खेती के लिए नयी तकनीक अपनाएं किसान, बढ़ेगी आमदनी : कृषि पदाधिकारी

Updated at : 02 Jun 2024 9:34 PM (IST)
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खेती के लिए नयी तकनीक अपनाएं किसान, बढ़ेगी आमदनी : कृषि पदाधिकारी

प्रखंड मुख्यालय स्थित इ-किसान भवन में रविवार को कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण आत्मा के तत्वावधान में प्रखंड स्तरीय खरीफ महोत्सव प्रशिक्षण सह उपादान वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

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चेरियाबरियारपुर. प्रखंड मुख्यालय स्थित इ-किसान भवन में रविवार को कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण आत्मा के तत्वावधान में प्रखंड स्तरीय खरीफ महोत्सव प्रशिक्षण सह उपादान वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसकी अध्यक्षता करते हुए प्रखंड कृषि पदाधिकारी पारसनाथ काजी ने मौजूद किसानों को जागरूक किया तथा सभी किसानों से खेती की नयी तकनीक अपनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने एवं खेती की समृद्धि के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है. इसके लिए सरकार बीज, कृषि यंत्र, कीटनाशक सहित कई योजनाएं चलायी जा रही है. उन्होंनें किसानों से सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ लेने की अपील करते हुए कहा कि समय पर और उचित मूल्य पर बीज उपलब्ध कराना तथा इसकी जानकारी देना हमारा धर्म है. कार्यशाला में प्रखंड तकनीक पदाधिकारी डाॅली कुमारी ने आत्मा के तहत कृषक प्रशिक्षण, परिभ्रमण, किसान पाठशाला, समूह निर्माण सहित विभिन्न योजना की जानकारी देते हुए कहा कि प्रशिक्षण से किसानों को नयी तकनीक की जानकारी मिलती है. जिससे उनकी आमदनी में वृद्धि होती है. वही प्रखंड उद्यान पदाधिकारी अमृत किशोर राय ने केला, आम, पपीता, मशरूम, गेंदा फूल ड्रीप स्पिकलर पर मिलने वाले अनुदान एवं उसके मिलने के तरीके पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि केला, आम, मशरूम पर पचास प्रतिशत, गेंदा और पपीता पर पचहत्तर प्रतिशत और ड्रीप स्पिकलर पर अस्सी प्रतिशत अनुदान देय है. प्रगतिशील किसान राम कुमार सिंह ने मोटे अनाज पर जोर दे देते हुए कहा कि इसकी खेती 6 से कम खर्च और मुनाफा अधिक प्राप्त होती है. इसको बढ़ावा देने के लिए सरकार मदद भी कर रही है. मोटे अनाज के रुप मे ज्वार, बाजरा, रागी आदि की खेती करने पर सरकार द्वारा अनुदान भी दी जा रही है. कृषि समन्वयक निकेश कुमार ने कृषि यंत्र पर मिलने वाली अनुदान की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा 40 से 80 प्रतिशत अनुदान दी जाती है. उन्होंने कहा कि कृषि यंत्र के बगैर कृषि कार्य अधूरा है. इसके अलावे उन्होंने स्वीट काण की खेती की भी जानकारी दी.

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