अंग संस्कारशाला के समर कैंप में गूंजे संस्कार के स्वर, बच्चों ने सीखे नैतिकता व व्यक्तित्व विकास के गुर

Published by : AMIT KUMAR SINH Updated At : 11 Jun 2026 11:03 AM

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Personality Development Summer Camp : सिर्फ किताबों का ज्ञान ही नहीं, बल्कि अच्छे संस्कार और नैतिक मूल्य भी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव होते हैं. इसी सोच के साथ आयोजित अंग संस्कारशाला के समर कैंप में बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और व्यक्तित्व विकास के महत्वपूर्ण पाठ पढ़ाए गए. शिविर में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए नैतिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया.

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पंजवारा बांका से गौरव कश्यप की रिपोर्ट

Banka News : पंजवारा क्षेत्र के मध्य विद्यालय लखपुरा (बालक) में संचालित अंग संस्कारशाला के समर कैंप में बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ नैतिकता, संस्कार और व्यक्तित्व विकास की विशेष जानकारी दी गई. कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने प्रार्थना, अनुशासन और नैतिक शिक्षा से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया. वक्ताओं ने बच्चों को महापुरुषों के आदर्शों, शिक्षा के महत्व और अच्छे संस्कारों के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा दी.

संस्कार व नैतिक शिक्षा पर रहा विशेष जोर

समर कैंप के दौरान बच्चों को केवल शैक्षणिक जानकारी ही नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों से जुड़ी शिक्षा भी दी गई. प्रार्थना, अनुशासन और नैतिकता पर आधारित गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को अच्छे व्यवहार, जिम्मेदारी और सामाजिक मूल्यों के बारे में बताया गया. शिक्षकों और स्वयंसेवकों ने कहा कि शिक्षा तभी पूर्ण मानी जाती है जब उसके साथ अच्छे संस्कार भी जुड़े हों. बच्चों ने पूरे मनोयोग से गतिविधियों में भाग लेते हुए सीखने की उत्सुकता दिखाई.

महात्मा गांधी के आदर्शों से कराया परिचय

कार्यक्रम में लखपुरा गांव के प्रबुद्ध नागरिक बेनी माधव झा ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन और विचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने बच्चों को सत्य, अहिंसा, ईमानदारी और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी. उन्होंने कहा कि गांधीजी के आदर्श आज भी समाज के लिए प्रासंगिक हैं. इस दौरान गीतों और प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से गांधीजी के विचारों को सरल भाषा में बच्चों तक पहुंचाया गया, जिससे विद्यार्थियों ने उन्हें सहज रूप से समझा.

बालिका शिक्षा को बताया समाज विकास की कुंजी

स्वतंत्र विचारक एवं लेखक जेबियर झा ने अपने संबोधन में बालिका शिक्षा के महत्व पर विशेष बल दिया. उन्होंने कहा कि किसी भी समाज के समग्र विकास के लिए महिलाओं और बालिकाओं की शिक्षा अत्यंत आवश्यक है. शिक्षित बेटियां न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज को नई दिशा देने का कार्य करती हैं. उन्होंने बच्चों को समान शिक्षा और लैंगिक समानता के महत्व से अवगत कराते हुए कहा कि एक सशक्त और विकसित समाज के निर्माण में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है.

स्वयंसेविकाओं ने बताये अच्छे आचरण के सूत्र

कार्यक्रम में स्वयं सेविका काजल कुमारी ने बच्चों को नैतिक मूल्यों, अनुशासन, स्वच्छता और अच्छे व्यवहार के महत्व की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए पढ़ाई के साथ-साथ अच्छे संस्कार भी जरूरी हैं. वहीं स्वयं सेवक मनीषा कुमारी ने बच्चों को नियमित अध्ययन, परिश्रम और अनुशासन के प्रति जागरूक किया. उन्होंने बताया कि निरंतर प्रयास और सकारात्मक सोच से ही जीवन में सफलता हासिल की जा सकती है. उनके इस प्रयास की अभिभावकों और ग्रामीणों ने सराहना की.

बच्चों ने लिया अच्छे संस्कार अपनाने का संकल्प

समर कैंप के समापन अवसर पर बच्चों ने शिक्षा के साथ नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया. पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों का उत्साह देखने लायक था. ग्रामीणों और अभिभावकों ने अंग संस्कारशाला की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार के शिविर आयोजित करने की आवश्यकता बताई, ताकि बच्चों को शिक्षा के साथ बेहतर संस्कार और जीवन मूल्यों की सीख मिलती रहे.

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