दियारा की पांचों पंचायत में घुसा बाढ़ का पानी, जनजीवन हुआ प्रभावित

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दियारा की पांचों पंचायत में घुसा बाढ़ का पानी, जनजीवन हुआ प्रभावित

प्रखंड क्षेत्र के दियारा पांच पंचायतों में गंगा नदी के जल स्तर में हुए वृद्धि के कारण बाढ़ का पानी निचले इलाके में फैलने लगा है.

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बछवाड़ा. प्रखंड क्षेत्र के दियारा पांच पंचायतों में गंगा नदी के जल स्तर में हुए वृद्धि के कारण बाढ़ का पानी निचले इलाके में फैलने लगा है. बताते चले कि गंगा नदी के किनारे बसे दादूपुर पंचायत, विशनपुर पंचायत, चमथा एक, चमथा दो, चमथा तीन ये सभी पंचायत बाढ़ के समय बढ़ते जलस्तर से बहुत ज्यादा प्रभावित होता हैं. इन सभी पंचायत के निचले हिस्से में गंगा नदी में बाढ़ आते ही पानी चला आता है. जिससे निचले हिस्से पर बसे लोगों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है. ऐसे में उन लोगों को बाढ़ के पानी में रहने को विवश होना पड़ता है. दियारे में बाढ़ के पानी आने के पश्चात कई पुलिया डूब चुका है. जिसके कारण लोगों को पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है. दादूपुर पंचायत के चारों तरफ से पानी फैल चुका है, साथ ही विद्यालय के प्रांगण में भी पानी फैलने लगा है. कुछ ऐसा ही हाल विशनपुर पंचायत का है जो बाढ़ के समय सबसे ज्यादा प्रभावित होता है. विशनपुर पंचायत के लोगों को बाढ़ के समय अपना बसेरा भी छोड़ना पड़ जाता है. बाढ़ के समय दादूपुर पंचायत के रानीटोल दियारा, झमटिया दियारा, नारेपुर दियारा, विशनपुर पंचायत के चिरैयाटोक, जमायन कात, वसूलियोंटोल, रतूल्लहपुर, चमथा एक पंचायत के चमथा बालूपर, लक्ष्मण टोल, विंदटोली, चमथा तीन पंचायत के हड़पाटे, गोपालपुर, चमथा चक्की, करारी, चमथा बांधपर, जैसे गांव में बाढ़ का पानी घुस चुका है. स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि ये दुर्भाग्य है कि बाढ़ का पानी गांव मुहल्ला में घुस चुका है लेकिन स्थानीय प्रशासन ने अभी तक किसी प्रकार का संज्ञान नहीं लिया है. निचले इलाके में पानी आ जाने से सबसे ज्यादा मवेशियों के चारा का संकट उत्पन्न हो गया है. किसान मवेशी को लेकर दियारा क्षेत्र छोड़ने पर विवश है. अपने मवेशी को लेकर दियारा क्षेत्र से अलग अलग जगहों पर अपना बसेरा बनाना शुरू कर दिये हैं. बाढ़ के कारण लोगों को बाजार जाने में दिक्कत हो रहा है जिस कारण जरूरी वस्तु लाना दूभर हो गया है. पानी के कारण जहां तहां रास्ता पुलिया डूब चुका है और प्रशासन के द्वारा नाव की व्यवस्था नहीं रहने के कारण पानी में तैर कर जाने को विवश हैं. हर वक्त अनहोनी का डर बना रहता है. लोग निजी नाव का घंटों इंतजार करते हैं या केले के थाम या चचरी से बने नाव पर नदी पार करते हैं.

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