दाल, सब्जी और आलू-प्याज के बढ़ती कीमत ने रसोई का बजट बिगाड़ा

Updated at : 07 Jul 2024 12:08 AM (IST)
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दाल, सब्जी और आलू-प्याज के बढ़ती कीमत ने रसोई का बजट बिगाड़ा

दाल, सब्जी और आलू-प्याज के बढ़ती कीमत ने रसोई का बजट बिगाड़ा

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रजौन. राशन और सब्जियों की बढ़ती कीमतों से आम आदमी के रसोई का बजट गड़बड़ा गया है. दाल और सब्जियों की महंगाई मध्यम वर्ग को खासा परेशान कर रही है. देश में महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है. हर स्तर पर लोग महंगाई से जूझ रहे हैं. खाने के ज्यादातर सामान के दाम आसमान पर हैं. दाल हो या सब्जियां. आम लोगों की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं. घरेलू महिलाओं का कहना है कि घर के किचन का बजट बिगड़ गया है. महंगाई की मार ने परेशान कर दिया है. कमाई पहले जितनी ही है. लोगों का कहना है ज्यादा उपयोग की जाने वाली अरहर दाल 180 रुपये किलो तक बिक रही है और मूंग दाल भी एक सौ बीस रुपये की सीमा को लांघ चुकी है. किचन के बजट बिगड़ने में आलू-प्याज भी हरी सब्जी-दाल का साथ बखूबी निभा रहे हैं. हालांकि तेल और शक्कर ने कुछ राहत दी है. आलू 30- 35 व प्याज 50 रुपये किलो बिक रहे है. बीते साल इन्हीं दिनों से तुलना की जाए तो रोजमर्रा सामग्री की महंगाई लोगों को हैरान कर रही है. आम चुनाव के बाद में खाद्य पदार्थों की बढ़ी हुई महंगाई सिस्टम पर भी सवाल खड़ा कर रही है. आलू-प्याज के दाम भी बीते साल जून में मौजूदा दामों के मुकाबले करीब आधे थे. कहते हैं गृहिणी – खुशबू कुमारी ने बताया कि महंगाई ने उनके किचन का बजट बिगाड़ दिया है. आज से करीब 2 महीने पहले उनकी किचन का बजट जो 10 हजार हुआ करता था, वो आज बढ़कर 14 हजार पहुंच गया है. – शशिकला भारती भी महंगाई की मार से परेशान हैं. उन्होंने बताया कि हर साल जितनी महंगाई बढ़ रही है. उतनी इनकम नहीं बढ़ पा रही है. सब्जियों व दाल की बढ़ती कीमतों ने मध्यम वर्ग को परेशान कर रखा है. रसोई के राशन ने रसोई का बजट नहीं बल्कि पूरा बजट बिगाड़ दिया है. ऐसे में आम आम आदमी का गुजारा कैसे हो पाएगा, सोचनीय है. – गुंजन कुमारी का कहना है कि दाल व सब्जियों की बढ़ती कीमतों से रसोई का बजट पूरी तरह से चरमराया हुआ है. आमलोगों को अब रसोई चलाना भी मुश्किल हो गया है. इतनी महंगाई पहुंच से बाहर हो रही है. घर का गुजारा करना बहुत ही मुश्किल होता जा रहा है. – बीबी मरियम खातून कहती है महंगाई की ऐसी आग लगी है कि उसने सभी का जीना मुश्किल कर दिया है. इस महंगाई में गरीब आदमी खाए क्या, यह चिंता उसे दिन भर सताती रहती है. जब सब्जी या राशन की दुकान पर कुछ खरीदने के लिए जाते हैं, तो भाव सुनते ही पसीने छूटते है.

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