रमजान का असली संदेश, इबादत, संयम और बराबरी का पवित्र महीना

रमजान का महत्व
Ramzan 2026: रमजान इबादत, रोजा, दया और बराबरी का संदेश देता है. इस महीने में रोजा, जकात और इफ्तार के जरिए इंसानियत, संयम और जरूरतमंदों की मदद सिखाई जाती है.
प्रो मुश्ताक अहमद
प्रधानाचार्य
सीएम कॉलेज, दरभंगा
Ramzan 2026: इस्लाम धर्म का मुख्य संदेश यह है कि इंसान अपने त्योहार समय के अनुसार मनाए और किसी दूसरे व्यक्ति को किसी तरह की परेशानी न दे. रमजान इसी संदेश को सिखाने वाला सबसे खास महीना है. यह महीना इबादत, संयम, दया और समाज के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है.
रमजान में क्या-क्या खास होता है
रमजान के महीने में मुसलमान रोजा रखते हैं. रोजे का मतलब है सुबह सूरज निकलने से पहले सेहरी करना और फिर पूरे दिन कुछ भी खाना-पीना नहीं. इसके बाद शाम को सूरज डूबने पर इफ्तार किया जाता है. इस महीने में पांच वक्त की नमाज के साथ-साथ तरावीह की नमाज भी पढ़ी जाती है. इफ्तार के समय गरीब और जरूरतमंद लोगों को भी खाना खिलाया जाता है और उनके साथ बैठकर इफ्तार किया जाता है. ईद की नमाज से पहले फितरा दिया जाता है, जो गरीबों में बांटा जाता है. इसके अलावा जकात और सदका के रूप में भी जरूरतमंद लोगों की मदद की जाती है. रमजान में रोजेदार को गुस्से से बचना चाहिए, कम बोलना चाहिए और अच्छे व्यवहार का पालन करना चाहिए.
रमजान के तीन हिस्से
रमजान के महीने को तीन बराबर हिस्सों में बांटा गया है.
पहला हिस्सा – रहमत (पहले 10 दिन):
इस दौरान अल्लाह की विशेष रहमत यानी कृपा रोजेदारों पर होती है.
दूसरा हिस्सा – बरकत (दूसरे 10 दिन):
यह समय बरकत और खुशहाली का माना जाता है.
तीसरा हिस्सा – निजात (आखिरी 10 दिन):
इसका मतलब है जहन्नम से छुटकारा. यह सबसे खास समय माना जाता है.
जब कोई इंसान पूरे रमजान में सच्चे दिल से इबादत करता है, तो उसकी खुशी में ईद मनाई जाती है. ईद का मतलब ही खुशी होता है.
सामाजिक बराबरी का संदेश देता है रमजान
रमजान का सबसे सुंदर दृश्य इफ्तार के समय देखने को मिलता है. इसमें अमीर और गरीब सभी एक साथ बैठकर खाना खाते हैं. नमाज में भी सभी लोग एक ही लाइन में खड़े होते हैं, चाहे वह अमीर हो या गरीब. अल्लामा इकबाल ने भी इस बराबरी को इन शब्दों में बताया है—
“एक ही सफ में खड़े हो गये महमूद व अयाज,
न कोई बंदा रहा और न कोई बंदा नवाज. ”
इसका मतलब है कि अल्लाह के सामने सभी बराबर हैं.
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रमजान से जुड़ी हदीस की बातें
हजरत मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमाया है कि जो व्यक्ति ईमान और सच्चे दिल से रमजान के रोजे रखता है, उसके पुराने गुनाह माफ कर दिए जाते हैं. एक दूसरी हदीस में कहा गया है कि रोजा रखने वाला इंसान गुनाहों से इस तरह साफ हो जाता है, जैसे वह अभी पैदा हुआ हो.
सेहत के लिए भी फायदेमंद है रमजान
रमजान का रोजा सेहत के लिए भी अच्छा माना जाता है. लगभग 14 घंटे तक बिना खाना-पीना रहने से शरीर को आराम मिलता है. इससे कई बीमारियों में फायदा होता है. रमजान इंसान को अनुशासन, संयम और सादगी सिखाता है. यह महीना हमें दूसरों की मदद करना, धैर्य रखना और समाज के साथ मिलकर रहना सिखाता है.
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By Shaurya Punj
मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.
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