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अब उंगलियों तक सिमट गयी नये साल की बधाई, यादें बन गये ग्रीटिंग कार्ड्स

Updated at : 20 Dec 2025 5:57 PM (IST)
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अब उंगलियों तक सिमट गयी नये साल की बधाई, यादें बन गये ग्रीटिंग कार्ड्स

एक दौर था जब नये साल की आहट के साथ ही शहर और कस्बों के बाजार रंग-बिरंगे ग्रीटिंग कार्ड्स से गुलजार हो जाते थे.

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गौरव कश्यप, पंजवारा. एक दौर था जब नये साल की आहट के साथ ही शहर और कस्बों के बाजार रंग-बिरंगे ग्रीटिंग कार्ड्स से गुलजार हो जाते थे. स्टेशनरी दुकानों के बाहर भीड़ लगी रहती थी. स्कूली बच्चे अपने दोस्तों के लिए, तो कॉलेज के छात्र अपनी पसंद के खास कार्ड्स चुनने में घंटों लगा देते थे. कोई शायरी वाला कार्ड ढूंढता था, तो कोई म्यूजिकल कार्ड के पीछे भागता था, लेकिन वक्त के साथ बधाई देने का अंदाज बदल गया. मोबाइल और सोशल मीडिया के दौर में अब ग्रीटिंग कार्ड्स दुकानों में धूल फांकते नजर आ रहे हैं.

स्कूल-कॉलेज के छात्रों में था सबसे ज्यादा क्रेज

स्थानीय दुकानदार बताते हैं कि ग्रीटिंग कार्ड्स का असली बाजार स्कूल और कॉलेज के छात्र ही हुआ करते थे. स्कूलों में दोस्ती निभाने के लिए कार्ड्स का आदान-प्रदान आम बात थी. कॉलेज स्टूडेंट्स अपने क्रश या करीबी दोस्तों को खास संदेश लिखकर कार्ड देते थे. कई बार कार्ड्स के अंदर छोटे-छोटे खत भी छुपे होते थे, जो आज की पीढ़ी शायद ही समझ पाय. अब वही छात्र नये साल की रात 12 बजते ही व्हाट्सएप स्टेटस और इंस्टाग्राम स्टोरी डालकर औपचारिकता पूरी कर लेते हैं.

पुराना स्टॉक निकालने में जुटे दुकानदार

ग्रीटिंग कार्ड्स के कारोबार से जुड़े दुकानदारों का कहना है कि अब नया माल मंगाना घाटे का सौदा हो गया है. एक दुकानदार विजय पुस्तक भंडार ने बताया कि पहले दिसंबर आते ही दुकान भर जाती थी, अब पुराना स्टॉक ही किसी तरह निकालना पड़ रहा है. कार्ड खरीदने वाले गिने-चुने रह गये हैं. कई दुकानदार तो कार्ड्स को भारी छूट पर बेच रहे हैं, ताकि किसी तरह लागत निकल सके. एक स्थानीय दुकानदार अनंत पुस्तक भंडार कहते हैं कि पहले नये साल पर दुकान में पैर रखने की जगह नहीं होती थी. अब बस वही लोग आते हैं, जो पुरानी यादों से जुड़े हैं.

डिजिटल दौर ने बदली बधाई की परंपरा

बधाई देने की संस्कृति में आये इस बड़े बदलाव के पीछे कई कारण हैं

तत्काल बधाई :

साल के पहले सेकेंड में ही एक क्लिक पर सैकड़ों लोगों को मैसेज

खर्च से बचत :

कार्ड खरीदना, लिफाफा और डाक का झंझट अब कोई नहीं चाहता

नया ट्रेंड :

एनिमेटेड स्टिकर, जीआइएफ और वीडियो मैसेज ने कागज के कार्ड को पीछे छोड़ दिया

ग्रीटिंग कार्ड नहीं, अब गिफ्ट आइटम्स का सहारा

कारोबारियों ने समय के साथ खुद को ढाल लिया है. अब ग्रीटिंग कार्ड्स की जगह गिफ्ट आइटम्स, सजावटी सामान, केक टॉपर्स और डिजिटल ग्रीटिंग प्रिंट ज्यादा बिक रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GOURAV KASHYAP

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