्ण विधि विधान से भक्ति और संगीतमय वातावरण में गंगा महाआरती जारी है.सिमरिया की इस तपोस्थली पर स्वामी चिदात्मन जी महाराज की यह साधना है कि सिमरिया अब और भव्यता के साथ निखर और प्रसिद्धि पा रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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