कांवर किसानों की समस्याओं का सरकार व प्रशासन जल्द करे निदान

गुरुवार को क़ाबर किसानों की ओर से क़ाबर मजदूर, किसानों एवं मछुआरों की दशकों से चल रहे मांग को लेकर आमरण अनशन शताब्दी मैदान मंझौल के प्रांगण में शुरू किया.
चेरियाबरियारपुर/मंझौल. गुरुवार को क़ाबर किसानों की ओर से क़ाबर मजदूर, किसानों एवं मछुआरों की दशकों से चल रहे मांग को लेकर आमरण अनशन शताब्दी मैदान मंझौल के प्रांगण में शुरू किया. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पहले यह कार्यक्रम अनुमंडल कार्यालय मंझौल के नजदीक प्रस्तावित था. परंतु प्रशासन के द्वारा मारपीट और जबरन विरोध के बाद प्रदर्शन स्थल को बदला गया. मौके पर किसानों ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है. और इसी भारत के अंदर बेगूसराय जिला अंतर्गत मंझौल अनुमंडल के किसानों के साथ सरकार व स्थानीय प्रशासन सहयोग करने के बजाय नकारात्मक रवैया अपना रही है, जिसे हम सभी किसान व युवा निंदा करते हैं. एवं सरकार से मांग करते हैं कि किसान के अधिकार एवं समस्याओं का हल जल्द करें नहीं तो किसान सड़क पर उतर कर आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए बाध्य होंगे. किसानों का कहना है की मुख्यमंत्री महोदय ने अपने जनवरी 2025 के कार्यक्रम में यह आह्वान किया था कि 6500 एकड़ जमीन पक्षी अभयारण्य के लिए लेकर बांकी जमीन किसानों को वापस की जाएगी. इसके बाबजूद भी 7 महीने तक कोई सुधार नहीं हुआ. सुधार के जगह पर कभी चेक डेम बनाकर जमीन को जलप्लावित करने का उपाय किया गया. फिर राजस्व महाभियान में भी क़ाबर के जमीन को अनदेखा किया गया. हम सभी किसान सड़क पर संघर्षरत हैं. और स्थानीय प्रशासन सहायक होने के जगह, शांतिपूर्ण धरने में बल प्रयोग कर रही है. आमरण अनशन पर बैठे किसान बल्लभ बादशाह ने कहा कि आमरण अनशन अपना अधिकार मांगने का लोकतांत्रिक अधिकार और हथियार है. स्थानीय प्रशासन का तरीका गैरकानूनी है.
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