कोरोना काल में भी बिहार के किसानों को लोन न देने का बैंकों ने बनाया बहाना, PMO को रिपोर्ट भेजने की तैयारी
Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 13 Feb 2021 6:44 AM
कोविड में किसान और खेती को नुकसान न पहुंचे इसके लिए सरकार ने जो दरियादिली दिखायी बैंकों ने उस पर पानी फेर दिया. केसीसी सहित डेयरी, फिशरी और पॉल्ट्री कृषि से जुड़े प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को ऋण वितरित नहीं किया गया.
अनुज शर्मा, पटना. सदी की सबसे बड़ी महामारी कोविड में किसान और खेती को नुकसान न पहुंचे इसके लिए सरकार ने जो दरियादिली दिखायी बैंकों ने उस पर पानी फेर दिया. केसीसी सहित डेयरी, फिशरी और पॉल्ट्री कृषि से जुड़े प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को ऋण वितरित नहीं किया गया.
बैंक अधिकारियों ने कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह को बताया कि कोरोना के कारण ऐसा हुआ. बैंकों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा किया, तो बैंकों ने कोरोना को जिम्मेदार ठहरा दिया. कृषि मंत्री ने इस पर नाराजगी जतायी है.
विभाग को विस्तृत रिपोर्ट बनाकर पीएमओ को भेजने के आदेश दिये हैं. प्रदेश सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए वार्षिक साख योजना में कृषि निवेश पर सर्वाधिक जोर दिया है.
कृषि में पूंजी निर्माण को प्राप्त करने के उद्देश्य से कृषि ऋण के लिए अधिक सीमा निर्धारित की गयी है. इससे जल संसाधन विकास, सिंचाई, भूमि विकास, पशुपालन , डेयरी विकास आदि क्षेत्र में क्रेडिट प्रवाह निर्धारित किया गया है. बैंक इसमें ठीक से काम नहीं कर रहे हैं.
वार्षिक साख योजना (एसीपी)की उपलब्धि मात्र 9.57 फीसदी है. बैंकों को 10 लाख 48 लोगों को ऋण देना था. 15 मई, 2020 तक 50767 लोगों को लोन दिया. 24 सितंबर, 2020 तक के आंकड़े बता रहे हैं कि जब कोरोना चरम पर था.
सरकार किसानों को बीज तक घर पर पहुंचाने में जुटी थी तब भी बैंकों ने मात्र 25901 किसानों को ही लोन दिये. बैंकों ने 24 सितंबर तक कुल 76 हजार 668 किसान आदि को लोन दिया.
कोरोना नहीं था तब भी बैंकों का यही हाल था. 2017-18 में डेयरी, पॉल्ट्री और फिशरी के क्षेत्र में लक्ष्य का मात्र 20 प्रतिशत, कृषि यांत्रिकीकरण का 22 और भंडारण के क्षेत्र में मात्र 18 प्रतिशत ही लक्ष्य हासिल किया था. 2019-20 की उपलब्धि भी मात्र 14.40 फीसदी रही है.
कृषि मंत्री के आदेश पर कृषि निदेशक अादेश तितरमारे ने 29 जनवरी को राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) के संयोजक को पत्र लिखा है. एसएलबीसी की बैठक की कार्यवाही का हवाला देते हुए वित्तीय वर्ष 2017 -18, 2018-19 और 2019-20 तक का पूरा ब्योरा (केसीसी ऋण प्रवाह) मांगा है. किस बैंक को कितना लक्ष्य मिला था, कितना पूरा किया इसकी रिपोर्ट पीएमओ और वित्त मंत्रालय को भेजी जायेगी.
कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि एसएलबीसी की बैठक में जानकारी हुई कि बैंक मनमानी तरीके से काम कर रहे हैं. किसानों को उनका हक नहीं पहुंचा रहे. यह चिंता की बात है. इससे राज्य का विकास प्रभावित हो रहा है. हम दिशा में अपने स्तर से कार्रवाई करने जा रहे हैं.
Posted by Ashish Jha
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