पसिया पोखर जीर्णोद्धार का कार्य पुनः हुआ प्रारंभ

Updated at : 01 Mar 2025 6:58 PM (IST)
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पसिया पोखर जीर्णोद्धार का कार्य पुनः हुआ प्रारंभ

थाना क्षेत्र की डुमरिया पंचायत अंतर्गत पसिया गांव में लघु सिंचाई विभाग से जल जीवन हरियाली अभियान के तहत पसिया पोखर के जीर्णोद्धार कार्य को एक बार पुन: प्रारंभ करने के लिए एसडीओ के निर्देश पर सीओ, बीडीओ व थानाध्यक्ष पुलिस बल के साथ कार्य स्थल पर पहुंचे.

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बेलहर. थाना क्षेत्र की डुमरिया पंचायत अंतर्गत पसिया गांव में लघु सिंचाई विभाग से जल जीवन हरियाली अभियान के तहत पसिया पोखर के जीर्णोद्धार कार्य को एक बार पुन: प्रारंभ करने के लिए एसडीओ के निर्देश पर सीओ, बीडीओ व थानाध्यक्ष पुलिस बल के साथ कार्य स्थल पर पहुंचे. जहां ग्रामीणों ने पुन: निजी जमीन होने के कारण कार्य करने का विरोध किया. इस कारण पुलिस ने एक व्यक्ति को पकड़कर थाना लायी. इसके बाद गांव की कुछ महिलाओं ने थाना पर आकर पकड़े गये व्यक्ति को छुड़ाने के प्रयास में विरोध किया. जिस पर थानाध्यक्ष राजकुमार प्रसाद ने समझा बुझाकर सभी को वापस भेज दिया. ज्ञात हो कि लघु जल संसाधन विभाग के द्वारा पसिया पोखर का जीर्णोद्धार 96 लाख 5 हजार 29 रुपये की लागत से किए जाने के लिए नवंबर 2023 में ही स्वीकृति मिली थी, लेकिन स्थानीय महादलित ग्रामीणों के द्वारा पसिया पोखर से संबंधित जमीन विवाद न्यायालय में टाइटल सूट चलने को लेकर कार्य करने का विरोध किया गया था. ग्रामीणों का कहना था कि न्यायालय का मामला क्लियर हो जाने के बाद ही पोखर पर कुछ भी कार्य किया जाये, लेकिन विभाग के द्वारा पसिया पोखर जो 4 एकड़ 71 डेसिमल रकवा की है वह सरकारी होने को लेकर इसके जीर्णोद्धार की स्वीकृति दी है. वहीं ग्रामीणों के विरोध के बाद स्थानीय अंचल कार्यालय से पोखर का नापी कराकर सीमांकन कराकर एसडीओ के निर्देश पर मजिस्ट्रेट व पुलिस पदाधिकारी की नियुक्ति के साथ 5 जनवरी 2025 से काम प्रारंभ कर दिया था. जिससे क्षुब्ध होकर कुछ ग्रामीणों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर किया था. हाई कोर्ट के द्वारा याचिका खारिज करने के बाद पुन: एसडीओ के निर्देश पर शनिवार को मजिस्ट्रेट व पुलिस की नियुक्ति के बाद कार्य प्रारंभ किया गया. इस संबंध में थानाध्यक्ष राजकुमार प्रसाद ने बताया कि कार्य प्रारंभ करने पर कुछ ग्रामीणों के द्वारा असंवैधानिक तरीके से विरोध किया जा रहा था. इस कारण एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया था. जिसे बाद में समझा-बुझाकर छोड़ दिया गया.

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