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संगीत की लय में बंधे श्रद्धालु झूमने को हुए मजबूर

Updated at : 14 Oct 2025 10:12 PM (IST)
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संगीत की लय में बंधे श्रद्धालु झूमने को हुए मजबूर

सिमरियाधाम में आयोजित राजकीय कल्पवास मेला में प्रतिदिन सांस्कृतिक संध्या में लोक कलाकार अपनी प्रस्तुति से लोगों का भरपूर मनोरंजन कर रहे हैं.

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बीहट. सिमरियाधाम में आयोजित राजकीय कल्पवास मेला में प्रतिदिन सांस्कृतिक संध्या में लोक कलाकार अपनी प्रस्तुति से लोगों का भरपूर मनोरंजन कर रहे हैं. बीती शाम “झंकार”समस्तीपुर के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम की में कलाकारों ने अपनी जबर्दस्त संगीतमय प्रस्तुति से श्रद्धालुओं व कल्पवासियों का मन मोह लिया और सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया. सर्वप्रथम झंकार के निर्देशक बृजेश कुमार सुमन ने गणेश वंदना में जरा दोनों हाथ उठाना हनुमान के लिए तू कितनी अच्छी है ओ मां मेरी मां,मानो तो मैं गंगा मां हूं जैसे गीतों की प्रस्तुति से समां बांधा. उसके बाद तमन्ना कुमारी द्वारा ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन,श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम, जय जय भैरवी असुर भयावनी, छठ गीत मैया है गंगा मैया, कांचे ही बांस के बहंगियां,उठ है सूरज देव की प्रस्तुति को लोगों ने करतल ध्वनि से स्वागत किया.वही बृजेश कुमार सुमन द्वारा अगे माई, हम न रहब इधर द्वारा कई लोक गीतों की प्रस्तुति दी गई.गायकों के साथ दीपक कुमार ने ऑर्गन, पंकज कुमार ने नाल,एवं विक्रम राठौर ने पैड पर संगत देकर बेहतरीन तालमेल पेश किया. विमलेन्द्र कुमार ने अपनी उदघोषणा से दर्शकों को बांधे रखा. मंचीय व्यवस्था एवं संचालन में रामसुंदर गांधी तथा सहयोगी के रूप में मनोज कुमार, मनीष कौशिक थे. मौके पर मौजूद जिला कला संस्कृति पदाधिकारी श्याम कुमार सहनी ने सभी कलाकारों की प्रशंसा की एवं अंग वस्त्र एवं पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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MANISH KUMAR

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