कबाड़ के लोहे में फूंकी नयी जिंदगी, बांका के मूर्तिकार प्रभाकर सिंह दे रहे नशामुक्ति का संदेश

Published by : AMIT KUMAR SINH Updated At : 18 May 2026 10:19 AM

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Banka News : टूटे-फूटे लोहे के कबाड़ को लोग भले ही बेकार समझते हों, लेकिन बांका के मूर्तिकार प्रभाकर सिंह ने इन्हीं धातुओं में नई जान फूंक दी है. स्क्रैप आयरन से बनाई गयी उनकी कलाकृतियां अब सिर्फ कला नहीं, बल्कि समाज को नशामुक्ति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही हैं.

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रजौन (बांका) से पीयूष कुमार की रिपोर्ट :

बांका जिले के रजौन प्रखंड अंतर्गत बनगांव निवासी प्रसिद्ध मूर्तिकार प्रभाकर सिंह अपनी अनोखी कला शैली के कारण देशभर में पहचान बना चुके हैं. उन्होंने कबाड़ के लोहे और धातुओं के टुकड़ों को जोड़कर ऐसी कलाकृतियां तैयार की हैं, जो लोगों को सोचने पर मजबूर कर देती हैं. हाल ही में उन्होंने गांजा पीते व्यक्ति की एक मूर्ति तैयार कर नशामुक्ति का मजबूत संदेश दिया है. इस कलाकृति में शरीर को अंदर से खोखला करने वाली लत को बारीकी से दर्शाया गया है.

गांव की मिट्टी से शुरू हुआ कला का सफर

प्रभाकर सिंह का बचपन ग्रामीण परिवेश में बीता. पढ़ाई के दौरान ही उन्हें मिट्टी से हाथी, गाड़ी और खिलौने बनाने का शौक था. सामान्य पढ़ाई में रुचि कम होने पर उन्हें डांट भी सुननी पड़ती थी, लेकिन कला के प्रति उनकी लगन को पहचान कर डीएन सिंह कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. महेश प्रसाद सिंह ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.मैट्रिक के बाद उन्होंने भागलपुर कला केंद्र में दाखिला लिया और बाद में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) पहुंचे. यहीं उन्होंने धातु के छोटे-छोटे टुकड़ों को जोड़कर Sculpture बनाने की नई तकनीक विकसित की, जिसने उन्हें कला जगत में अलग पहचान दिलायी.

कबाड़ से तैयार करते हैं आधुनिक मूर्तियां

प्रभाकर सिंह स्क्रैप आयरन, स्टील, ब्रास और कॉपर से विशाल आधुनिक मूर्तियां बनाते हैं. उनकी कला की सबसे बड़ी खासियत Hollow Form और धातुओं का सूक्ष्म संयोजन है. वेल्डिंग तकनीक से तैयार की गयी उनकी कलाकृतियां देश के कई बड़े शहरों में स्थापित हैं.

देशभर में चर्चित हैं इनकी कलाकृतियां

पुणे, मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली, लखनऊ और वाराणसी सहित कई शहरों में उनकी मूर्तियां लगायी गयी हैं. पुणे के बालेवाड़ी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में स्थापित “भवरा” और “सांप-सीढ़ी” थीम आधारित इंस्टॉलेशन काफी चर्चित रहे हैं.

कला के साथ समाज को संदेश

प्रभाकर सिंह अपनी कलाकृतियों के माध्यम से नशाखोरी, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और ग्रामीण जीवन को दर्शाने का प्रयास करते हैं. महानगरों में रहने के बावजूद उनकी कला में गांव की मिट्टी और ग्रामीण जीवन की झलक साफ दिखाई देती है.

राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

उनकी प्रदर्शनियां मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलरी, दिल्ली और पुणे सहित कई प्रतिष्ठित स्थानों पर आयोजित हो चुकी हैं. उनकी कलाकृतियां कई मशहूर हस्तियों और बड़ी कंपनियों के संग्रह में शामिल हैं. वर्तमान में वे पुणे में अपने Sculpture Studio का संचालन कर रहे हैं और विशाल धातु मूर्तियों के निर्माण में सक्रिय हैं.

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